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नई दिल्ली में आरटीआई कार्यकर्ता की हत्या

नवल किशोर आरटीआई कार्यकर्ता होने के साथ चांदनी चौक इलाके में लाल किले के सामने कपड़े की दुकान लगाया करते थे. नवल के आरटीआई लगाने की वजह से कई लोगों की दुकानें सील हो गई थीं.

New Delhi

नई दिल्ली: पिछले कुछ महीनों से सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून का इस्तेमाल कर जानकारी निकालने वालों पर लगातार हमलों के मामले सामने आ रहे हैं. ताजा मामला दिल्ली के बुराड़ी इलाके का है जहां के रहने वाले नवल किशोर नाम के एक आरटीआई कार्यकर्ता की अलीपुर इलाके में हत्या कर दी गई.

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक जीटी करनाल रोड की सर्विस लेन पर शुक्रवार सुबह एक युवक की लाश मिली थी. इस शख्स की पहचान उनके विजिटिंग कार्ड से की गई है.

पुलिस ने पोस्टमार्टम करवाने के बाद लाश घरवालों को सौंप दिया और मामला दर्ज आरोपियों की जांच कर रही है.

बता दें कि 35 वर्षीय नवल किशोर चौधरी परिवार के साथ बुराड़ी के झड़ौदा माजरा इलाके में अपने परिवार के साथ रहते थे. परिवार में पत्नी, तीन बच्चे, भाई और उनके परिवार वाले हैं.

इनाडू की रिपोर्ट के मुताबिक नवल चांदनी चौक इलाके में लाल किले के सामने कपड़े की दुकान लगाया करते थे और वे आरटीआई कार्यकर्ता भी थे. नवल किशोर के आरटीआई लगाने की वजह से कई लोगों की दुकाने सील हो गईं थीं.

नवल किशोर पहले भी इस बात का जिक्र कर चुके थे कि आरटीआई लगाने के बाद से कुछ लोग उनके पीछे पड़े हुए हैं. वहीं परिजनों का आरोप है कि इसी के चलते नवल किशोर की हत्या कर दी गई.

परिजनों ने बताया कि नवल रोजाना रात 10 बजे तक काम से घर आ जाते थे. लेकिन शुक्रवार देर रात उनका फोन भी स्विच ऑफ था.

इससे पहले बीते जुलाई महीने में बिहार में जमुई जिले के सिकंदरा प्रखंड अंतर्गत बिछुवे गांव में दो आरटीआई कार्यकर्ताओं को गोली मारकर हत्या कर दी गई. मृतकों में वाल्मीकि यादव और धमेंद्र उर्फ कारू यादव शामिल हैं.

गौरतलब है कि वाल्मिकी यादव ने सूचना के अधिकार के तहत (आरटीआई) के तहत पंचायत की कई योजनाओं में अनियमितता और लूट का खुलासा किया था. परिजनों को आशंका है कि इसी कारण दोनों की हत्या कर दी गई.

इसी साल जून महीने में बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के पिपराकोठी थाना क्षेत्र में सूचना का अधिकार (आरटीआई) कार्यकर्ता राजेंद्र सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई. उन्होंने एलआईसी घोटाला, इंदिरा आवास योजना और शिक्षक व पुलिस विभाग में नियुक्ति घोटाले का खुलासा आरटीआई के ज़रिए किया था.

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