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नरेंद्र दाभोलकर हत्या मामले का मुख्य शूटर गिरफ़्तार: सीबीआई

सीबीआई ने बताया कि तर्कवादी नरेंद्र दाभोलकर पर गोली चलाने वालों में सचिन प्रकाशराव भी शामिल था. सचिन की संलिप्तता की जानकारी महाराष्ट्र एटीएस ने सीबीआई को दी थी.

नरेंद्र दाभोलकर (फोटो: यूट्यूब स्क्रीनशॉट)

नरेंद्र दाभोलकर (फोटो: यूट्यूब स्क्रीनशॉट)

मुंबई: तर्कवादी और सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र दाभोलकर हत्या मामले में शनिवार को सीबीआई ने कथित मुख्य शूटर को गिरफ़्तार कर लिया है. सीबीआई ने बताया कि औरंगाबाद निवासी सचिन प्रकाशराव अंडुरे को पुणे से शनिवार शाम को गिरफ़्तार किया गया.

सीबीआई के प्रवक्ता ने कहा कि सचिन को भी 20 अगस्त, 2013 को पुणे में ओंकारेश्वर ब्रिज पर सुबह की सैर के दौरान दाभोलकर पर गोली चलाने वालों में से एक माना जाता है.

इससे पहले, सीबीआई के आरोप पत्र में सारंग अकोलकर और विनय पवार के नाम शामिल थे. दोनों शूटर अभी भी फ़रार हैं.

इस संबंध में पूछे जाने पर सीबीआई का हालिया दावा था कि सचिन गोली चलाने वालों में से एक था. प्रवक्ता ने कहा कि जांच अभी जारी है.

सचिन को महाराष्ट्र आतंकवाद विरोधी दल (एटीएस) द्वारा दी गई सूचना पर गिरफ़्तार किया गया जिसने पिछले हफ्ते तीन लोगों को राज्य में कथित बम धमाका करने की योजना बनाते गिरफ्तार किया था.

सीबीआई ने बताया कि गिरफ्तार तीन लोगों में से एक ने सचिन दाभोलकर की हत्या में सचिन की संलिप्तता की जानकारी दी थी जिसे एटीएस ने सीबीआई के साथ साझा किया.

एटीएस ने एक बयान में कहा कि पुलिस हिरासत में आरोपियों से पूछताछ के दौरान, उनमें से एक ने दाभोलकर की हत्या में अपनी सीधी भागीदारी के बारे में बताया. उसने आगे खुलासा किया कि उसके साथ एक और व्यक्ति भी उस वारदात में सीधे शामिल था. उन्होंने घटना को अंजाम देने मोटरसाइकिल का इस्तेमाल किया था.

खुलासे के महत्व को ध्यान में रखते हुए, एटीएस ने दूसरे व्यक्ति से संबंधित जानकारी सीबीआई के साथ साझा की, जिसके आधार पर एजेंसी ने अपनी प्रारंभिक जांच की और सचिन को गिरफ्तार कर लिया.

जून 2016 में सीबीआई ने हिंदू जनजागृती समिति के सदस्य वीरेंद्र तावडे़ के खिलाफआईपीसी की धारा 120 बी (आपराधिक षड्यंत्र) और धारा 302 (हत्या) तथा अन्य आरोपों के तहत आरोप पत्र दायर किया था.

सीबीआई ने बताया था कि कथित तौर पर तावड़े दाभोलकर हत्या मामले का मास्टरमाइंड था.

महाराष्ट्र के एक वरिष्ठ एटीएस अधिकारी ने बताया कि विस्फोट साजिश के मामले में गिरफ्तार तीन लोगों में से एक शरद कालस्कर कथित तौर पर दाभोलकर की हत्या में शामिल था.

बॉम्बे हाईकोर्ट ने मई 2014 में दाभोलकर हत्या मामले को सीबीआई को सौंप दिया था.

सीबीआई ने जून, 2016 में तावड़े को गिरफ्तार किया था. जो सनातन संस्थान के कार्यकर्ता सारंग अकोलकर का एक कथित अनुयायी है. सांरग के खिलाफ जुलाई 2012 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के अनुरोध पर इंटरपोल द्वारा रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था. वह 2009 के गोवा बम धमाके के संबंध एजेंसी की जांच के दायरे में है.

गौरतलब है कि दाभोलकर की हत्या और फरवरी 2015 में वामपंथी नेता और तर्कवादी गोविंद पानसरे की हत्या एक ही तरीके से कर दी गई थी. जिसने राज्य को हिलाकर रख दिया था.

(समाचार एजेंसी पीटीआई से इनपुट के साथ)

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