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चर्च में कन्फेशन की प्रथा ख़त्म करने के राष्ट्रीय महिला आयोग के बयान पर विवाद

केरल स्थित एक चर्च के चार पादरियों पर लगा है बलात्कार का आरोप. राष्ट्रीय महिला आयोग का कहना है कि कन्फेशन की प्रथा की आड़ में महिलाओं को ब्लैकमेल किया जा सकता है. केंद्रीय मंत्री केजे अल्फोंस और चर्चों ने इस बयान की निंदा की है.

(फोटो साभार: फेसबुक/Malankara Orthodox Syrian Church)

(फोटो साभार: फेसबुक/Malankara Orthodox Syrian Church)

नई दिल्ली: बीते दिनों राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने चर्च यानी गिरिजाघरों में ‘कन्फेशन’ की परंपरा को ख़त्म करने की अनुशंसा की है, जिसके बाद विवाद शुरू हो गया. केंद्रीय मंत्री केजे अल्फोंस ने जहां इस सिफारिश को सिरे से खारिज कर दिया है, वहीं कुछ चर्चों ने इस सिफ़ारिश पर निराशा व्यक्त की है.

गिरिजाघरों में पादरी के समक्ष गलतियों को स्वीकार करने की परंपरा को ‘कन्फेशन’ कहा जाता है. राष्ट्रीय महिला आयोग की ओर से इस प्रथा को ख़त्म करने की सिफारिश इसलिए की गई है क्योंकि उसका मानना है कि कहा गया है इस प्रथा के ज़रिये महिलाओं को ब्लैकमेल किया जा सकता है.

बीती 26 जुलाई को राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा कि केरल के गिरिजाघरों में बलात्कार और यौन उत्पीड़न की बढ़ती घटनाओं की केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की भी ज़रूरत है.

उन्होंने कहा, ‘पादरी महिलाओं पर गोपनीय बातें बताने का दबाव डालते हैं और उनका शोषण करते हैं. ऐसा ही एक मामला हमारे सामने है, ऐसे कई मामले होंगे और हमारे सामने जो है महज़ एक कड़ी है.’

मालूम हो कि मलंकारा ऑर्थोडॉक्स सीरियन चर्च के चार पादरियों के ख़िलाफ़ बलात्कार के एक मामले के परिप्रेक्ष्य में यह अनुशंसा की गई है. उन पर अपने गिरिजाघर की एक विवाहित महिला का यौन उत्पीड़न करने का आरोप है.

राष्ट्रीय महिला आयोग ने इस मामले का स्वत: संज्ञान लिया था जिसके बाद केरल पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और बाद में यह केस केरल पुलिस की अपराध शाखा को सौंप दिया गया.

मालूम हो कि केरल पुलिस की अपराध शाखा ने बीते दो जुलाई को मलंकारा ऑर्थोडॉक्स सीरियन चर्च के चार पादरियों के ख़िलाफ़ बलात्कार और यौन शोषण का मामला दर्ज किया था. न्यूज़ 18 की रिपोर्ट के अनुसार, इन चारों पादरियों की पहचान अब्राहम वर्गीज़, जॉब मैथ्यू, जॉनसन वी. मैथ्यू और जेस जॉर्ज के रूप में हुई.

न्यूज़ 18 के अनुसार, 34 वर्षीय महिला ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि अब्राहम वर्गीज़ जो कि उनके रिश्तेदार भी है, उनका तब से यौन शोषण कर रहे हैं जब वह 16 साल की थीं. जब उन्होंने जॉब मैथ्यू के सामने इसका कन्फेशन किया तो जॉब ने भी ब्लैकमेल कर उनका यौन शोषण किया.

उन्होंने आरोप लगाया था इसके बाद जॉनसन वी. मैथ्यू जो कि कॉलेज में उनके जूनियर थे, ने भी उनका शोषण किया. पीड़िता ने इसकी शिकायत पादरी और काउंसलर जेस मैथ्यू से किया तो उन्हें भी उनका यौन शोषण किया.

केरल हाईकोर्ट ने बीते 25 जुलाई को इनमें से एक पादरी जॉब मैथ्यू को सशर्त जमानत दे दी. जॉब को बीते 12 जुलाई को कोल्लम से गिरफ़्तार किया गया था.

केंद्रीय मंत्री केजे अल्फोंस ने राष्ट्रीय महिला आयोग की इस सिफारिश को सिरे से ख़ारिज कर दिया है कि गिरिजाघरों में ‘कन्फेशन’ के रिवाज़ को ख़त्म कर दिया जाना चाहिए.

