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लोग अगर गोमांस खाना बंद कर देंगे, तो लिंचिंग भी रुक जाएंगी: संघ नेता

संघ के नेता इंद्रेश कुमार ने सोमवार को कहा कि लिंचिंग के लिए क़ानून होना चाहिए, सरकार को भी कदम उठाने चाहिए, लेकिन इस समस्या से निपटने के लिए समाज को भी सही ‘संस्कारों’ की ज़रूरत है.

Indresh Kumar ANI

इंद्रेश कुमार (फोटो साभार: एएनआई)

रांची: देश भर में गो रक्षा के नाम पर बढ़ रही मॉब लिंचिंग की घटनाओं और इससे निपटने के लिए कानून बनाने की कवायद के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) नेता इंद्रेश कुमार ने कहा है कि अगर लोग गोमांस खाना बंद कर दें, तो इस तरह लिंचिंग की घटनाएं भी अपने आप रुक जाएंगी.

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक रांची में हिंदू जागरण मंच की झारखंड इकाई के दफ्तर का उद्घाटन करने के बाद प्रेस से बात कर रहे इंद्रेश कुमार ने अलवर में गो तस्करी के शक में मारे गए रकबर खान की हत्या पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में यह जवाब दिया.

Mob lynching can’t be welcomed…if the practice of eating cow meat is stopped, many such crimes of the ‘Satan’ could be stopped,” he said. His comments came days after a man was lynched on suspicion of cow smuggling in Rajasthan’s Alwar district.

इंद्रेश कुमार ने कहा, ‘मॉब लिंचिंग अभिनंदनीय नहीं है… अगर लोग गोमांस खाना बंद कर देंगे, तो ऐसे कई अपराध रुक जाएंगे.

उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी समस्याओं से निपटने के लिए समाज को सही संस्कारों की ज़रूरत है.

उन्होंने कहा, ‘किसी भी भीड़ की हिंसा, वो आपके घर, मोहल्ले, जाति, पार्टी किसी की भी हो, कभी अभिनंदनीय नहीं हो सकती. परंतु बता दीजिये कि दुनिया के जितने भी धर्म हैं, उनके किसी एक धर्मस्थल पर गाय का वध होता हो. ईसा धरती पर गौशाला में आये, इसलिए वहां मदर काऊ बोलते हैं. मक्का मदीना में गाय का वध अपराध मानते हैं. क्या हम संकल्प नहीं कर सकते कि धरा और मानवता को इस पाप से मुक्त करें. अगर इससे मुक्त हो जाएं तो आपकी (मॉब लिंचिंग) की समस्या का हल हो जाएगा.’

उन्होंने यह भी कहा कि इसके लिए कानून होना चाहिए, सरकार को कदम भी उठाने चाहिए, लेकिन इस समस्या से निपटने के लिए समाज को भी सही ‘संस्कारों’ की ज़रूरत है.

उन्होंने मीडिया से यह भी कहा कि बाबरी राम जन्मभूमि विवाद में शामिल मुस्लिम पक्ष ‘रामजन्मस्थान’ पर मस्जिद बनाने की मांग छोड़ चुका है.

संघ नेता का बयान ऐसे समय में आया है जब बीते ही हफ्ते सुप्रीम कोर्ट ने ‘भीड़तंत्र’ से निपटने के लिए सरकार को कानून बनाने को कहा है.

वहीं सोमवार को गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने लिंचिंग की घटनाओं से निपटने के लिए दो उच्च स्तरीय समितियां गठित करने की घोषणा की है.

उन्होंने बताया कि इस तरह के मामलों पर रिपोर्ट देने के लिए सरकार ने एक मंत्रिसमूह (जीओएम) और गृह सचिव की अध्यक्षता में एक समिति का भी गठन किया है, जो 15 दिन में अपनी रिपोर्ट देगी.

गृहमंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में यह जीओएम प्रधानमंत्री को अपनी सिफारिशें सौंपेगा. विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत इस  जीओएम के सदस्य हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)