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सरकारी कर्मचारी की विधवा पुनर्विवाह के बाद भी पारिवारिक पेंशन की हक़दार

रक्षा मंत्रालय के कर्मचारी की विधवा की याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) ने कहा कि पेंशन नियमावली 1972 के तहत विधवा पारिवारिक पेंशन की क़ानूनन हक़दार है.

प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स

प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स

नई दिल्ली: केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) ने कहा है कि किसी मृत सरकारी सेवक की विधवा पुनर्विवाह के बाद भी पारिवारिक पेंशन की हकदार है.

कैट के प्रशासनिक सदस्य प्रवीण महाजन ने यह कहते हुए दिल्ली निवासी रेणु गुप्ता (47) की पारिवारिक पेंशन बहाल करने का आदेश दिया कि गुप्ता ने अपने पुनर्विवाह के बाद अपने पुत्र के नाम पर पारिवारिक पेंशन को ट्रांसफर करने का अनुरोध इसका नतीजा जाने बिना किया.

रेणु गुप्ता पवन कुमार गुप्ता की पत्नी हैं जो मृत्यु के समय रक्षा मंत्रालय के कर्मचारी थे.

कैट ने रक्षा मंत्रालय से कहा कि वह चार महीने के भीतर रेणु गुप्ता के पुत्र के नाम से उनके नाम पर पेंशन दावे को ट्रांसफर करे.

अधिकरण ने कहा, ‘नतीजा जाने बिना उन्होंने अपनी शादी के बाद अपने पुत्र के नाम पर पारिवारिक पेंशन को ट्रांसफर करने का अनुरोध किया. हालांकि, वह पारिवारिक पेंशन पुत्र के 25 साल का हो जाने पर अमान्य हो जाएगी.’

अधिकरण ने कहा, ‘सरकार ने कहा है कि विधवा के पुनर्विवाह करने की स्थिति में भी पारिवारिक पेंशन दी जा सकती है.’

पीठ ने मंत्रालय की दलीलों को खारिज कर दिया और कहा कि वह ‘सीसीएस पेंशन नियमावली, 1972 के तहत पारिवारिक पेंशन की कानूनन हकदार हैं.’

रक्षा मंत्रालय ने रेणु गुप्ता को उनके पति की मृत्यु के बाद अनुकंपा के आधार पर 1998 में स्टोर कीपर के तौर पर नियुक्त किया था.

उन्हें केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियमावली, 1972 के अनुसार पारिवारिक पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति पश्चात के लाभ भी दिए गए थे.

रेणु गुप्ता ने उसके बाद दूसरी शादी कर ली और 2002 में खुद से अनुरोध किया कि पारिवारिक पेंशन उनके पुत्र करण गुप्ता के नाम पर ट्रांसफर कर दी जाए.

हालांकि, 2013 में रेणु गुप्ता ने पारिवारिक पेंशन उनके नाम पर बहाल करने के लिये कई बार अनुरोध भेजा, जिसे हर बार खारिज कर दिया गया और उन्हें सूचित किया गया कि पुनर्विवाह करने के बाद उन्हें पेंशन नहीं दी जा सकती है.

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