भारत

चीनी सौर पैनल की डंपिंग से क़रीब दो लाख रोज़गार का नुकसान: संसदीय समिति

समिति ने कहा कि चीन द्वारा डंपिंग शुरू किए जाने से पहले भारत 2006 से 2011 के बीच सौर उत्पादों का बड़ा निर्यातक था. समिति ने घरेलू सौर उद्योग के हितों की रक्षा के लिए तत्काल उपाय किए जाने की ज़रूरत पर बल दिया.

प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो: रॉयटर्स)

प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: संसद की एक समिति ने बीते गुरुवार को कहा कि देश में चीन में बने सौर पैनलों की डंपिंग से करीब दो लाख रोज़गारों पर असर पड़ा है. समिति ने वाणिज्य विभाग से अपनी जांच इकाई डंपिंग रोधी एवं संबद्ध शुल्क महानिदेशालय (डीजीएडी) के चीन से सस्ते आयात को रोकने के बारे में सुझावों को समुचित रूप से क्रियान्वयन करने को कहा है.

रोज़गार के अवसरों के नुकसान के इन आंकड़ों पर आश्चर्य जताते हुए समिति ने डंपिंग रोधी एवं संबद्ध शुल्क महानिदेशालय की सिफारिशों के कमजोर क्रियान्वयन की समस्या का समाधान करने की सिफारिश की है.

वाणिज्य पर संसद की स्थायी समिति ने भारतीय उद्योग के ऊपर चीनी वस्तुओं के प्रभाव विषय पर अपनी रिपोर्ट में यह बात कही.

यह दुखद है कि चीन द्वारा डंपिंग शुरू किए जाने से पहले भारत 2006 से 2011 के बीच सौर उत्पादों का बड़ा निर्यातक था. चीन ने भारतीय विनिर्माताओं की कीमत पर डंपिंग की.

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘फिलहाल भारत से निर्यात लगभग स्थिरता के स्तर पर आ गया है और सरकार को डंपिंग के मामले में ठोस कदम उठाने चाहिए.’

इसमें कहा गया है कि घरेलू सौर उद्योग के हितों की रक्षा के लिये तत्काल उपाय किये जाने की जरूरत है.

रिपोर्ट के मुताबिक, ‘बेहतर क्रियान्वयन के अभाव में डंपिंग रोधी मसौदा भी प्रभावित हुआ है. गड़बड़ी करने वाले तत्व नियमों को धता बताते हुए उत्पादों के गलत वर्गीकरण के जरिये चीनी वस्तुओं का आयात करने में कामयाब हुए है.’

इस्पात क्षेत्र के बारे में रिपोर्ट में कहा गया है कि डंपिंग रोधी शुल्क को संशोधित करने या युक्तिसंगत बनाने के लिये कोई कदम नहीं उठाया गया.

समिति ने सिफारिश की है कि इस्पात उद्योग को डंपिंग रोधी एवं संबद्ध शुल्क महानिदेशालय के साथ विचार-विमर्श कर इस मामले पर तत्काल गौर करना चाहिए तथा चीनी इस्पात वस्तुओं की डंपिंग के प्रतिकूल प्रभाव से निपटने के लिये डंपिंग निरोधक शुल्कों को वास्तविक और प्रभावी बनाना चाहिए.

रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा वर्ष 2016-17 के 51.11 बिलियन डॉलर से बढ़कर वर्ष 2017-18 में 63.12 बिलियन डॉलर हो गया है.

समिति ने कहा है कि औद्योगिक स्वास्थ्य की कीमत पर इस स्थिति से सहमत नहीं होना चाहिए.

कपड़ा उद्योग की रक्षा के लिए रिपोर्ट में कपड़ों पर आयात शुल्क बढ़ाने का सुझाव किया गया है. पटाका उद्योग पर टिप्पणी करते हुए समिति ने कहा है चीन से हानिकारक पटाखों के आयात पर रोक लगनी चाहिए.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)