राजनीति

पद्म भूषण के लिए पीछे पड़ने वाले गडकरी के बयान ने मुझे दुख पहुंचाया: आशा पारेख

बीते ज़माने की मशहूर अभिनेत्री आशा पारेख ने कहा है कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का यह बयान कि पद्म भूषण पुरस्कार पाने के लिए मैं उनके पीछे पड़ी थी, काफी दुखद था.

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आशा पारेख. (फोटो साभार: आईएएनएस)

राष्ट्रीय राजमार्ग एवं परिवहन मंत्री ने पिछले वर्ष कहा था कि आशा पारेख ने इस पुरस्कार के लिए सिफारिश लगवाने के वास्ते उनसे मुलाकात की थी.

74 वर्षीय इस अभिनेत्री ने कहा कि गडकरी का बयान ठीक नहीं था. बृहस्पतिवार को समाचार एजेंसी भाषा से बातचीत में उन्होंने कहा, मुझे इससे चोट पहुंची है. जो उन्होंने किया वह सही नहीं था. लेकिन मैंने उसे एक चुटकी नमक के साथ निगल लिया. मेरे लिए यह मायने नहीं रखता… विवाद फिल्म उद्योग का एक हिस्सा है.

भारत रत्न और पद्म विभूषण के बाद पद्म भूषण तीसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान है.

पिछले साल गडकरी ने दावा किया था कि अभिनेत्री उनसे मिलने के लिए मुंबई आई थीं. उनकी बिल्डिंग की लिफ्ट ख़राब थी तो वह 12वीं मंज़िल तक सीढ़ियों से पहुंची थीं. गडकरी ने कहा था, ‘मुझे बहुत दुख हुआ था कि क्यों उन्होंने इतनी ज़हमत उठाई. तब आशा जी ने कहा था कि उन्हें पद्म श्री मिल चुका है और अब उन्हें पद्म भूषण चाहिए. मैंने उनसे कहा कि आपको पद्म श्री मिल चुका है यह पद्म भूषण की ही तरह है तो उन्होंने कहा ऐसा नहीं है.’

गडकरी के मुताबिक, आशा पारेख ने उनसे कहा था कि बॉलीवुड में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए वह पद्म भूषण सम्मान की हकदार हैं.

आशा पारेख को 1992 में पद्म श्री और 2014 को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका था. 1959 से 1973 के बीच आशा पारेख की गिनती शीर्ष अभिनेत्रियों में होती थी. बॉलीवुड पर राज करने वाली इस अदाकारा ने शम्मी कपूर, देव आनंद, राजेंद्र कुमार, राजेश खन्ना जैसे कई बड़े कलाकारों के साथ काम किया है.

आशा पारेख इन दिनों अपनी आत्मकथा ‘द हिट गर्ल’ के रिलीज़ होने की तैयारियों में जुटी हैं. इसके सह लेखक ख़ालिद मोहम्मद हैं. यह किताब 10 अप्रैल को लॉन्च होगी.

उन्होंने कहा, मैं चाहती हूं कि लोग इस किताब को पढ़ें. मैं अपने अस्पताल पर भी ध्यान केंद्रित करना चाहती हूं, इसलिए मुझे इसका उतना दबाव नहीं है. मुझे ज़्यादा चिंता अस्पताल की है.

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आशा पारेख की किताब द हिट गर्ल का कवर. (फोटो साभार: www.w3buzz.in)

कभी-कभी शोहरत भी अकेलापन साथ लाती है

अपनी बेहतरीन अदाकारी के दम पर विभिन्न किरदारों को बड़े पर्दे पर जीने वाली 1960 के दशक की प्रतिष्ठित अदाकारा आशा पारेख का कहना है कि शोहरत की गलियों में भी इंसान कई बार अकेला पड़ जाता है. उनना है एक दौर ऐसा भी था जब उन्हें अवसाद का सामना करना पड़ा.

समाचार एजेंसी भाषा को दिए साक्षात्कार में उन्होंने कहा, मेरे लिए वह बेहद बुरा दौर था. मैंने अपने माता-पिता को खो दिया था. मैं बिल्कुल अकेली थी और मुझे सब कुछ खुद ही संभालना पड़ता था. मैं बेहद दुखी महसूस करती थी और कई बार ऐसे (आत्महत्या) ख़्याल भी आते थे. फिर मैं उससे बाहर निकली. वह काफी संघर्ष भरा था, मुझे उन सब से निकलने के लिए डॉक्टर की मदद लेनी पड़ी.

अदाकारा ने कहा कि कई बार अभिनेता लाखों प्रशंसकों का प्यार मिलने के बाद भी अकेले होते हैं. शीर्ष स्थान पर आप हमेशा अकेले होते हो.

उन्होंने आगे कहा, मैं खुशकिस्मत थी कि मेरे प्यारे माता-पिता मेरे साथ थे. मेरे करिअर, मेरी ज़िंदगी में मेरी मां हमेशा मेरा सहारा बनी रहीं. इसलिए उन्हें खोने के बाद, मैं तनाव का शिकार हो गई थी. यह एक बड़ी राहत की बात है कि वह दौर खत्म हो चुका है.

आशा पारेख ने बतौर बाल कलाकार अपने करिअर की शुरुआत 1952 में फिल्म आसमान से की थी. जब प्यार किसी से होता है, फिर वो ही दिल लाया हूं, तीसरी मंज़िल, बहारों के सपने, प्यार का मौसम, कटी पतंग और कारवां उनके करिअर की बड़ी हिट फिल्मों में शुमार हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)