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दिल्ली पुलिस का सुझाव, जंतर मंतर पर न जुटने पाएं 1000 से ज़्यादा प्रदर्शनकारी

दिल्ली पुलिस द्वारा तैयार किए गए मसौदे के अनुसार जंतर मंतर पर अधिकतम 1000, संसद मार्ग पर 2000 और बोट क्लब पर ज़्यादा से ज़्यादा 100 लोगों को प्रदर्शन की इजाज़त होगी.

Kisan Mahapanchayat Jantar Mantar PTI

जंतर मंतर पर किसान महापंचायत (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने राजधानी में विरोध प्रदर्शन के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दिशानिर्देशों का मसौदा तैयार किया है जिसके अनुसार जंतर मंतर पर अधिकतम 1000 लोगों को, संसद मार्ग पर 2000 लोगों को और बोट क्लब पर ज्यादा से ज्यादा 100 लोगों को प्रदर्शन की इजाजत होगी.

दिशानिर्देशों में इन प्रदर्शन स्थलों पर लाठी, हथियार, भाले, तलवार और अन्य ऐसे अस्त्र-शस्त्र लेकर जाने पर पाबंदी का प्रस्ताव भी है. इसमें पुतले या कागज जलाने आदि पर भी रोक का प्रस्ताव है.

पुलिस द्वारा तैयार मसौदे के अनुसार जंतर मंतर पर एक दिन में केवल दो प्रदर्शनों की अनुमति होगी और कुल प्रदर्शनकारियों की संख्या 1000 से अधिक नहीं होगी.

इसी तरह संसद मार्ग पर अधिकतम 2000 लोगों को जुटने की इजाजत दी जाएगी. मसौदे के अनुसार अगर प्रदर्शनकारी सक्षम प्राधिकार से इजाजत लेते हैं तो उन्हें सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक लाउडस्पीकर के इस्तेमाल की अनुमति दी जा सकती है.

अगर आंदोलनकारियों की संख्या अधिकतम सीमा को पार कर जाती है तो रामलीला मैदान में आंदोलन की अनुमति दी जा सकती है जहां 50 हजार तक लोग जमा हो सकते हैं.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली पुलिस ने अपने निर्देशों में लिखा है कि दुखद घटनाएं भावनात्मक विस्फोट पैदा करती हैं. इस तरह की चीजों के लिए अनुमति नहीं दी सकती है और इन्हें शुरु में ही रोक दिया जाना चाहिए. दिशाहीन भीड़ सार्वजनिक या निजी या संस्थानों को नुकसान पहुंचा सकती है.

वहीं अगर पार्लियामेंट स्ट्रीट और जंतर मंतर पर यदि आयोजकों भारी संख्या में प्रदर्शनकारी लाते हैं तो दिशानिर्देशों के अनुसार उन लोगों को ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा और उन्हें दिल्ली के अधिकार क्षेत्र में विरोध करने की अनुमति नहीं दी जाएगी.

पिछले उदाहरणों का हवाला देते हुए पुलिस ने कहा, ‘कभी-कभी 5000 तक की सीमा वाले क्षेत्र में 15,000 तक की भीड़ जमा हो जाती है.’ रिपोर्ट में कई महीनों तक अपनी मांगों को लेकर जंतर मंतर पर रहने वाले तमिलनाडु के किसानों के बारे में भी बात की गई है.

पुलिस ने कहा कि ये किसान कई दिनों तक वहां रहे और उन्होंने खुले में खाना पकाया, शौच किाया और कपड़े धोया, जिसकी वजह से आस-पास का वातावरण अस्वच्छ हो गया.

पांच सितंबर को संसद मार्ग पर हुए किसान मजदूर रैली का हवाला देते हुए पुलिस ने कहा कि लगभग 15,000 प्रदर्शनकारी संसद मार्ग, टॉल्सटॉय मार्ग और जय सिंह रोड पर जमा हो गए जिसकी वजह से दिल्ली का ट्रैफिक बुरी तरह से प्रभावित हुआ.

पुलिस का तर्क है कि इन वजहों से प्रदर्शनकारियों की संख्या बढ़ाने की इजाजत नहीं दी जा सकती है. पुलिस का कहना है कि अगर 2000से ज्यादा प्रदर्शनकारी आते हैं तो वे रामलीला मैदान में जाएं.

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने या धरना देने पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लग सकता है. न्यायालय ने केंद्र को निर्देश दिया कि वह ऐसे प्रदर्शनों की अनुमति देने के लिए दिशा-निर्देश तय करे.

जस्टिस एके सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण की पीठ ने कहा था कि नागरिकों के प्रदर्शन करने और शांत जीवन जीने के दोनों परस्पर विरोधी अधिकारों के बीच संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता है.

एनजीटी ने पिछले साल पांच अक्टूबर को ऐतिहासिक जंतर मंतर के आसपास सभी तरह के प्रदर्शन और धरने आयोजित करने पर प्रतिबंध लगा दिया था और कहा था कि ऐसी गतिविधियां पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन करती हैं.

इसके बाद एनजीटी के प्रतिबंध को प्रदर्शन करने वाले समूहों जैसे मज़दूर किसान शक्ति संगठन, पूर्व कर्मचारी आंदोलन और अन्य ने चुनौती दी थी. जिनका कहना था कि प्रदर्शन करना उनका मौलिक अधिकार है.

दिल्ली पुलिस द्वारा तैयार किए गए ये दिशानिर्देश इसी महीने सुप्रीम कोर्ट में जमा किए जाने हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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