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हापुड़ और अलवर लिंचिंग मामले के दो आरोपियों ने हत्या और हिंसा की बात स्वीकार की

राजस्थान के अलवर में पहलू ख़ान और उत्तर प्रदेश के हापुड़ में कासिम को पीट-पीट कर मार डालने वाले कथित गोरक्षकों ने एनडीटीवी के स्टिंग आॅपरेशन में स्वीकार किया कि वे पीड़ितों की हत्या में शामिल रहे और पुलिस उनके साथ है.

अलवर में मारे गए पहलू ख़ान (बाएं) हापुड़ में मारे गए कासिम (बीच में) और हापुड़ में भीड़ द्वारा हिंसा के शिकार समीउद्दीन.

अलवर में मारे गए पहलू ख़ान (बाएं) हापुड़ में मारे गए कासिम (बीच में) और हापुड़ में भीड़ द्वारा हिंसा के शिकार समीउद्दीन.

देश भर में गाय के नाम पर हो रही राजनीति और हिंसा के बीच समाचार चैनल एनडीटीवी की ओर से किए गए स्टिंग आॅपरेशन में राजस्थान के अलवर और उत्तर प्रदेश के हापुड़ में भीड़ द्वारा पीट-पीट कर मार दिए गए पहलू ख़ान और कासिम की हत्या के आरोपियों ने इन घटनाओं में अपनी संलिप्तता स्वीकारते हुए कहा है कि वे गाय काट रहे थे इसलिए उन्होंने उन्हें (पीड़ितों को) काट दिया.

एनडीटीवी के कुछ पत्रकार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और हिंदुत्ववादी संगठनों पर शोध के लिए फील्ड वर्क करने एक समूह के रूप में निकले और बीते साल अप्रैल में हुई पहलू ख़ान की हत्या और इस साल जून में हापुड़ लिंचिंग के आरोपियों से मिले.

उत्तर प्रदेश के हापुड़ में 18 जून को 45 वर्षीय एक मीट व्यवसायी क़ासिम क़ुरैशी की भीड़ द्वारा पीट-पीट कर हत्या कर दी गई थी, जबकि 65 साल के समीउद्दीन जो पेशे से किसान थे उन्हें पीट-पीटकर घायल कर दिया गया था.

मालूम हो कि इस मामले में हापुड़ पुलिस ने रोडरेज़ के तहत हत्या, हत्या के प्रयास और दंगे फैलाने के आरोप में नौ लोगों को गिरफ्तार किया था. नौ में से चार आरोपी अभी ज़मानत पर जेल के बाहर हैं.

एनडीटीवी की उक्त टीम मामले के जमानत पर बाहर आए एक आरोपी राकेश सिसोदिया से मिलने हापुड़ के बझेड़ा खुर्द गांव पहुंची.

सिसोदिया ने कोर्ट में लिखित बयान में कहा था कि उसकी हमले मे कोई भूमिका नहीं थी और वह घटनास्थल पर भी मौजद नहीं था.

लेकिन एनडीटीवी के स्टिंग आॅपरेशन में वह कैमरे पर अपराध को स्वीकार करता नज़र आ रहा है. जमानत पर बाहर आने के बाद एनडीटीवी के पत्रकार से बातचीत में वह कहता है कि जेल में अधिकारियों के सामने भी उसने यह स्वीकार किया है कि उसने एक फुल और एक हाफ मर्डर किया है.

सिसोदिया करीब पांच हफ्तों तक जेल में था. सिसोदिया ने कैमरे पर कहा, ‘हां मैंने जेलर के सामने बोला कि वो गाय काट रहे थे. मैंने उसको काट दिया.’

उसने कहा, ‘पहली बार मैं जेल गया, मुझे डर लगना चाहिए था. लेकिन नहीं, मैंने वहां भी खूब धूम मचाई और जेलर ने जाते ही पूछा कि किस केस में आए हो?’

सिसोदिया ने आगे बताया, ‘मैंने तुंरत कहा, 302 और 307, फुल मर्डर और हाफ मर्डर, वो गाय काट रहे थे मैंने उसको काट दिया बात खत्म.’

