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सामाजिक कार्यकर्ताओं की गिरफ़्तारी मामले में मानवाधिकार आयोग का महाराष्ट्र सरकार को नोटिस

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने महाराष्ट्र के पुलिस प्रमुख को भी नोटिस जारी किया है. आयोग ने कहा है कि प्रतीत होता है कि पांच कार्यकर्ताओं की गिरफ़्तारी में नियमों का ठीक तरीके से पालन नहीं किया गया है. वहीं, गौतम नवलखा को महाराष्ट्र पुलिस ने दस्तावेजों की अनूदित प्रति उपलब्ध करा दी है.

(फोटो: पीटीआई)

(फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली/मुंबई: एनएचआरसी ने बुधवार को महाराष्ट्र सरकार और राज्य के पुलिस प्रमुख को नोटिस जारी किया. उसने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि पांच कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी में मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का ठीक तरीके से पालन नहीं किया गया और यह उनके मानवाधिकारों का उल्लंघन हो सकता है.

महाराष्ट्र के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को चार सप्ताह के भीतर मामले में एक तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है.

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कई शहरों में मंगलवार को हुई गिरफ्तारी की खबरों पर संज्ञान लेते हुए आयोग ने नोटिस भेजा है.

एक अधिकारी ने बताया, ‘मीडिया की खबरों के आधार पर आयोग ने पाया कि ऐसा लगता है कि पुलिस अधिकारियों ने इन गिरफ्तारियों के सिलसिले में एसओपी का ठीक तरीके से पालन नहीं किया, जो उनके मानवाधिकारों का उल्लंघन हो सकता है.’

पुणे पुलिस ने मंगलवार को कई शहरों में प्रमुख वामपंथी कार्यकर्ताओं के घरों पर छापेमारी की और इनमें से पांच को गिरफ्तार किया. जिनमें कवि पी. वरावरा राव को हैदराबाद से, मुंबई से कार्यकर्ता वेरनॉन गोंजाल्विस और अरूण फरेरा, फरीदाबाद से ट्रेड यूनियन कार्यकर्ता और वकील सुधा भारद्वाज और दिल्ली से मानवाधिकार कार्यकर्ता गौतम नवलखा को गिरफ्तार किया गया.

पिछले साल 31 दिसंबर को आयोजित एल्गार परिषद कार्यक्रम के बाद पुणे के नजदीक कोरेगांव-भीमा गांव में दलित और अगड़ी जाति समूहों के बीच हिंसा की जांच के सिलसिले में छापेमारी की गई.

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि माओवादियों से संबंध के संदेह और एल्गार परिषद कार्यक्रम का कथित तौर पर वित्तपोषण करने को लेकर पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया.

मीडिया में आई खबरों का हवाला देते हुए एनएचआरसी ने कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने नवलखा के ट्रांजिट रिमांड पर रोक लगा दी है.

उच्च न्यायालय ने कहा था कि पुलिस इस बात को संतोषजनक तरीके से नहीं बता सकी कि उन्हें किस अपराध के लिए गिरफ्तार किया गया है.

एनएचआरसी ने एक बयान में कहा, ‘वकील-कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज के ट्रांजिट रिमांड पर निर्णय भी फरीदाबाद के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास लंबित है. कार्यकर्ता ने अदालत को बताया कि उनका उस घटना से कोई लेना-देना नहीं है जिसके लिए उन्हें गिरफ्तार किया गया. उनके अनुसार एफआईआर में उनका नाम भी नहीं है और उन्हें परेशान किया जा रहा है और उन्हें सिर्फ उनकी विचारधारा के लिए गिरफ्तार किया गया.’

इसमें कहा गया है, ‘कार्यकर्ता गौतम नवलखा के मामले में अदालत ने कथित तौर पर पुणे पुलिस से पूछा है कि बिना किसी स्थानीय गवाह के उसने दिल्ली की एक अदालत से ट्रांजिट रिमांड कैसे हासिल कर ली.’

इसमें कहा गया है कि अदालत ने पुलिस को दस्तावेजों का अंग्रेजी में अनुवाद कराने को कहा है, जो क्षेत्रीय भाषा में है.

आयोग ने यह भी कहा है कि उसे जिनेवा के एक एनजीओ से पूर्व में पांच मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गैरकानूनी गिरफ्तारी के सिलसिले में एक शिकायत मिली थी. यह गिरफ्तारी महाराष्ट्र पुलिस ने इस साल जून में की थी. ये कार्यकर्ता सुरेन्द्र गाडलिंग, रोना विल्सन, सुधीर धवले, शोमा सेन और महेश राउत थे.

एनएचआरसी ने कहा, ‘उस मामले में भी आयोग ने 29 जून को महाराष्ट्र के डीजीपी को एक नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर मामले पर एक रिपोर्ट देने को कहा था, जो अभी तक नहीं मिली है.’

गिरफ़्तार तीन कार्यकर्ताओं को पुणे की अदालत लाया गया

मामले में गिरफ्तार वरावरा राव, मानवाधिकार कार्यकर्ता वेरनॉन गोंजाल्विस और अरूण फरेरा को बुधवार को पुणे की एक अदालत में लाया गया.

