कैंपस

मकान मालिकों द्वारा दुर्व्यवहार और मारपीट के बाद दिल्ली के मुखर्जी नगर में सड़क पर उतरे छात्र

युवा साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित लेखक नीलोत्पल मृणाल की कथित तौर पर पुलिस ने की पिटाई. अभिनेता पंकज त्रिपाठी ने पढ़ने-लिखने का बेहतर माहौल बनाने की अपील की. छात्रों का आरोप है कि इतना किराया देने के बावजूद न तो उन्हें सुविधाएं दी जाती हैं और न ही ठीक व्यवहार किया जाता है.

दिल्ली के मुखर्जी नगर में आंदोलनरत छात्र. (फोटो साभार: फेसबुक)

दिल्ली के मुखर्जी नगर में आंदोलनरत छात्र. (फोटो साभार: फेसबुक)

उत्तरी दिल्ली के छात्र बहुल इलाक़े नेहरू विहार और मुखर्जी नगर में बीते 10 अगस्त को स्थानीय निवासियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के बीच झड़प का मामला सामने आया है.

छात्रों का आरोप है कि कमरों का ज़रूरत से ज़्यादा किराया लेने के बावजूद उन्हें सुविधाएं नहीं दी जाती हैं साथ ही मकान मालिक, प्रॉपर्टी डीलर और स्थानीय निवासियों द्वारा उनके साथ दुर्व्यवहार किया जाता है और कभी-कभी नौबत मारपीट तक की भी आ जाती है.

इन इलाकों में ज़्यादातर सरकारी नौकरी और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र-छात्राएं रहते हैं. छात्रों का आरोप है कि 10 अगस्त को एक छात्र एक प्रॉपर्टी डीलर को किराया देने गया और उसने अपनी कुछ समस्याओं के बारे में भी बताया. प्रॉपर्टी डीलर से उसकी कुछ कहासुनी हुई जिसके बाद उस प्रॉपर्टी डीलर ने गेट बंद कर छात्र को चप्पल और झाड़ू से पीटना शुरू कर दिया.

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले सबल मिश्रा ने बताया, ‘दो दिन पहले यहां ऐसा एक और मामला हुआ. इस इलाके के दो क्षेत्रनिवासी शराब पीकर बाइक चला रहे थे और उनकी एक छात्र से मामूली टक्कर हो गई. इसके बाद दोनों ने छात्र को मारा-पीटा था.’

छात्रों का आरोप है कि जब छात्र इस मामले की शिकायत लिखवाने थाने गए तो पुलिस ने कहा कि पहले जिसने मारपीट की हैं उन लड़कों को पकड़ के लाओ.

यह बात जब दूसरे छात्रों को पता चली तो कुछ ही देर में वहां काफी छात्र इकट्ठा हो गए और इसका विरोध करना शुरू कर दिया. छात्र बताते हैं कि यहां तीन से चार हज़ार छात्र एकत्रित हो गए और पुलिस से एफआईआर लिखने की मांग की.

इसके थोड़ी देर बाद ही स्थानीय लोगों से छात्रों की फिर झड़प शुरू हो गई. स्थानीय लोगों और पुलिस का आरोप है कि छात्रों ने पत्थरबाज़ी की और स्थानीय निवासियों की 6-7 गाड़ियां भी तोड़ डाली, हालांकि छात्रों ने इस बात से इनकार किया है.

उनका कहना है कि स्थानीय लोगों ने ख़ुद गाड़ी तोड़ी है और बदनाम करने के लिए आरोप छात्रों पर लगा रहे हैं. इस घटना में कुछ छात्रों के घायल होने की भी ख़बरें हैं.

छात्रों का यह भी आरोप है कि स्थानीय लोग अक्सर यहां रहने वाले छात्रों से दुर्व्यवहार करते हैं. दूसरे राज्यों से होने के नाते अक्सर उन्हें तमाम तरीके से परेशान किया जाता है. 10 अगस्त की रात तनाव को देखते हुए यहां भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है.

एक अन्य छात्र ने बताया, ‘जब भी कोई ऐसा मामला होता है हम देखते हैं कि दिल्ली पुलिस यहां के क्षेत्रनिवासियों से मिली हुई है, हम इतनी बार शिकायत लेकर आते हैं पर हमारी कोई सुनवाई नहीं होती. दो दिन पहले इस घटना से गुस्साए छात्रों ने यहां नेशनल हाईवे भी जाम किया था जहां हमारी बात सांसद मनोज तिवारी से हुई. उन्होंने इस घटना पर कहा कार्रवाई का आश्वासन दिया. हम पूछते हैं जब वो पूरी बात समझ रहे हैं तो कार्रवाई क्यों नहीं करते.’

