भारत

कृषि संकट पर अखिल भारतीय किसान सभा का जेल भरो आंदोलन, एमएस स्वामीनाथन ने किया समर्थन

कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन ने कहा कि किसानों के लिए सी2+50 प्रतिशत पर आधारित एमएसपी और एक अनुकूल खरीद नीति होनी चाहिए.

Mumbai: Farmers of All Indian Kisan Sabha (AIKS) march from Nashik to Mumbai to gherao Vidhan Bhawan on March 12, demanding a loan waiver, in Mumbai on Sunday. PTI Photo by Mitesh Bhuvad (PTI3_11_2018_000152B)

प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: अखिल भारतीय किसान सभा के नौ अगस्त के प्रदर्शन को अपना समर्थन देते हुए कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन ने कहा कि राष्ट्रीय किसान आयोग (एनसीएफ) की सिफारिशों को लागू करने की मांग न्यायसंगत है.

अखिल भारतीय किसान सभा (एआईकेएस) को लिखे गए एक पत्र में स्वामीनाथन ने कहा है कि एनसीएफ की सिफारिशों को लागू करने की मांग के संदर्भ में किसानों का आंदोलन न्यायपूर्ण है. बता दें कि 2004 में गठित की गई राष्ट्रीय किसान आयोग (एनसीएफ) के अध्यक्ष एमएस स्वामीनाथन थे.

उन्होंने कहा कि देश भर में किसान और किसान आंदोलन सिर्फ एनसीएफ की सिफारिशों को लागू करने की मांग कर रहा है. यह सही समय है कि एनसीएफ की सिफारिशों को जल्द लागू किया जाए.

एआईकेएस को भेजे गये अपने नोट में एनसीएफ के अध्यक्ष, स्वामीनाथन ने कहा, ‘सबसे पहले, सी2 + 50 प्रतिशत के सूत्र पर आधारित न्यूनतम समर्थन मूल्य या एमएसपी हो. दूसरा, एक अनुकूल खरीद नीति हो जो यह सुनिश्चित करे कि किसान को वास्तव में एमएसपी मिले और तीसरा खाद्य सुरक्षा कानून के प्रभावी कार्यान्वयन के जरिए जन उपभोग बढ़े.’

माकपा के किसान संगठन, एआईकेएस ने नौ अगस्त को कृषि संकट पर कार्रवाई की मांग करते हुए पूरे देश में जेल भरो का आह्वान किया है. एआईकेएस के नेताओं ने दावा किया कि उनके किसान संगठन द्वारा ‘भारत छोड़ो दिवस’ के दिन किए गये इस आह्वान को समाज के विभिन्न वर्गों से व्यापक समर्थन प्राप्त हो रहा है.

एआईकेएस के महासचिव हनान मुल्ला ने कहा, ‘पूरे देश में केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ किसान आंदोलन बढ़ रहा है. हमें देश भर में 20 लाख से अधिक किसानों के इस आंदोलन और जेल-भरो आंदोलन में भाग लेने की उम्मीद है और स्वामीनाथन ने आज हमारे आंदोलन का समर्थन किया है.’

माकपा के मजदूर संगठन सीआईटीयू (सीटू) ने भी आंदोलन को अपना समर्थन दिया है और कहा है कि उसके हजारों सदस्य एकजुटता दिखाने के लिए देश भर के सभी जिलों में किसानों के संघर्ष में शामिल होंगे. सीटू के महासचिव तपन सेन ने कहा, ‘जो लोग खेतों और कारखानों में काम करते हैं और देश के लिए धन पैदा कर रहे हैं, वे इस सरकार को ठीक करेंगे जो केवल निगमित कंपनियों और देश के समृद्ध लोगों के लिए काम कर रही है.’

बता दें कि देश भर से लगातार किसानों और किसान संगठनों द्वारा स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की मांग उठ रही है. हाल में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने फसलों के दाम को डेढ़ गुना तक बढ़ाने का दावा किया है. लेकिन निर्धारित की गई नई एमएसपी स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के मुकाबले काफी कम है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

Comments