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बालिका गृह मामले की रिपोर्टिंग पर रोक संबंधी हाईकोर्ट के आदेश की एडिटर्स गिल्ड ने निंदा की

एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और भारत के प्रधान न्यायाधीश से फैसले की समीक्षा करने की अपील की.

Indian press photographers stand behind a fence for security reasons as they take pictures of Belgium's Queen Paola in a school in Mumbai November 6, 2008. Belgium's King Albert II and Queen Paola are on a official state visit to India. REUTERS/Francois Lenoir (INDIA)

(प्रतीकात्मक तस्वीर: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने मुजफ्फरपुर बालिका गृह मामले की रिपोर्टिंग पर रोक लगाने के पटना उच्च न्यायालय के आदेश की निंदा की. गिल्ड ने उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और भारत के प्रधान न्यायाधीश से फैसले की समीक्षा करने की अपील की.

एक बयान में मीडिया निकाय ने कहा कि जन महत्व के मामले की रिपोर्टिंग पर इस तरह का रोक प्रतिकूल होगा. साथ ही इसने मीडिया पर इस तरह का रोक लगाने की अदालतों की बढ़ती हालिया प्रवृत्ति की निंदा करते हुए कहा कि यह लोकतंत्र के स्तंभों में से एक को कमजोर करता है.

बयान में कहा गया है कि गिल्ड इस बात पर गौर करके परेशान है कि मीडिया की स्वतंत्रता की रक्षा करने की बजाय अदालत ने ऐसा आदेश जारी किया है जो इसपर अंकुश लगाता है.

बयान में कहा गया है, ‘वह भारत के प्रधान न्यायाधीश और पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से रोक लगाने वाले आदेश की समीक्षा करने और स्वतंत्र मीडिया एवं लोकतंत्र के सिद्धांतों को बरकरार रखने की अपील करता है.’

गिल्ड ने मुख्य न्यायाधीश मुकेश आर शाह और न्यायमूर्ति रवि रंजन के 23 अगस्त के मौखिक आदेश पर भी गौर किया जिसमें कहा गया था कि जब तक आश्रय गृह मामले की जांच पूरी नहीं हो जाती है तब तक सभी प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर मामले के संबंध में और खासतौर पर पहले ही शुरू हो चुकी जांच या आगे होने वाली जांच के बारे में रिपोर्टिंग करने पर रोक लगाई जाती है.

पीठ ने दावा किया था कि रिपोर्टिंग से मामले की जांच गंभीर रूप से बाधित हो सकती है.

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