राजनीति

समाज में फैली आर्थिक विषमता मॉब लिंचिंग का कारण है: भाजपा सांसद

भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी ने पश्चिम बंगाल के प्रवासी मज़दूर मानिक रॉय और केरल में एक आदिवासी युवक मधु का उदाहरण देते हुए कहा कि पीट-पीटकर हत्या करने के ये मामले आर्थिक मुद्दों से जुड़े हैं.

भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी. (फोटो साभार: फेसबुक)

भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी. (फोटो साभार: फेसबुक)

नई दिल्ली: भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी ने बुधवार को लोकसभा में कहा कि देश में हो रही पीट-पीटकर हत्याओं (लिंचिंग) की घटनाओं की वजह आर्थिक विषमता है.

सदन में शून्यकाल के दौरान लेखी ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को ‘भीड़तंत्र’ के बारे में टिप्पणी की.

उन्होंने बंगाल के प्रवासी मजदूर मानिक रॉय और केरल में एक आदिवासी युवक मधु का उदाहरण देते हुए कहा कि पीट-पीटकर हत्या करने के ये मामले आर्थिक मुद्दों से जुड़े हुए हैं.

पिछले महीने केरल के तिरुवनंतपुरम में लोगों के एक समूह द्वारा मानिक रॉय को मुर्गा चोरी के शक में पीटा गया था. चोटों के चलते बाद में उसकी मौत हो गई थी. वहीं, फरवरी में 30 साल के एक आदिवासी युवक मधु को क्रुद्ध भीड़ ने चोरी के आरोप में पीट-पीटकर मार डाला था.

बीते बुधवार को संसद का मानसून सत्र हंगामेदार रहा. विपक्ष ने सरकार को घेरने के लिए मॉब लिंचिंग का मामला उठाया. दोनों ही सदनों- लोकसभा और राज्यसभा में जमकर हंगामा हुआ.

वहीं, दैनिक भास्कर के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने चर्चा के दौरान कहा कि यह राज्यों का कर्तव्य है कि वे ऐसी घटनाएं रोकें. राज्य सरकारें सुनती ही नहीं, क्या केंद्र बदमाशों को नियंत्रित करने के लिए सेना भेजे? अगर नया कानून बना तो उसे राज्यों को क्रियान्वित करना होगा.

भाजपा सांसद हुकुमदेव सिंह ने कहा, ‘कानून व्यवस्था सुधारना राज्य सरकारों पर है. विपक्ष राजनीति कर रहा है. क्यों श्रीनगर में डीएसपी अयूब पंडित की मौत कोई मुद्दा नहीं है? जुनैद की हत्या को धार्मिक रंग क्यों दिया गया?’

 

तो दूसरी और विपक्ष मांग है कि सरकार मॉब लिंचिंग पर रोक लगाने के लिए कानून बनाए.

कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, ‘धर्म के नाम पर हत्याएं की जा रही हैं. झारखंड और मध्य प्रदेश इनका केंद्र हैं. इनके पीछे भाजपा से जुड़े संगठन बजरंग दल, वीएचपी और कथित गोरक्षक हैं. सरकार बताए कि उसने क्या कार्रवाई की.’

वहीं तृणमूल कांग्रेस सांसद सौगत रॉय मोदी सरकार में इन घटनाओं में 86 प्रतिशत पीड़ित मुस्लिम हैं. मैं सरकार से पूछना चाहता हूं कि आप कांग्रेस मुक्त भारत की तरह मुस्लिम मुक्त भारत चाहते हैं.

मालूम हो कि बीते 17 जुलाई को कथित गोरक्षकों और भीड़ द्वारा हो रही हिंसा के ख़िलाफ़ दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा था कि डर और अराजकता के माहौल से निपटना सरकार की ज़िम्मेदारी है.

शीर्ष अदालत ने कहा कि ‘भीड़तंत्र की इन भयावह गतिविधियों’ को नया चलन नहीं बनने दिया जा सकता. उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि संसद को भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या के मामलों से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए नया कानून बनाने पर विचार करना चाहिए.

इस बीच केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि मॉब लिंचिंग की देश में भीड़ द्वारा पीट-पीट कर हत्या करने के मामले दुर्भाग्यपूर्ण हैं और केंद्र ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए प्रभावी कार्रवाई कर रहा है तथा इस पर रोकथाम के लिए सोशल मीडिया सेवा प्रदाताओं से भी फर्जी समाचार पर रोक लगाने की व्यवस्था करने को कहा गया है.

उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं के बारे में संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्रियों से सीधे संपर्क में रहते हैं और जो भी अपराधी है, उन पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)