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एनआरआई को प्रॉक्सी वोट डालने का अधिकार देने वाला विधेयक लोकसभा में पारित

एनआरआई की तरह देश के अंदर यहां से वहां जाकर काम करने वाले प्रवासी मज़दूरों को भी प्रॉक्सी मताधिकार देने के सवाल पर क़ानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि एनआरआई और प्रवासी मज़दूरों की तुलना नहीं की जा सकती. प्रवासी मज़दूर भारत में ही रहते हैं.

A man's inked finger is seen after casting his ballot during presidential elections in Monrovia, Liberia, October 10, 2017. REUTERS/Thierry Gouegnon

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: लोकसभा ने लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक 2017 को गुरूवार को मंजूरी प्रदान कर दी जिसमें प्रवासी भारतीय मतदाताओं की परेशानियों को दूर करने की पहल की गई है जिससे वे अपने निवास स्थान से अपने मताधिकार का प्रयोग (प्रॉक्सी वोटिंग) कर सकें.

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद के जवाब के बाद सदन ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 में संशोधन करने वाले इस विधेयक को ध्वनिमत से मंजूरी प्रदान की.

इससे पहले विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कानून मंत्री प्रसाद ने कहा कि यह विधेयक एनआरआई (प्रवासी भारतीयों) को भारतीय लोकतंत्र में भूमिका निभाने का अवसर दे रहा है जो अपने देश को बहुत प्यार करते हैं.

चर्चा में कुछ सदस्यों द्वारा भारत में प्रवासी मजदूरों (मजदूर वे जो काम के सिलसिले में एक जिले से दूसरे जिले और एक राज्य से दूसरे राज्य भटकते रहते हैं) के सामने मतदान को लेकर आने वाली समस्याएं उठाए जाने पर मंत्री ने कहा कि चुनाव आयोग ने एक समिति बनाई है जो इस विषय में अध्ययन कर रही है.

उन्होंने कहा कि सरकार उनके मताधिकार की चिंता कर रही है और उन्हें उचित अधिकार दिया जाएगा.

एनआरआई की तरह देश के अंदर यहां से वहां जाकर काम करने वाले प्रवासी मजदूरों को भी प्रॉक्सी से मताधिकार देने के सवाल पर प्रसाद ने कहा कि एनआरआई और प्रवासी श्रमिकों की तुलना नहीं की जा सकती. प्रवासी श्रमिक भारत में ही रहते हैं.

प्रवासी भारतीयों को इस तरह मताधिकार देने पर खरीद-फरोख्त की कुछ सदस्यों की चिंताओं को खारिज करते हुए प्रसाद ने कहा कि एनआरआई अपनी मेहतन, ईमानदारी और समर्पण से विदेश जाते हैं और अपना आधार बनाते हैं. उन पर इस तरह का संदेह नहीं किया जाना चाहिए.

विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों में कहा गया है कि प्रवासी मतदाताओं के सामने आने वाली परेशानियों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने परोक्ष मतदान को आसान बनाने की व्यवहार्यता पर विचार किया जिसके माध्यम से ऐसे मतदाता विदेशों में अपने निवास स्थान से मताधिकार का प्रयोग कर सकें.

इसके अनुरूप निर्वाचन के संचालन नियम 1961 में वर्णित कुछ शर्तों के अधीन प्रवासी मतदाताओं को चुनाव में मतदान करने हेतु प्रॉक्सी नियुक्त करने में समर्थ बनाने के लिए लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 60 में संशोधन करने का प्रस्ताव किया गया है.

विदेशों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभाओं में लोगों को लाने के लिए दूतावास के अधिकारियों पर दबाव होने के माकपा सदस्य मोहम्मद सलीम के आरोपों पर मंत्री ने कहा कि अगर एनआरआई प्रधानमंत्री को सुनते हैं तो इसमें दिक्कत क्या है.

उन्होंने कहा, ‘अगर भविष्य में आप सरकार में आएंगे और प्रधानमंत्री को विदेशों में सुना जाएगा तो क्या हम आपत्ति जताएंगे? आप सरकार में आएंगे या नहीं, यह अलग विषय है.’

‘प्रॉक्सी’ शब्द पर कुछ सदस्यों की आपत्ति पर प्रसाद ने कहा कि यह कोई गंदा शब्द नहीं है और बकायदा कानून में परिभाषित है.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, विपक्ष के कई सदस्यों ने अपनी आपत्तियां जताते हुए कहा कि प्रवासी द्वारा चुना गया प्रॉक्सी उसकी मर्जी के मुताबिक उम्मीदवार को ही वोट देगा, इस बात की क्या गारंटी है? एआईडीएमके के आर. गोपालकृष्ण ने पूछा, ‘क्या गांरटी है कि प्रॉक्सी एनआरआई द्वारा चुने गए उम्मीदवार को ही वोट करेगा?’

मताधिकार के इस दुरुपयोग की आशंका और उसकी जगह ई-वोटिंग की संभावना के प्रश्न पर मंत्री ने कहा कि अगर कोई प्रवासी भारतीय अपनी पसंद से प्रॉक्सी का चयन करता है तो उसके चयन पर भरोसा करना चाहिए. उन्होंने कहा कि ई-वोटिंग में कई कठिनाइयां होती हैं और इससे सुरक्षा संबंधी सवाल जुड़े हैं.

शिवसेना के आनंदराव अदसुल ने पूछा कि संविधान हर व्यक्ति को एक वोट का अधिकार देता है, तो प्रॉक्सी व्यक्ति कैसे दोबारा वोट डालने का मौका पाएगा? और एक प्रॉक्सी कितने प्रवासियों के लिए वोट डाल पाएगा? अदसुल ने एक मतदाता की वोट डालने के बाद स्याही लगी अंगुली का फोटो दिखाते हुए पूछा, ‘कितनी अंगुली के ऊपर कितने स्याही के निशान?’

प्रसाद ने कहा कि सभी सदस्यों की चिंताओं को हमने सुना है और नियम बनाते समय सभी पर ध्यान दिया जाएगा.

इससे पहले चर्चा में भाग ले रहे अधिकतर सदस्यों ने एनआरआई को मताधिकार देने वाले इस विधेयक के उद्देश्य का समर्थन किया लेकिन इसके तरीके पर सवाल उठाया. अधिकतर सदस्यों ने सुझाव दिया कि प्रॉक्सी से मतदान कराने के बजाय तकनीक का इस्तेमाल करते हुए ई-वोटिंग कराई जानी चाहिए.

माकपा के मोहम्मद सलीम ने सरकार से पूछा कि इतने महत्वपूर्ण विधेयक पर सर्वदलीय बैठक बुलाकर चर्चा क्यों नहीं की गई? उन्होंने इसे संसद की स्थायी समिति को भेजे जाने की मांग की.

इनेलो के दुष्यंत चौटाला ने भी विधेयक को स्थायी समिति को भेजने की मांग की.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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