कैंपस

मणिपुर विश्वविद्यालय के कुलपति ने लगाया अपने ख़िलाफ़ प्रदर्शन करने वाले संगठनों पर प्रतिबंध

कुलपति एपी पांडे पर वित्तीय अनियमितता और प्रशासनिक लापरवाही के आरोपों को लेकर छात्रसंघ समेत शिक्षक और स्टाफ ने 85 दिनों तक धरना दिया था. इन संगठनों ने कुलपति के ‘आभासी’ आदेश पर प्रशासन से कार्रवाई करने को कहते हुए दोबारा हड़ताल शुरू करने की चेतावनी दी है.

Adya Prasad Pandey You Tube

मणिपुर विश्वविद्यालय के कुलपति आद्या प्रसाद पांडे (फोटो साभार: मणिपुर यूनिवर्सिटी/यूट्यूब)

इंफाल: मणिपुर विश्वविद्यालय के कुलपति आद्या प्रसाद पांडे ने संस्थान में उनके ख़िलाफ़ प्रदर्शन करने वाले दो संगठनों पर प्रतिबंध लगा दिया है.

मालूम हो कि बीते 30 मई से 24 अगस्त तक कुलपति पर विभिन्न आरोप लगाते  मणिपुर यूनिवर्सिटी छात्रसंघ (एमयूएसयू), मणिपुर विश्वविद्यालय टीचर्स एसोसिएशन (एमयूटीए) और मणिपुर विश्वविद्यालय स्टाफ एसोसिएशन (एमयूएसए) ने आंदोलन किया था.

इस बीच वे भूख हड़ताल पर बैठे, राज्य भर में बंद भी किया गया, साथ ही विश्वविद्यालय के सभी डीन और 28 विभागों के प्रमुख ने इस्तीफा दे दिया था.

मानव संसाधन विकास मंत्रालय और राज्य सरकार के दखल के बाद कुलपति को अवकाश पर भेज दिया था. संबंधित पक्षों के बीच बीते 16 अगस्त को ही समझौता हुआ जिसके बाद 17 अगस्त से आंदोलन को स्थगित करने पर सहमति बनी थी, लेकिन बाद में हड़ताल पर रोक रद्द कर दी गयी.

इस सहमति पत्र में कहा गया था कि जब तक कुलपति के ख़िलाफ़ इन्क्वायरी पूरी नहीं होती, वे अवकाश पर रहेंगे.

लेकिन उन्होंने शनिवार को जारी बयान में कहा कि उन्होंने कार्यभार संभाल लिया है और उनके ख़िलाफ़ प्रदर्शन करने वाले संगठनों को बैन कर दिया है.

पांडे ने कहा, ‘मणिपुर विश्वविद्यालय टीचर्स एसोसिएशन (एमयूटीए) और मणिपुर विश्वविद्यालय स्टाफ एसोसिएशन (एमयूएसए) को तुरंत प्रभाव से प्रतिबंधित किया जाता है क्योंकि मणिपुर विश्वविद्यालय कानून 2005 के तहत कर्मचारियों के संगठन का प्रावधान नहीं है.’

मानव संसाधन विकास मंत्रालय, मणिपुर की राज्यपाल नजमा हेपतुल्ला और मुख्य सचिव जे सुरेश बाबू को घटनाक्रम के बारे में अवगत कराया गया है.

मालूम हो कि इन संगठनों ने कुलपति पर वित्तीय अनियमितता और प्रशासनिक लापरवाही के आरोप लगाते हुए उन्हें हटाने की मांग की थी.

छात्र-छात्राएं कुलपति आद्या प्रसाद पांडे को हटाने की मांग कर रहे हैं. (फोटो साभार: फेसबुक/Eyamba Meetei)

छात्र-छात्राएं कुलपति आद्या प्रसाद पांडे को हटाने की मांग कर रहे हैं. (फोटो साभार: फेसबुक/Eyamba Meetei)

मानव संसाधन विकास मंत्रालय के उनकी मांगें मानने के बाद केंद्रीय विश्वविद्यालय में 24 अगस्त को शैक्षिक गतिविधियां बहाल हुई थी. इससे एक दिन पहले एमयूटीए और एमयूएसए के साथ मणिपुर विश्वविद्यालय छात्र संघ ने 85 दिनों तक चला प्रदर्शन ख़त्म कर दिया था.

अब कुलपति ने कहा है कि दोनों संगठनों की गतिविधियों में संलिप्त रहने वाले विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाएगी.

मणिपुर विश्वविद्यालय में प्रदर्शन. (फोटो साभार: फेसबुक/E-pao)

मणिपुर विश्वविद्यालय में प्रदर्शन. (फोटो साभार: फेसबुक/E-pao)

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा कि ये दोनों ही संगठन यूनिवर्सिटी में अशांति फैलाने वाली गतिविधियों में शामिल थे. 1 सितंबर को जारी इस आदेश के अनुसार ये संगठन कैंपस में प्रतिबंधित हैं और अगर कोई भी इनकी गतिविधियों से जुड़ा पाया गया तो उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी.

इस अख़बार से बात करते हुए एपी पांडे ने कहा, ‘मैं 31 अगस्त तक एक महीने की छुट्टी पर था और अब मैंने दोबारा काम जॉइन कर लिया है. मैंने एमयूटीए और एमयूएसए पर प्रतिबंध लगा दिया है क्योंकि वे छात्रों को विरोध प्रदर्शन करने के लिए भड़का रहे थे और यूनिवर्सिटी का माहौल ख़राब कर रहे थे. वे ढेरों छात्रों भविष्य खराब कर रहे थे.

हालांकि छात्रों और शिक्षकों ने कुलपति के इस आदेश को ‘आभासी’ बताया है. एक आपातकालीन बैठक में एमयूटीए ने प्रस्ताव पारित किया कि कुलपति पांडे को जांच पूरी होने और उसके बाद लिए जाने वाले कदम तक कैंपस में ‘आने नहीं दिया’ जायेगा.

इस प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि पांडे का यह ‘आभासी आदेश’ उनके अलोकतांत्रिक और अधिकारवादी होने को दिखाता’ है.

वहीं इन तीनों संगठनों की संयुक्त बैठक में एक अन्य प्रस्ताव पारित किया गया, जहां उन्होंने कहा कि ‘प्रशासन को 4 सितंबर तक कुलपति पांडे द्वारा जरी किये गए आदेशों पर उचित कदम उठाना चाहिए.

एमयूटीए के प्रवक्ता प्रोफेसर एनएन सिंह ने इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कहा कि यदि 4 सितंबर की शाम तक हमारी मांग पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गयी, तो हम अपनी हड़ताल फिर शुरू कर देंगे.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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