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जेएनयू ने उमर ख़ालिद और दो अन्य छात्रों की पीएचडी थीसिस जमा करने से इनकार किया

जेएनयू के शोध छात्र उमर ख़ालिद का कहना है कि अदालत के आदेश के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन ने पीएचडी थीसिस लेने से इनकार कर कोर्ट की अवमानना की है.

उमर ख़ालिद. (फोटो: द वायर)

उमर ख़ालिद. (फोटो: द वायर)

नई दिल्ली: इतिहास के शोध छात्र उमर ख़ालिद समेत तीन छात्रों की पीएचडी थीसिस स्वीकार करने से मना कर दिया है. मालूम हो कि सोमवार यानी 23 जुलाई को थीसिस जमा करने का अंतिम दिन है. उमर का कहना है कि अदालत के आदेश के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन ने थीसिस लेने से इनकार कर अदालत की अवमानना की है.

बीते 20 जुलाई को जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार की याचिका पर फैसले के बाद दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल ने उमर और अन्य छात्रों के विषय में कहा था कि अदालत जब तक अन्य छात्रों की याचिका पर फैसला नहीं कर लेती, तब तक जेएनयू विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं करेगा.

कुल 13 छात्रों के ख़िलाफ़ विश्वविद्यालय की उच्चस्तरीय जांच समिति ने आदेश सुनाया था, जिसमें चार लोगों को सोमवार को पीएचडी थीसिस जमा करनी है. इनमें कन्हैया कुमार, उमर ख़ालिद, अफ्रीकन स्टडीज़ की अस्वति और लॉ और गवर्नेंस के अनंत प्रकाश नारायण शामिल हैं.

कन्हैया कुमार को अदालत से राहत मिल चुकी है, लेकिन सोमवार की सुबह चीफ प्रॉक्टर ने कौशल कुमार ने उमर ख़ालिद, अस्वति और अनंत प्रकाश नारायण की पीएचडी थीसिस जमा करने से इनकार कर दिया.

इससे पहले जेएनयू प्रशासन की उच्चस्तरीय जांच समिति ने पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार, उमर ख़ालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य के अलावा अन्य छात्रों पर 9 फरवरी, 2016 को कथित तौर पर देश विरोधी नारे लगाने के मामले को लेकर जुर्माना लगाने के साथ उमर ख़ालिद को विश्वविद्यालय से निष्कासित करने का भी आदेश दिया था.

कथित तौर पर देश विरोधी नारा लगाने के लिए 10 हज़ार रुपये का जुर्माना लगाने के जेएनयू प्रशासन के फैसले को कन्हैया कुमार ने बीते 17 जुलाई को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी.

मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने जेएनयू प्रशासन के फैसलों को आधारहीन बताते हुए खारिज कर दिया था. हालांकि अदालत ने उमर ख़ालिद की याचिका पर सुनवाई नहीं की, लेकिन अदालत ने जेएनयू प्रशासन को आदेश दिया कि इस मामले में जब तक कोई आदेश न आए, तब तक छात्रों के ख़िलाफ़ कोई क़दम नहीं उठाया जाना चाहिए.

उमर ख़ालिद ने द वायर से बात करते हुए बताया, ‘आज पीएचडी थीसिस जमा करने का अंतिम दिन है, लेकिन चीफ प्रॉक्टर कौशल कुमार ने इसे जमा करने से मना कर दिया. मैंने जब कारण पूछा तो उन्होंने कहा कि प्रशासन द्वारा आदेश के अनुसार वो स्वीकार नहीं कर सकते. जब मैंने अदालत के निर्देश का हवाला दिया, तो उन्होंने कहा कि अभी आदेश नहीं मिला है. ये तो साफ-साफ अदालत के आदेश की अवमानना है.’

उमर का कहना है कि चीफ प्रॉक्टर ने कहा कि वो पीएचडी अदालत के आदेश के बाद स्वीकार करेंगे, लेकिन विश्वविद्यालय के नियम के अनुसार 23 जुलाई को थीसिस जमा करने का अंतिम दिन है. उन्होंने बताया कि चीफ प्रॉक्टर ने लिखित में कोई आश्वासन देने से इनकार कर दिया कि तीनों छात्रों की थीसिस अदालत के आदेश के बाद ही स्वीकार किया जाएगा.

शोध छात्रा अस्वति ने द वायर से बात करते हुए बताया, ‘जेएनयू प्रशासन बदले की नीति अपना रहा है. जब अदालत ने कहा है कि छात्रों के ख़िलाफ़ आदेश आने तक कोई कार्रवाई न हो तो क्यों चीफ प्रॉक्टर हमारे क्लीयरेंस फॉर्म पर दस्तख़त नहीं कर रहे हैं. वो नहीं करेंगे, तो हमारा गाइड भी नहीं करेगा. आज अंतिम दिन है और जब हमने पूछा तो उन्होंने कहा कि कन्हैया कुमार और तुम लोगों की याचिका अलग है और कन्हैया के आदेश का फैसला तुम तीनों पर लागू नहीं होगा.’

अस्वति ने आगे बताया, ‘जब हमने अदालत द्वारा जेएनयू प्रशासन को दिए निर्देश के बारे में पूछा तो वो कह रहे हैं कि हम कहां कार्रवाई कर रहे हैं. हम तो बस उच्चस्तरीय जांच समिति के आदेश का पालन कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि आदेश के बाद पीएचडी जमा कर ली जाएगी, लेकिन जब हमने लिखित में मांगा, तो उन्होंने इनकार कर दिया.’

मालूम हो कि पीएचडी की 9बी श्रेणी में जो होते हैं, उन्हें निर्धारित तारीख़ पर अपनी पीएचडी थीसिस जमा करनी होती है, क्योंकि यह व्यवस्था उन्हें ही दी जाती है, जो पहले ही थीसिस जमा करने में लेट होते हैं. इसके तहत उन्हें एक्सटेंशन मिलता है.

अस्वति ने आगे बताया, ‘मैं और उमर ख़ालिद 9बी में हैं, जो एक्सटेंशन होता है. उसके नियम के अनुसार हमें आज ही थीसिस जमा करनी है. विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से हमें लिखित में कुछ नहीं मिला है कि हमारी थीसिस बाद में जमा हो जाएगी. हमने आज ही इमरजेंसी सुनवाई के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की है, लेकिन अब पता नहीं कि आज हमारा नंबर आएगा भी या नहीं.’

द वायर ने चीफ प्रॉक्टर कौशल कुमार को फोन और मैसेज करके उनका पक्ष जानना चाहा, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया. उनसे बात होने के बाद रिपोर्ट में उनका पक्ष भी शामिल किया जाएगा.