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भाजपा सांसद ने लोकसभा में की पूरे देश में एनआरसी लागू करने की मांग

असम में एनआरसी मसौदा जारी होने के बाद से भाजपा नेता देश के विभिन्न राज्यों में एनआरसी की मांग कर रहे हैं. वहीं भाजपा महासचिव राम माधव का कहना है कि देश भर से रोहिंग्या घुसपैठियों को डिपोर्ट किया जाएगा.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: गुरुवार को लोकसभा में भाजपा सदस्य निशिकांत दुबे ने मांग की कि राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को पूरे देश में लागू किया जाना चाहिए. विपक्षी सांसदों ने उनकी इस बात का विरोध किया.

शून्यकाल में इस विषय को उठाते हुए दुबे ने कहा कि एनआरसी का मुद्दा पूरे देश के लिये महत्वपूर्ण है. 1905 में बंगाल के विभाजन से पहले बिहार भी बंगाल का ही हिस्सा था.

उन्होंने कहा कि पूर्वी बंगाल से पश्चिमी बंगाल में लगातार पलायन होता रहा. असम में गोपीनाथ बारदोलोई ने इस विषय पर आंदोलन भी चलाया था. असम में एक लाख एकड़ भूमि पर ऐसे लोगों को बसाया भी गया.

भाजपा सदस्य ने दावा किया कि जम्मू कश्मीर, पूर्वोत्तर समेत कई क्षेत्रों में जनगणना नहीं हुई. उन्होंने यह भी दावा किया कि एक खास समुदाय की जनसंख्या काफी बढ़ी है.

उनके इस बयान का विपक्षी सदस्यों ने जोरदार विरोध किया. दुबे ने मांग की कि असम की तरह ही पूरे देश में एनआरसी लागू किया जाना चाहिए.

इससे पहले बुधवार को दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने भी मांग की थी कि दिल्ली में भी एनआरसी की तरह सर्वे करवाया जाना चाहिए. तिवारी ने केंद्रीय गृहमंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि दिल्ली में भी बड़ी संख्या में रोहिंग्या और विदेशी घुसपैठिए रह रहे हैं. उनमें से कइयों ने आधार और राशन कार्ड भी बनवा लिया है.

उन्होंने यह भी कहा कि विदेशी घुसपैठिये देश के गरीबों के अधिकार छीन रहे हैं, इसलिए उन्हें पहचान कर डिपोर्ट करने की ज़रूरत है.

मालूम हो कि असम में बीते सोमवार को एनआरसी का आखिरी मसौदा जारी किया गया. एनआरसी में शामिल होने के लिए आवेदन किए 3.29 करोड़ लोगों में से 2.89 करोड़ लोगों के नाम शामिल हैं और इसमें 40, 07, 707 लोगों के नाम नहीं हैं.

राज्य सरकार का कहना है कि जिनके नाम रजिस्टर में नहीं है उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए एक महीने का समय दिया जाएगा. एनआरसी का पहला मसौदा 31 दिसंबर और एक जनवरी को जारी किया गया था, जिसमें 1.9 करोड़ लोगों के नाम थे.

वहीं भाजपा महासचिव राम माधव का कहना है कि एनआरसी केवल असम तक सीमित रहेगा, लेकिन देश से सभी रोहिंग्याओं को पहचान कर डिपोर्ट किया जाएगा.

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार पूर्वोत्तर में भाजपा इंचार्ज माधव ने इस अख़बार से बात करते हुए कहा कि एनआरसी में ‘नेशनल’ शब्द इस्तेमाल किया गया है, लेकिन अब तक यह केवल असम के लिए ही है.

उन्होंने कहा, ‘यह प्रक्रिया 1985 में हुए असम समझौते का परिणाम है, इसलिए यह अभी तो असम तक ही सीमित है.’

हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट किया कि गृह मंत्रालय देश में गैर कानूनी रूप से आये रोहिंग्या लोगों को चिह्नित करने का फैसला कर चुका है. उन्होंने कहा, ‘सभी राज्यों के रोहिंग्या घुसपैठियों को डिपोर्ट किया जाएगा, लेकिन इसके लिए एनआरसी की ज़रूरत नहीं है. देश की कानून-व्यवस्था और गृह मंत्रालय इन लोगों की पहचान कर इन्हें वापस भेजेंगे. दुनिया का कोई भी देश अपनी जमीन पर अवैध प्रवासियों को जगह नहीं देगा.’

एनआरसी का आखिरी मसौदा आने के बाद से लगातार भाजपा और विपक्ष के नेताओं की बयानबाजी जारी है. जहां विपक्षी नेता इसे वोट की राजनीति बता रहे हैं, वहीं भाजपा नेता देश के विभिन्न हिस्सों में एनआरसी की मांग कर रहे हैं.

भाजपा के महासचिव और पश्चिम बंगाल में पार्टी के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने कहा था कि पश्चिम बंगाल का युवा चाहता है कि बांग्लादेश से आए घुसपैठियों की पहचान हो, जिसकी वजह से उन्हें काफी दिक्कतों जैसे कि बेरोजगारी और कानून व्यवस्था का सामना करना पड़ रहा है. भाजपा उनकी मांगों का समर्थन करती है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)