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एनआरसी को आधार से जोड़ा जाए, असम की तर्ज पर अन्य राज्यों में भी लागू हो: राज्यपाल

असम के राज्यपाल प्रो. जगदीश मुखी ने कहा कि एनआरसी को आधार से जोड़ा जाना चाहिए जिससे भारत में विदेशी नागरिकों का एक राज्य से दूसरे राज्य में जाकर बसना भी मुमकिन न हो पाए.

(फोटो साभार: फेसबुक)

असम के राज्यपाल प्रो. जगदीश मुखी (फोटो साभार: फेसबुक)

नई दिल्ली: असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को लेकर फैली आशंकाओं को दूर करते हुए असम के राज्यपाल प्रो. जगदीश मुखी ने इसे एक उपलब्धि करार दिया और इसे, देश में घुसपैठ की समस्या का कारगर समाधान बताया है.

गौरतलब है कि असम में बीते सोमवार को एनआरसी का आखिरी मसौदा जारी किया गया. एनआरसी में शामिल होने के लिए आवेदन किए 3.29 करोड़ लोगों में से 2.89 करोड़ लोगों के नाम शामिल हैं और इसमें 40, 07, 707 लोगों के नाम नहीं हैं.

राज्य सरकार का कहना है कि जिनके नाम रजिस्टर में नही हैं उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए एक महीने का समय दिया जाएगा. एनआरसी का पहला मसौदा 31 दिसंबर और एक जनवरी को जारी किया गया था, जिसमें 1.9 करोड़ लोगों के नाम थे. मसौदा जारी होने के बाद देश में सत्ता और विपक्ष के नेताओं के बीच आरोप और प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है और असम के लोगों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है कि आख़िर इन 40 लाख लोगों का क्या होगा.

इस मुद्दे पर एक विशेष बातचीत में असम के राज्यपाल प्रो. जगदीश मुखी ने कहा, ‘जिन लोगों का नाम छूट गया है, उन्हें दावा करने का पूरा अधिकार है. इसकी पूरी प्रक्रिया लोगों को बताई गई है और इसके लिए दो महीने का समय भी दिया गया है. असम में इसे लेकर सामान्य तौर पर कोई भ्रम नहीं है.’

लंबी और जटिल प्रक्रिया के बाद एनआरसी का प्रारूप सामने आया. इस कवायद को कितना कारगर मानते हैं, और सफलता का श्रेय किसे देंगे?

यह न सिर्फ असम बल्कि पूरे देश के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है. इसके लिए मैं बधाई देना चाहूंगा महापंजीयक को, असम सरकार के अधिकारियों और कमचारियों को और माननीय उच्चतम न्यायालय को, जिनके अथक परिश्रम और सावधानी भरे सतत प्रयास से यह अहम कार्य सम्पन्न हुआ.

असम के लोगों में इसके बारे में क्या प्रतिक्रिया है, क्योंकि दिल्ली सहित देश भर में एनआरसी को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है?

मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि अभी यह एनआरसी का प्रारूप है. इसके आधार पर अभी कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी. राज्य में एक ऐसी भ्रांति चल रही थी कि जिसका नाम प्रारूप में नहीं आया वह विदेशी घोषित हो गया, उनका क्या होगा.

ऐसा कुछ भी नहीं है. आज वे कोई विदेशी नहीं हैं. जिन लोगों का नाम छूट गया है, उन्हें अपने दावे को पुष्ट करने का पूरा अधिकार है. इसकी पूरी प्रक्रिया लोगों को बताई गई है और इसके लिए दो महीने का समय भी दिया गया है. असम में इसे लेकर सामान्य तौर पर कोई भ्रम नहीं है.

भ्रम या चिंता उन 40 लाख लोगों के मन में है जिनके नाम एनआरसी के प्रारूप में शामिल नहीं हैं. उन लोगों के लिए आप क्या कहेंगे?

मैं आश्वस्त कर सकता हूं कि हमारे प्रदेश में किसी के लिए चिंता करने की कोई बात नहीं होनी चाहिए. हर किसी का अधिकार सुरक्षित है, क्योंकि भारत सरकार और असम सरकार ये सुनिश्चित कर रही है कि एक भी भारतीय ऐसा नहीं रहेगा जिसका एनआरसी के अंदर नाम न आए. उन्हें हर मौका दिया जाएगा. यदि इस प्रक्रिया के पूरा होने पर भी किसी का नाम एनआरसी में शामिल नहीं हो पाता है तो वह ट्रिब्यूनल में अपील कर सकता है.

तमाम जनप्रतिनिधियों और प्रतिष्ठित लोगों के नाम एनआरसी में शामिल नहीं हो पाए, इससे जनसामान्य की चिंता बढ़ना क्या लाजिमी नहीं है?

मैंने पहले ही कहा कि इतनी व्यापक प्रक्रिया में कुछ नामों का छूटना बड़ी बात नहीं है. इतना बड़ा काम हुआ है, उसमें कई गलतियां हो सकती हैं, भूल चूक हो सकती है, लेकिन उन सभी को दुरुस्त करने के भी पुख्ता इंतजाम इसमें किए गये हैं.

इन्हें सुधारने के लिये पर्याप्त समय दिया गया है. इसीलिए मैंने कहा कि यह प्रारूप मात्र है. जहां तक जनसामान्य की चिंता की बात है तो मैं यह जरूर कहूंगा कि यह जो इतना बड़ा कार्य हुआ है वह असम की जनता के साथ जो एक समझौता हुआ था, उसके तहत हुआ है.

मैं असमवासियों को आश्वस्त भी करना चाहता हूं कि एक भी भारतीय ऐसा नहीं रहेगा जिसका नाम इस लिस्ट में न आए.

एनआरसी की उपयोगिता और महत्व पर आपकी क्या राय है?

एनआरसी के बारे में मेरी स्पष्ट धारणा है कि यह एक ऐसा महत्वपूर्ण दस्तावेज तैयार हुआ है, जो देश की सुरक्षा को सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाएगा. इसकी उपयोगिता को लेकर मेरा यह कहना है कि जिस प्रकार से असम ने अपनी एनआरसी तैयार की है, देश के हित में यह बेहतर होगा कि हर राज्य अपनी एनआरसी तैयार कराए. ताकि देश की सरकार को और राज्य की सरकार को यह पूर्ण जानकारी रहे कि राज्य और देश में कौन विदेशी रह रहे हैं और जो विदेशी रह रहे हैं उनको भी यह जानकारी हो कि वे बतौर विदेशी रह रहे हैं.

इसी तरह हर राज्य एनआरसी बनाए और प्रत्येक दस साल के अंतराल पर होने वाली जनगणना के साथ इसे अपडेट भी करे. ऐसा करने से एनआरसी देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए लाभप्रद और कारगर उपाय साबित होगा.

अगर अन्य राज्य ऐसी पहल करते हैं तो मैं यह भी कहना चाहूंगा कि अन्य राज्यों में यह काम बहुत जल्दी पूरा हो सकेगा क्योंकि असम सरकार के अधिकारियों का अनुभव उनके लिए बेहद उपयोगी साबित होगा.

बल्कि मेरा सुझाव है कि अन्य राज्यों में यह पहल करने पर इसे ‘आधार’ से जोड़ा जाना चाहिए जिससे भारत में विदेशी नागरिकों का एक राज्य से दूसरे राज्य में जाकर बसना भी मुमकिन नहीं हो पाएगा.

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