केंद्रीय मंत्री अल्फोंस के अलावा केरल के पादरियों की एक संस्था ने इस सिफारिश के ख़िलाफ़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इसे चौंकाने वाला करार दिया है.

केरल के रहने वाले और ईसाई धर्म को मानने वाले केंद्रीय पर्यटन राज्य मंत्री अल्फोंस ने महिला आयोग की सिफारिश को खारिज करते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार लोगों की धार्मिक आस्था में कभी दख़ल नहीं देगी.

केरल कैथलिक बिशप्स काउंसिल (केसीबीसी) के प्रमुख आर्चबिशप सूसा पकियम ने तिरुवनंतपुरम में एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा, ‘यह न सिर्फ ईसाई समुदाय के लिए बल्कि धर्म की आज़ादी के पक्ष में खड़े होने वाले हर शख़्स के लिए चौंकाने वाला था.’

उन्होंने कहा कि इस सिफ़ारिश के ख़िलाफ़ प्रधानमंत्री मोदी को एक ज्ञापन भेजा गया है.

पकियम ने कहा कि गिरजाघर से विचार-विमर्श किए बगैर केंद्र को एकतरफा रिपोर्ट सौंपकर महिला आयोग ने अपने अधिकारों का गलत इस्तेमाल किया है. उन्होंने इसे गलत मंशा से की गई गैर-ज़िम्मेदाराना हरकत’ करार दिया.

उन्होंने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य सचिव जॉर्ज कुरियन को भी पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि वह गिरजाघर की चिंताओं से उचित अधिकारियों को अवगत कराएं.

समझा जाता है कि कुरियन ने केसीबीसी के प्रमुख आर्चबिशप सूसा पकियम का पत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री राजनाथ सिंह को भेजा है.

पकियम ने पत्र में कहा है, ‘हमारा मानना है कि सिफ़ारिश अवांछित है और इसका मक़सद गिरजाघर की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाना है. यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि ज़िम्मेदार पदों पर बैठे लोग ऐसे बयान देते हैं जिससे अल्पसंख्यक ईसाई समुदाय की धार्मिक भावनाएं बेहद आहत होती हैं.’

केरल में गिरजाघरों की ओर से विरोध किए जाने के बाद अल्फोंस ने आयोग की सिफारिश के ख़िलाफ़ टिप्पणी की और इसे ईसाई आस्था एवं आध्यात्मिक रिवाज़ पर हमला करार दिया.

अल्फोंस ने एक फेसबुक पोस्ट में लिखा, ‘यह सरकार का आधिकारिक रुख़ नहीं है. राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा के रुख़ से भारत सरकार का कोई लेना-देना नहीं है. यह रेखा शर्मा की निजी राय है.’

उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया, ‘नरेंद्र मोदी सरकार धार्मिक आस्थाओं में कभी दख़ल नहीं देगी.’

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ऐसी सिफारिश करने की कोई ज़रूरत ही नहीं थी. अल्फोंस ने नई दिल्ली में मलयालम न्यूज़ चैनलों से बातचीत में कहा, ‘चूंकि यह (सिफ़ारिश) आई है तो मोदी सरकार इसे सिरे से ख़ारिज करती है.’

टाइम्स आॅफ इंडिया से बातचीत में साइरो मलाबार चर्च के वरिष्ठ पादरी पॉल थेलक्कट ने कहा, ‘कन्फेशन, एक निजी बातचीत है. क़ानून का पालन करने वाले नागरिक के तौर पर पादरी प्रायश्चित करने वाले के गुनाहों को लेकर उसे सलाह देने के लिए आज़ाद होता है. हालांकि वह इस बारे में किसी और को जानकारी नहीं दे सकता है. सिवाय आॅस्ट्रेलिया के जहां एक क़ानून के तहत कन्फेशन से जुड़ी जानकारियों की इत्तिला दी जाती है. इसके अलावा कहीं भी ऐसा क़ानून नहीं है.’

वहीं साइरो मलाबार चर्च के प्रवक्ता जिमी पूछाकट ने बताया, ‘यह आस्था का मसला है. हम ऐसा सोच भी कैसे सकते हैं कन्फेशन की प्रथा ख़त्म कर दी जाए.’

टाइम्स आॅफ इंडिया से बातचीत में आॅर्थोडॉक्स चर्च के प्रवक्ता पीसी इलियास ने कहा, ‘एनसीडब्ल्यू का बयान दुर्भाग्यपूर्ण है. मुझे नहीं पता ये सही है या नहीं लेकिन कुछ पादरियों की वजह से इस प्रथा को ख़त्म करने की बात अतार्किक है.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)