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भारतीय एजेंसियों ने मेहुल चोकसी को क्लीनचिट दी तब नागरिकता दी गई: एंटीगुआ सरकार

दो अरब डॉलर के पंजाब नेशनल बैंक घोटाले के कथित मास्टरमाइंड में से एक अरबपति मेहुल चोकसी को नागरिकता देने के संबंध में एंटीगुआ की सरकार ने दिया स्पष्टीकरण. सेबी ने एंटीगुआ की ओर कोई जानकारी मांगने से इनकार किया.

मेहुल चोकसी (फोटो साभार: गीतांजलि ज्वेल्स)

मेहुल चोकसी (फोटो साभार: गीतांजलि ज्वेल्स)

नई दिल्ली: भारतीय एजेंसियों ने एंटीगुआ को बताया कि जब कैरेबियाई देश ने 2017 में मेहुल चोकसी को नागरिकता देने से पहले उसकी पृष्ठभूमि की जांच की थी तब इस भगोड़े अरबपति के ख़िलाफ़ कोई मामला नहीं था.

निवेश से संबद्ध नागरिकता देने के लिए ज़िम्मेदार एंटीगुआ के निकाय ने चोकसी के मामले में मंज़ूरी देने वाली भारतीय एजेंसी में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) का भी नाम लिया. हालांकि सेबी ने इस दावे को ख़ारिज करते हुए कहा कि उसे कभी ऐसा कोई अनुरोध नहीं मिला और न ही उसने एंटीगुआ में सक्षम प्राधिकार को ऐसी कोई सूचना दी.

एंटीगुआ के अख़बार द डेली ऑब्ज़र्वर ने एंटीगुआ एंड बरबूडा सरकार की ‘द सिटीजनशिप बाय इंवेस्टमेंट यूनिट’ (सीआईयू) के एक बयान के हवाले से बताया कि मई 2017 में एंटीगुआ में नागरिकता के लिए चोकसी के आवेदन के साथ स्थानीय पुलिस से मंज़ूरी भी दी गई थी.

चोकसी पंजाब नेशनल बैंक में दो अरब डॉलर के घोटाले के कथित मास्टरमाइंड में से एक है और वह भगोड़ा हीरा कारोबारी नीरव मोदी का रिश्तेदार भी है.

द डेली ऑब्ज़र्वर की ख़बर में कहा गया है, ‘भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय, मुंबई से मिले पुलिस मंज़ूरी प्रमाणपत्र के अनुसार मेहुल चीनूभाई चोकसी के ख़िलाफ़ ऐसा कोई मामला नहीं है जो उन्हें रिपब्लिक आॅफ एंटीगुआ एंड बरबूडा के लिए वीज़ा समेत यात्रा सुविधाएं देने के अयोग्य ठहराता हो.’

इसमें कहा गया है कि द्वीपीय देश के अधिकारियों ने इंटरपोल समेत वैश्विक एजेंसियों से चोकसी के बारे में व्यापक छानबीन की थी कि कहीं उनके ख़िलाफ़ किसी भी अपमानजनक सूचना का कोई मामला तो नहीं है.

ख़बर के मुताबिक, जांच के तौर पर एंटीगुआ प्रशासन को 2014 और 2017 में चोकसी की कंपनियों के ख़िलाफ़ सेबी की कार्रवाई के दो मामलों के बारे में पता चला तथा उसने उनसे और जानकारी मांगी थी.

सेबी ने कैरिबियाई प्रशासन को बताया था कि एक मामला बंद कर दिया गया है और दूसरे मामले में पर्याप्त सबूत नहीं थे. हालांकि भारतीय नियामक ने शुक्रवार को एक बयान जारी कर इन दावों को खारिज किया.

सेबी ने कहा, ‘सेबी को एंटीगुआ की सिटिजनशिप बाय इनवेस्टमेंट यूनिट से किसी भी जांच पर जानकारी के लिए ना तो कोई अनुरोध मिला और ना ही उसने सीआईयू को ऐसी कोई सूचना दी.’

द सिटीजनशिप बाय इंवेस्टमेंट यूनिट ने कहा कि अगर नागरिकता के आवेदन के समय चोकसी के ख़िलाफ़ कोई वारंट होता तो इंटरपोल इसके बारे में बताता और यह राष्ट्रीय आपराधिक डेटाबेस में भी होता है.

चोकसी इस साल चार जनवरी को भारत से भाग गया था और उसने 15 जनवरी को एंटीगुआ में शरण ली थी. नवंबर 2017 में उसे एंटीगुआ की नागरिकता मिल चुकी थी.

मालूम हो कि इस साल 29 जनवरी को ही सीबीआई ने पंजाब नेशनल बैंक घोटाले में मेहुल चोकसी और नीरव मोदी के ख़िलाफ़ केस दर्ज कर जांच शुरू की थी.

इस ख़बर के सामने आने के बाद चोकसी ने दावा किया था कि उसने अपना व्यापार बढ़ाने के लिए पिछले वर्ष कैरेबियाई देश एंटीगुआ की नागरिकता ले ली थी. एंटीगुआ की स्थानीय मीडिया में आयी खबरों के अनुसार, चोकसी का दावा है कि एंटीगुआ के पासपोर्ट पर 132 देशों में बिना वीजा के यात्रा करने की छूट है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)