नेहरू विहार के आसपास के इलाके मुखर्जी नगर, इंद्र विहार और गांधी विहार में रहने वाले छात्रों का आरोप है कि यहां उनसे जो किराया लिया जाता है उसके एवज में उन्हें सुविधाएं नहीं दी जाती हैं.

छात्रों के अनुसार, बिजली का बिल के तौर पर प्रति यूनिट आठ से दस रुपये वसूले जाते हैं. इस बात को लेकर छोटी-मोटी कहासुनी कई बार होती रहती है. बीते आठ अगस्त को को इसी मुद्दे को लेकर छात्रों ने एक मार्च भी निकाला था जिसके बाद इलाके में तनाव पैदा हो गया था.

मुखर्जी नगर में रहने वाले युवा लेखक नीलोत्पल मृणाल कहते हैं, ‘कोई भी छात्र जो इतनी दूर से पढ़ने आता है तो वो प्रशासन से और स्थानीय निवासियों से सुरक्षा तो चाहेगा ही. पुलिस कहती है हम यहां हुड़दंग कर रहे हैं पर ऐसा नहीं है, हम इतनी दूर से पढ़ने आए हैं न कि थाना-पुलिस करने. इन सब से हमारी पढ़ाई का ही नुकसान हो रहा है. हमारे साथ जब कोई नाइंसाफी होती है तो हम पुलिस के पास ही जाते हैं लेकिन पुलिस हमें ही मारती है.’

उन्होंने कहा, ‘यहां के स्थानीय लोगों को समझना चाहिए कि उनकी अर्थव्यवस्था, उनकी रोज़ी-रोटी हमसे ही चलती है.’ इलाहाबाद से यहां पढ़ने आए अरुण कुमार तिवारी कहते हैं, ‘हम यहां पढ़ने आए हैं न कि थाना-अदालत करने. आख़िर दिल्ली पुलिस हमारा साथ क्यों नहीं दे रही है.’

मुखर्जी नगर में प्रदर्शन करते छात्र. (फोटो साभार: फेसबुक)

मुखर्जी नगर में प्रदर्शन करते छात्र. (फोटो साभार: फेसबुक)

प्रदर्शन स्थल पर मौजूद एक अन्य छात्र ने बताया कि हमारे साथ गाली देकर ‘बाहरी’ की तरह व्यवहार किया जाता है. वे बताते हैं कि, ‘अगर हम बिहार से हैं तो हमें बिहारी कहा जाता है, उत्तर प्रदेश से हैं तो हमें भैये कह कर बुलाया जाता है. हरियाणा के छात्रों से भी ऐसा व्यवहार किया जाता है.’

वहां मौजूद पुलिस अधिकारी ने नाम न बताने कि शर्त पर कहा, ‘प्रॉपर्टी डीलर और एक छात्र के बीच छोटी सी नोकझोक हुई है जो अब इतना बड़ा मामला बन गया है. हम स्थिति को नियंत्रण में लाने की कोशिश कर रहे हैं. छात्र कुछ बाहरी लोगों के बहकावे में आकर हिंसक हो गए और गाड़ी के शीशे तोड़े जिसके कारण हमें कार्रवाई करनी पड़ी. हम छात्रों को समझाने की कोशिश कर रहे हैं.’

छात्रों का कहना है, ‘कोई भी मकान मालिक बिना ब्रोकर के रूम नहीं देता. एक कमरे का रेंट कम से कम 10 हज़ार लिया जाता है और साथ ही रेंट का आधा हिस्सा ब्रोकर को देना पड़ता है. उसके ऊपर से उन्हें आठ रुपये प्रति यूनिट बिजली का बिल लिया जाता है पर इन सब के बाद छात्रों की सबसे बड़ी समस्या क्षेत्रनिवासियों और मकान मालिकों का गलत बर्ताव है जिसको लेकर उन्होंने अपना आंदोलन जारी रखने की बात कही है.’

मालूम हो कि युवा लेकर और अपने उपन्यास ‘डार्क हॉर्स’ के लिए युवा साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित नीलोत्पल मृणाल की पुलिस द्वारा पिटाई करने का मामला भी सामने आया है.

