भारत

जीएसटी की सफलता को लेकर उद्योग जगत में संशय

कारोबारियों ने सरकार को बेहतर नेटवर्क तैयार करने, जागरूकता बढ़ाने और पूरी तैयारी से आगे आने की सलाह दी है.

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(फोटो: पीटीआई)

देश में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को अमल में लाने को लेकर उद्योग जगत के मन में अब भी कई तरह के सवाल हैं. उसका मानना है कि इस देशव्यापी नयी अप्रत्यक्ष कर प्रणाली की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि जीएसटी नेटवर्क कितना दक्ष और मजबूत है. इसके साथ उद्योग जगत का मानना है कि जीएसटी प्रणाली के बारे में छोटे एवं मध्यम कारोबारियों में जागरूकता लाना भी ज़रूरी है.

जीएसटी प्रणाली पूरी तरह ऑनलाइन इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली पर आधारित होगी और यही नेटवर्क जीएसटी नेटवर्क (जीएसटीएन) कहलाएगा. उद्योग जगत के अप्रत्यक्ष कर विशेषज्ञों का कहना है कि जीएसटीएन कितनी दक्षता के साथ चलेगा और छोटे व्यापारी से लेकर बड़े बड़े उद्योगों के स्तर पर यह कितनी सुलभता के साथ उपलब्ध होगा, इसी पर जीएसटी की सफलता निर्भर करेगी.

सरकार को पूरी तैयारी से आना चाहिए

पीएचडी वाणिज्य एवं उद्योग मंडल की अप्रत्यक्ष कर समिति के अध्यक्ष बिमल जैन ने इस संबंध में कहा, सरकार को जीएसटी नेटवर्क के मामले में पूरी तैयारी के साथ आगे आना चाहिए. अभी तक राज्यों में वैट प्रणाली कागज़ी कारवाई के जरिये चलती आ रही है, अब यह पूरी व्यवस्था क़ागज़-रहित होने जा रही है. ऐसे में जीएसटी के पूरे नेटवर्क को दक्ष और मजबूत होना चाहिए.

सरकार देश में एक जुलाई से जीएसटी प्रणाली लागू करने जा रही है. लोकसभा में जीएसटी को लागू करने संबंधी चार विधेयक को मंजूरी मिल चुकी है. जीएसटी पर गठित जीएसटी परिषद इसके लिए नियम और दूसरे ज़रूरी काम निपटा रही है. नियमों के पांच सेटों को मंज़ूरी दे दी गई है और चार अन्य पर सहमति बन गई है.

पहले प्रणाली का परीक्षण हो

उद्योग मंडल एसोचैम की अप्रत्यक्ष कर समिति के चेयरमैन निहाल कोठारी ने कहा कि सरकार को कम से कम दो महीने नये जीएसटी नेटवर्क और मौजूदा कर प्रणाली को साथ साथ चलाना चाहिए. जीएसटी को अमल में लाने से पहले प्रणाली का परीक्षण किया जाना चाहिए.

नेटवर्क में जब 70 लाख लोग एक साथ बिलों को अपलोड करेंगे तो सिस्टम कितनी दक्षता के साथ काम करेगा यह देखने की बात है.

कोठारी ने कहा कि जीएसटी व्यवस्था में विभिन्न सामान और सेवाओं की कर दर में बदलाव होगा. किस सामान पर किस दर से कर लगेगा अभी यह भी तय होना है. कारोबारियों को यह समझना है कि उनके सामान पर किस दर से कर लगेगा. सेवाओं पर भी अलग-अलग दर से कर लगाने की बात है. छोटी सेवाओं पर कम दर से जबकि बड़ी सेवाओं पर 18 प्रतिशत की मानक दर से कर लग सकता है.

कारोबारियों में जागरूकता लाना ज़रूरी

बिमल जैन ने कहा कि जीएसटी प्रणाली के बारे में छोटे एवं मध्यम कारोबारियों में जागरकता लाना भी ज़रूरी है. जीएसटीएन में त्वरित गति के साथ चीज़ें अपलोड होंगी अथवा नहीं होंगी. छोटे व्यापारी इसका इस्तेमाल किस प्रकार करेंगे. दूरदराज़ के इलाक़ों में कंप्यूटर प्रणाली पूरी गति के साथ काम करेगी अथवा नहीं इन सभी बातों को देखना है.

उन्होंने कहा, कुल मिलाकर दो-तीन माह बदलाव का समय होगा. इसमें परेशानियां सामने आएंगी. दिल्ली शेयर बाज़ार के पूर्व अध्यक्ष अशोक अग्रवाल ने कहा कि जीएसटी एक जुलाई से लागू हो सकता है. अब इसमें कोई संदेह नहीं रह गया है. जीएसटी लागू होने पर एक वस्तु पर देशभर में एक ही दर से कर लगेगा. जीएसटी लागू होने से नोटबंदी से नकदी वाली अर्थव्यवस्था को समाप्त करने की दिशा में जो कमी रह गई थी उसमें और सुधार आएगा. कुछ समस्याएं आ सकतीं हैं लेकिन उनका समाधान भी होगा.

70 प्रतिशत डिजिटल प्रणाली से दूर

मालगोदाम और लेखा साफ्टवेयर उपलब्ध कराने वाली कंपनी मार्ग ईआरपी9प्लस के प्रबंध निदेशक सुधीर सिंह ने कहा कि देश में 70 प्रतिशत छोटे कारोबारी हैं जो डिजिटल प्रौद्योगिकी से लैस नहीं हैं. उनके लिए दो माह की अल्पावधि में कंप्यूटर प्रणाली को अपनाना काफ़ी मुश्किल होगा. सरकार को इस बदलाव को अमल में लाने के लिए उपयुक्त समय देना चाहिए.