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मध्य प्रदेश: जूनियर डॉक्टर काम पर नहीं लौटे, अदालत ने हड़ताल को गैरक़ानूनी ठहराया

जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन का हड़ताल समाप्ति की घोषणा वाला एक पत्र बुधवार रात जारी हुआ था. हालांकि, एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि पत्र जबरन लिखवाया गया था.

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भोपाल का गांधी मेडिकल कॉलेज (फोटो साभार: विकिमीडिया)

जबलपुर: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल को ‘गैर कानूनी’ करार दिए जाने के बाद भी हड़ताल चौथे दिन भी जारी है. इससे प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं.

जस्टिस आरएस झा और जस्टिस एमएफ अनवर की पीठ ने याचिकाकर्ता प्यारेलाल की याचिका की सुनवाई करते हुए अपने आदेश में मेडिकल अधिकारी तथा स्टॉफ को तत्काल काम पर लौटने के निर्देश दिए हैं.

अधिवक्ता शैलेन्द्र सिंह की तरफ से वर्ष 2014 में जूनियर डॉक्टर व मेडिकल स्टॉफ की हड़ताल के खिलाफ उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई थी.

याचिका की सुनवाई करते हुए न्यायालय ने कहा कि 31 जनवरी 2014 को भी जूनियर डॉक्टर तथा मेडिकल स्टॉफ की हड़ताल को गैरकानूनी घोषित किया गया था.

उच्च न्यायालय ने हड़ताल कर रहे जूनियर डॉक्टर व स्टॉफ को तत्काल काम पर लौटने के निर्देश दिए थे. न्यायालय ने सरकार को निर्देशित किया था कि हड़ताल समाप्त कर काम पर नहीं लौटने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए.

पीठ ने अपने आदेश में प्रदेश के मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि आदेश के पालन के लिए मध्य प्रदेश आवश्यक सेवा संधारण विच्छिन्नता निवारण अधिनियम 1979 सहित अन्य आवश्यक कार्रवाई करें.

प्यारेलाल ने मंगलवार को पूर्व में दायर इस याचिका में मध्यस्थ बनने तथा उसके आवेदन पर त्वरित सुनवाई के लिए उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश हेमंत गुप्ता के समक्ष आवेदन अपने अधिवक्ता के माध्यम से पेश किया था. मुख्य न्यायाधीश ने आवेदन को स्वीकार करते हुए आवेदन पर बुधवार को सुनवाई करने निर्देश जारी किए थे.

पीठ ने अपने आदेश में कहा है कि वह पूर्व में पारित आदेश में पटवारी, नायब तहसीलदार तथा तहसीलदार की हड़ताल को गैरकानूनी घोषित कर चुकी है. पीठ ने बुधवार को जारी अपने आदेश में कहा है कि मेडिकल अधिकारी तथा मेडिकल स्टॉफ हड़ताल समाप्त कर तत्काल काम पर लौटें.

वहीं, उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद मध्य प्रदेश में भोपाल, इंदौर सहित पांच शासकीय मेडिकल कॉलेजों के जूनियर डॉक्टर अपना मानदेय बढ़ाने सहित अन्य मांगों के समर्थन में अब भी हड़ताल पर हैं.

इससे प्रदेश के पांच शहरों के मेडिकल कॉलेजों से सम्बद्ध अस्पतालों में मरीजों के इलाज की व्यवस्था बिगड़ गई है. प्रदेश सरकार ने जूनियर डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए इसके संगठन जूडा से सम्बद्ध 24 जूनियर डॉक्टरों को निष्कासित कर दिया है.

हालांकि, बुधवार रात जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन (जूडा), गांधी मेडिकल कॉलेज के लैटर हैड पर हड़ताल समाप्त करने की घोषणा का पत्र जारी हुआ था, जिसके बाद समझा गया कि हड़ताल समाप्त हो गई.

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लेकिन, दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, चौथे दिन गुरुवार को भी प्रदेश के जूनियर डॉक्टर्स की हड़ताल पर हैं.

हालांकि, प्रदेश के पांचों मेडिकल कॉलेज प्रबंधन का दावा है कि हड़ताल खत्म हो चुकी है.

वहीं, जूडा के संयुक्त सचिव डॉक्टर अभिनव नरवरिया ने कहा कि हमसे हमारे लेटरपैड पर जबरन हड़ताल खत्म करने का लैटर लिखवाया गया था. हमारी हड़ताल अभी भी जारी है. हम गुरुवार को मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद अपना रुख स्पष्ट करेंगे.

दरअसल, सूचना मिली थी कि मांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) के डीन को जूनियर डॉक्टर्स ने हड़ताल खत्म करने का पत्र दिया था. इसकी जानकारी चिकित्सा शिक्षा आयुक्त शिवशेखर शुक्ला को भी भेजी गई. इसी संबंध में जूडा ने अपना पक्ष रखा.

वहीं, डीन ने कहा कि जूडा ने हमें हड़ताल खत्म करने के लिए लिखकर दिया है.

वहीं, हाईकोर्ट के आदेश के बाद नर्सों ने अपनी हड़ताल खत्म कर दी है. साथ ही, नर्सेस एसोसिएशन ने मांग की है हड़ताल के दौरान बर्खास्त की गई नर्सों को बहाल किया जाए. अगर बर्खास्त नर्सों को 24 घंटे के अंदर बहाल नहीं किया गया तो फिर से हड़ताल पर जाने की धमकी भी दी है.

वहीं, एक खबर के मुताबिक जूडा के प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर सचेत सक्सेना को भी बुधवार को बर्खास्त कर दिया गया है.  इससे पहले मंगलवार को 20 जूनियर डॉक्टर बर्खास्त किए गए थे. विरेध स्वरूप प्रदेश के लगभग 1500 जूनियर डॉक्टर ने इस्तीफा दे दिया था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)