11 अगस्त को अपने एक फेसबुक पोस्ट में नीलोत्पल मृणाल लिखते हैं, ‘प्लीज़ ध्यान दें! छात्र कहां जाएं? नेहरू विहार से सूचना है कि 100 से 200 की संख्या में समूह बनाकर स्थानीय गुंडे (न कि सामान्य नागरिक) जहां भी छात्रों को देख रहे हैं, पीट दे रहे हैं. माहौल अराजक है.’

वे लिखते हैं, ‘कल रात से नक्सल का घटिया अफ़वाह फैला अब अभी स्थानीय गुंडों को आक्रामक कर तैयार कर दिया गया है. पुलिस फोर्स भर दिया गया है और वे भी लाठी चला रहे हैं. पुलिस खुले आम ये सब कर रही और शह दे रही उन मारपीट करते गुंडों को.’

नीलोत्पल मृणाल की एक पोस्ट जिसमें छात्रों को ‘नक्सल’ कहा गया है.

नीलोत्पल मृणाल की एक पोस्ट जिसमें छात्रों को ‘नक्सल’ कहा गया है.

मृणाल लिखते हैं, ‘हम छात्र आज शांति से कैंडल मार्च को आने वाले थे, लेकिन ऐन मौके पर फसाद शुरू कर दिया गया है. अब छात्रों की सुरक्षा बेहद चिंताजनक है. कोई भी मीडिया नहीं पहुंचा अभी वहां. आप सबसे हाथ जोड़ के विनती है कि मीडिया को वहां के हालात जानने भेजें.’

उन्होंने कहा है, ‘हमारे कोचिंग संस्थान तुरंत छात्रहित में पुलिस की कार्यवाही और स्थानीय गुंडागर्दी के विरुद्ध एकजुट हों ये दवाब बनाएं कि छात्र-छात्राओं की सुरक्षा से समझौता न हो. आख़िर हम छात्र कहां जाएं? दुनिया का कौन सा हिस्सा मांग लिया है, इन मार खाते छात्रों ने? किसका हक़ खा गए हम लोग? प्लीज़ बहुत संकट में बड़े डरे हुए हैं, ये दूर-दूर के प्रदेश से छात्र. कुछ करिये, प्लीज़.’

गैंग्स आॅफ वासेपुर, मसान, न्यूटन जैसी फिल्मों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके अभिनेता पंकज त्रिपाठी भी फेसबुक पर लिखा है, ‘भाई नीलोत्पल और छात्र-छात्राओं हम सब आप के साथ हैं. ये संवेदनहीनता है दिल्ली पुलिस और स्टेट एजेंट्स का. लड़ो दोस्तों! दिल्ली पुलिस के अधिकारियों से निवेदन है ये छात्र भविष्य में आपके हीं जूनियर बनेंगे, इनको सुरक्षा और पढ़ने-लिखने का बेहतर माहौल चाहिए बस. अपने घर-गांव से दूर… 10/12 के कमरों में पलते सपने हैं ये.’

एक अन्य छात्र लकी सिंह अपने फेसबुक पोस्ट पर लिखा है, ‘नेहरू विहार और मुखर्जी नगर में आए दिन होने वाली छेड़छाड़, हिंसात्मक मारपीट, गाली गलौच से तंग आकर अपनी पढ़ाई छोड़कर मजबूरन आज छात्र को सड़क पर उतरना पड़ा, इस उम्मीद से कि पुलिस की सहायता से, बातचीत से इस समस्या का कोई हल निकाला जा सकेगा. परन्तु पुलिस ने अपने चरित्र के अनुसार चरित्रहीन बर्ताव किया और लाठी चार्ज कर दिया और उठा ले गई पांच-छह दोस्तों को.

उनके अनुसार, ‘10 बाई 10 के मकानों में, बिना सूरज की रोशनी और दिल्ली की प्रदूषित हवा में रहने का कोई शौक नहीं है साहब और ऊपर से आप बर्बरता दिखाएंगे हम पर. यहां रहने वाला छात्र समझदार है परन्तु इसका यह अर्थ निकाला जाए कि वो कायर है, वह अपनी आवाज़ नहीं उठा पाएगा तो भूल में है आप. हम करोड़ों की आवाज़ अठा सकते हैं तो अपनी भी उठा ही लेंगे.’

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