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हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से पूछा, सिनेमाघरों में खाना ले जाने से सुरक्षा को खतरा कैसे?

बॉम्बे हाईकोर्ट ने मल्टीप्लेक्स में खाद्य पदार्थों के मूल्य नियंत्रण के संबंध में सरकार से हस्तक्षेप करने को कहा था. सरकार ने तर्क दिया कि इससे अव्यवस्था या सुरक्षा संबंधी मसले पैदा हो सकते हैं. दिल्ली हाईकोर्ट में भी ऐसे ही एक मामले पर सुनवाई हो रही है.

प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो:पीटीआई)

प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो:पीटीआई)

मुंबई/नई दिल्ली: बुधवार को बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से पूछा कि मल्टीप्लेक्सों में बाहर से खाना ले जाने से सुरक्षा को खतरा कैसे खतरा कैसे हो सकता है? जस्टिस रंजीत मोरे और अनुजा प्रभुदेसाई की पीठ ने मंगलवार को दायर किए गए राज्य सरकार के हलफनामे पर ये प्रतिक्रिया दी.

सरकार की तरफ से कोर्ट में कहा गया है कि मल्टीप्लेक्सों में बाहर से खाने की चीजों को लाने पर लगाई गई रोक में वह हस्तक्षेप करना जरूरी नहीं समझती है क्योंकि इससे अव्यवस्था या सुरक्षा संबंधी मसले पैदा हो सकते हैं.

पीठ ने रेखांकित किया कि अन्य सार्वजनिक स्थानों पर लोगों को घर से या बाहर से खाने की चीजें ले जाने पर रोक नहीं है. अदालत ने कहा कि सरकार का हलफनामा कहता है कि इस तरह का कोई कानून या नियम नहीं है जो सिनेमा हॉल में लोगों को बाहर से खाने-पीने की चीजों को ले जाने से रोकता हो.

इस पर हाईकोर्ट ने कहा, ‘थिएटरों में खाने की चीज़ें ले जाने से किस तरह की सुरक्षा चिंताएं हो सकती हैं? लोगों के सिनेमा हॉल के अलावा किसी भी अन्य सार्वजनिक स्थान पर खाने का सामान ले जाने पर रोक नहीं है.’

पीठ ने कहा, ‘अगर लोगों को घर का खाना प्लेन में ले जाने की इजाजत दी जा सकती है तो थिएटरों में क्यों नहीं?’ उन्होंने पूछा, ‘किस तरह की सुरक्षा संबंधी समस्याओं का अंदेशा है?’

अदालत ने मल्टीप्लेक्स ओनर्स असोसिएशन की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील इकबाल चागला की इस दलील को भी खारिज कर दिया कि कोई सिनेमाघरों के अंदर खाना ले जाने की इजाजत मांगने के लिए अपने मौलिक अधिकारों का हवाला नहीं दे सकता है.

पीठ ने कहा, ‘मल्टीप्लेक्सों में खाना बहुत महंगा बेचा जाता है. घर से खाना लाने पर रोक लगाकर आप परिवारों को जंक फूड खाने के लिए मजबूर कर रहे हैं.’ अदालत में वकील आदित्य प्रताप की जरिए जनहित याचिका दायर की गई है जिसमें मल्टीप्लेक्सों में बाहर से खाना लाने पर रोक को हटाने की मांग की गई

हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार से मांगा जवाब

वहीं, दिल्ली हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर दिल्ली सरकार का रुख पूछा है जिसमें सिनेमाघरों के अंदर अपनी खाद्य सामग्री और पेय पदार्थ लेकर जाने की अनुमति देने का अनुरोध किया गया है. याचिकाकर्ता ने कोर्ट से संबंध में दिशा-निर्देश तय करने की सिफारिश की है.

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और जस्टिस सी. हरिशंकर की पीठ ने दिल्ली सरकार, पुलिस और सिनेमा ऑनर्स एंड एक्जिबिटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया को नोटिस जारी कर उनसे इस याचिका पर जवाब मांगा है.

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले बॉम्बे हाईकोर्ट की एक पीठ ने कहा था कि मल्टीप्लेक्स में बेचे जाने वाले खाद्य एवं पेय पदार्थों की कीमतें बहुत ज़्यादा हैं. कई बार, कुछ खाद्य पदार्थ सिनेमा टिकट से भी महंगे होते हैं.

इस पर कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से पूछा था कि वह राज्य के मल्टीप्लेक्स में अधिक कीमतों पर बिकने वाले खाद्य पदार्थों के दाम नियंत्रित क्यों नहीं कर सकती.

दिल्ली हाईकोर्ट में दायर की गई याचिका में कहा गया है कि सिनेमाघरों के अंदर खाद्य सामग्री और पेय पदार्थ के लिए ग्राहकों से अत्यधिक दाम वसूले जाते हैं. यह याचिका वकील एकता सिंह ने दायर की जिन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें जंगपुरा के एक सिनेमाघर के अंदर अपनी खाद्य सामग्री और पानी की बोतल लेकर जाने नहीं दिया गया.

सिंह ने अपनी याचिका में कहा है कि सिनेमाघर के अंदर भोजन और पेय पदार्थों के बहुत अधिक दाम वसूले जाते हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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