सिसोदिया ने बताया कि कैसे पिछले सप्ताह जुलाई में जमानत मिलने के बाद उसका स्वागत हीरो की तरह किया गया. उसने कहा, ‘मुझे तीन-चार गाड़ी जेल पर लेने गई थीं. राकेश सिसोदिया जिंदाबाद के नारे लगाए. लोगों ने बाहें फैलाकर मेरा स्वागत किया, मुझे बड़ा गर्व हुआ.’

उसने आगे कहा, ‘मेरी फौज तैयार है. कोई गाय काटे. मैं उसको कटवा दूंगा, खड़े-खड़े, भले ही हजार बार जेल जाना पड़े जाएंगे.’

उसने पुलिस से मिले सहयोग के बारे में भी बात की. उसने कहा, ‘पुलिस पक्ष में है और ये सब रहा सरकार का दम (सरकार के समर्थन के कारण). पुलिस पक्ष में नहीं रहती अगर आज़म ख़ान बैठा हुआ रहता.’

गौरतलब है कि आजम ख़ान पिछली समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान मंत्री थे.

हमले के वीडियो में कासिम को आस-पास खड़े लोगों से पानी मांगते देखा जा सकता है. इसके संबंध में सिसोदिया कहता हुआ सुना गया, ‘मैंने कहा, तुझे पानी पीने का हक नहीं है. तूने मरी हुई गाय को पानी नहीं दिया. मेरी फौज तुझे छोड़ेगी नहीं. तुझे एक-एक मिनट मारेगी.’

सिसोदिया ने आगे कहा, ‘मुझे लग नहीं रहा था कि समीउद्दीन बूढ़ा है वो मरेगा, लेकिन वो बच गया.’

हापुड़ से एनडीटीवी की टीम अलवर के बहरोड़ शहर पहुंची, जो कि जयपुर से करीब तीन घंटे की दूरी पर है. यहां अप्रैल 2017 में पहलू ख़ान की पीट-पीटकर हत्या की गई थी. उस पर आरोप था कि वह गोतस्करी कर रहा था.

पुलिस ने मामले में नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया, सभी फिलहाल जमानत पर बाहर हैं.

उनमें से एक विपिन यादव है, जिसने अन्य आरोपियों की तरह ही दावा किया था कि हत्या में उसकी कोई भूमिका नहीं है.

अमेरिकी रिसर्च स्कॉलर बनकर एनडीटीवी ने विपिन से बात की. उसने कैमरे पर बोला, ‘हां, हम लोग डेढ़ घंटे तक पीटते रहे. पहले 10 आदमी आए, फिर 20 आदमी आए. वहां करीब 500 लोग एकत्रित हो गए.’

विपिन ने अपराध में अपनी भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी. उसने कहा, ‘मैंने ही उनकी गाड़ी की चाभी निकाली थी, और बाइक आगे निकालने के बाद भी वो रोक नहीं रहे थे, तो मैंने जबरदस्ती चाभी निकाल के उनको बाहर निकाल लिया.’

उसने आगे कहा, ‘हां, उनकी हालत ऐसी हो गई कि ज्यादा मार पिटाई हो गई थी,. दो पिकअप की चाभी मेरे पास थी, मेरे पॉकेट में ही रह गई थी. ’

वहीं, इस खुलासे के बाद मंगलवार को हापुड़ लिंचिंग मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है.

एनडीटीवी की एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़ित समीउद्दीन ने एक याचिका दायर कर आरोपियों की ज़मानत रद्द करने तथा लिंचिंग केस का ट्रायल उत्तर प्रदेश से बाहर करवाने की मांग की है.

इस मामले में वकील ने याचिका दाखिल कर मामले की जल्‍द सुनवाई की मांग की थी जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की तारीख 13 अगस्त को तय की है. याचिकाकर्ता की मांग है कि इस मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन होना चाहिए और इस मामले की सुनवाई यूपी से बाहर होनी चाहिए.

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