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मोदी सरकार ने 2017-18 में विज्ञापनों पर ख़र्च किए 1313 करोड़ रुपये

सूचना एवं प्रसारण मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने राज्यसभा में बताया कि 2014 से अब तक मोदी सरकार विज्ञापनों पर कुल 4,880 करोड़ रुपये की राशि ख़र्च कर चुकी है.

फोटो साभार: ट्विटर

प्रतीकात्मक तस्वीर. (फोटो साभार: ट्विटर)

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने 2017-18 मे लोक संपर्क और संचार ब्यूरो (बीओसी) के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और अन्य मीडिया में विज्ञापनों पर करीब 1,313 करोड़ रुपये खर्च किए जबकि उससे पिछले वित्त वर्ष में यह राशि करीब 1264 करोड़ रुपये थी.

सूचना एवं प्रसारण मंत्री राज्यवर्धन राठौड़ ने एक सवाल के लिखित जवाब में राज्यसभा में यह जानकारी दी.

उन्होंने बताया कि 2017-18 में प्रिंट माध्यम में 636.09 करोड़ रुपये विज्ञापन पर खर्च किए गए जबकि श्रव्य-दृश्य माध्यम में 468.93 करोड़ रुपये और बाह्य प्रचार पर 208.55 करोड़ रुपये खर्च किए गए.

उन्होंने बताया कि 2016-17 में प्रिंट माध्यम में 468.53 करोड़ रुपये विज्ञापन पर खर्च किए गए जबकि श्रव्य-दृश्य माध्यम में 609.14 करोड़ रुपये और बाह्य प्रचार पर 186.59 करोड़ रुपये खर्च किए गए.

राठौड़ ने एक अन्य सवाल के जवाब में बताया कि सूचना प्रसारण मंत्रालय ने 2016-17 में प्रसार भारती को 3,132.68 करोड़ रुपये का सहायता अनुदान दिया जबकि 2017-18 में यह राशि 2,737.86 करोड़ रुपये थी. 2018-19 के लिए यह राशि 694.02 करोड़ रुपये है.

वहीं, सूचना एवं प्रसारण मंत्री ने यह भी बताया कि 2014 से अब तक मोदी सरकार विज्ञापनों पर कुल 4,880 करोड़ रुपये की राशि खर्च कर चुकी है.

जिसमें 2014-15 में 979.78 करोड़, 2015-16 में 1,160.16 करोड़. 2016-17 में 1,313.57 करोड़ रुपये खर्च किए गए.

राठौड़ ने संसद में बताया कि मोदी सरकार के चार साल के दौरान प्रिंट मीडिया में विज्ञापन पर 2,128.33 करोड़, दृश्य-श्रव्य मीडिया माध्यम पर 2131.57 करोड़ और बाह्य माध्यमों पर 620.70 करोड़ रुपये का खर्च किया गया.

राठौड़ ने बताया कि ब्यूरो ऑफ आउटरीच एंड कम्युनिकेशन विभाग के जरिये इस दौरान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, स्वच्छ भारत अभियान, स्मार्ट सिटी मिशन और सांसद आदर्श ग्राम योजना पर पिछले तीस सालों में 2015-16 में 52 विज्ञापनों पर 60.9442 करोड़ रुपये, 2016-17 में 142 विज्ञापनों पर 83.2686 करोड़ और 2017-18 में 309 विज्ञापनों पर 147.96 करोड़ रुपये खर्च किए गए.

एक अलग सवाल के जवाब उन्होंने कहा कि भारत में 867 निजी चैनलों को ब्रॉडकास्ट की अनुमति थी. 236 निजी सेटेलाइट टीवी चैनलों की विभिन्न कारणों से अनुमति रद्द कर दी गई. 236 में से 147 टीवी चैनलों की अनुमति पिछले तीन सालों के दौरान रद्द की गई.

गौरतलब है कि इससे पहले एक आरटीआई के जवाब में मोदी सरकार द्वारा किए गए विज्ञापन खर्चों का भी ब्यौरा दिया गया था, उसमें केवल 31 जनवरी 2018 तक की जानकारी उपलब्ध कराई गई थी.

उक्त जानकारी आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने मांगी थी जिसके जवाब में केंद्र सरकार के ब्यूरो ऑफ आउटरीच एंड कम्युनिकेशन विभाग ने आंकड़ें उपलब्ध कराए थे.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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