महाराष्ट्र पुलिस ने इन तीनों वामपंथी कार्यकर्ताओं को मंगलवार को गिरफ्तार किया था और उन्हें बीती रात ही पुणे लाया गया.

उन्हें जिला एवं सत्र न्यायाधीश केडी वाधने की अदालत में ले जाया गया.

खचाखच भरी अदालत के बाहर आस दौरान भारी संख्या में पुलिस का बंदोबस्त देखा गया.

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, मंगलवार को हैदराबाद में राव, मुंबई में गोंजाल्विस और फरेरा, मजदूर संघ कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज के फरीदाबाद और सिविल लिबर्टिज कार्यकर्ता गौतम नवलखा के नई दिल्ली स्थित आवासों में तकरीबन एक ही समय पर तलाशी ली गई.

इसके बाद राव, भारद्वाज, फरेरा, गोंजाल्विस और नवलखा को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 153 (ए) के तहत गिरफ्तार कर लिया गया.

यह धारा धर्म, नस्ल, जन्म स्थान, आवास, भाषा के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य को बढ़ावा देने और सौहार्द को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों को अंजाम देने से संबद्ध है.

पुलिस अधिकारी ने बताया कि गिरफ्तार लोगों के खिलाफ आईपीसी की कुछ अन्य धाराएं और उनकी कथित नक्सली गतिविधियों को लेकर गैर कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम भी लगाया गया है.

महाराष्ट्र पुलिस ने दस्तावेजों की अनूदित प्रति नवलखा के वकील को सौंपी

वहीं, दिल्ली हाईकोर्ट को बुधवार को सूचित किया गया कि महाराष्ट्र पुलिस ने प्राथमिकी सहित अन्य दस्तावेजों की अनूदित (ट्रांसलेटेड) प्रति नागरिक अधिकार कार्यकर्ता गौतम नवलखा के वकील को सौंप दी है.

गौरतलब है कि नवलखा ने अपनी गिरफ्तारी को गैरकानूनी बताया था. नवलखा के वकील ने जस्टिस एस. मुरलीधर और जस्टिस विनोद गोयल की पीठ को बताया कि उन्हें मराठी से अंग्रेजी में अनूदित दस्तावेजों की प्रति बुधवार दोपहर साढ़े बारह बजे प्राप्त हो गई.

दस्तावेजों में प्राथमिकी, गिरफ्तारी मेमो और जब्ती मेमो की अनूदित प्रतियां शामिल हैं.

गौरतलब है कि इससे पहले, महाराष्ट्र पुलिस की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अमन लेखी ने पीठ को बताया था कि दस्तावेजों की मराठी से अंग्रेजी भाषा में अनूदित प्रति अभी तैयार नहीं है.

इस पर पीठ ने उन्हें कहा था कि वह दस्तावेजों की अनूदित प्रति दोपहर तक नवलखा के वकील को मुहैया कराएं. साथ ही अदालत ने मामले की सुनवाई के लिए सवा दो बजे का समय तय किया था.

अदालत ने मंगलवार को निर्देश दिया था कि उसके द्वारा मामले की सुनवाई किये जाने से पहले नवलखा को दिल्ली से बाहर न ले जाया जाए क्योंकि उनके खिलाफ आरोप स्पष्ट नहीं हैं क्योंकि आरोपों से संबंधित दस्तावेज मराठी में हैं.

अदालत ने कहा था कि फिलहाल नवलखा को दिल्ली पुलिस की निगरानी में उनके आवास में ही रखा जाए और इस दौरान उन्हें सिर्फ अपने वकीलों से मिलने और बात करने की अनुमति होगी.

कई शहरों में की गई छापेमारी के बाद नवलखा को मंगलवार को गिरफ्तार किया गया था. उसके बाद साकेत जिला अदालत से उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर पुणे ले जाने की अनुमति ली गई.

हालांकि, उच्च न्यायालय ने साकेत अदालत के आदेश पर रोक लगा दी थी.

गौतम नवलखा के घर के बाहर भारी सुरक्षा

वहीं, नवलखा के घर के बाहर भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई है. कथित गैरकानूनी गतिविधियों को लेकर महाराष्ट्र पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हें उनके घर में नजरबंद करने का आदेश दिया है.

अदालत के आदेश के बाद उनके घर के बाहर भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई है.

नेहरू एनक्लेव स्थित नवलखा के घर के बाहर, सड़क पर अवरोधक लगाए गए हैं तथा किसी भी बाहरी व्यक्ति को परिसर के अंदर नहीं जाने दिया जा रहा है.

दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले की प्रतीक्षा के बीच उनके घर के बाहर कई मीडिया वैन तैनात रहे. मीडिया वैनों को देखकर राहगीर यह जानने को उत्सुक थे कि क्या हो रहा है.

सूत्रों ने बताया कि पुणे पुलिस के जवानों को सादे कपड़ों में उनके निवास के बाहर तैनात किया गया है वहीं दिल्ली पुलिस उन्हें सुरक्षा प्रदान करने में शामिल है.

दिल्ली पुलिस की एक महिला कॉन्स्टेबल सहित छह पुलिसकर्मी उनके घर के अंदर मौजूद थे.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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