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अस्पतालों को संवेदनशील बनाया जाए ताकि कुष्ठ रोगियों के साथ भेदभाव न हो: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट में दाख़िल एक याचिका में आरोप लगाया है कि हर साल देश में लगभग सवा लाख लोग कुष्ठ रोग से प्रभावित होते हैं. 1981 से ही देश में इसका मेडिकल इलाज उपलब्ध होने के बावजूद सरकारें अब तक इसे जड़ से ख़त्म करने में असफल रही हैं.

(फोटो: रॉयटर्स)

(फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को केंद्र को निर्देश दिया कि कुष्ठ रोगियों को दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी करने पर विचार करे ताकि वे आरक्षण और दूसरी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकें.

मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, जस्टिस  एएम खानविलकर और जस्टिस  धनंजय वाई. चंद्रचूड़ की पीठ ने कुष्ठ रोग के उन्मूलन और ऐसे रोगियों के पुनर्वास के बारे में केंद्र और सभी राज्य सरकारों को अनेक निर्देश दिए हैं.

पीठ ने कहा, ‘निजी और सरकारी अस्पतालों के मेडिकल स्टाफ को संवेदनशील बनाया जाए ताकि कुष्ठ रोगियों को किसी प्रकार के भेदभाव का सामना न करना पड़े.’

इसके साथ ही सरकार को कुष्ठ रोग के बारे में जागरूकता अभियान शुरू करने का निर्देश भी दिया गया है ताकि कुष्ठ रोगी अलग-थलग न हों और वे भी सामान्य वैवाहिक जीवन गुजार सकें.

न्यायालय ने केंद्र और राज्य सरकारों को नियम तैयार करने का निर्देश दिया है ताकि कुष्ठ रोग से प्रभावित परिवारों के बच्चों के साथ निजी और सरकारी स्कूलों में किसी प्रकार का भेदभाव न हो.

शीर्ष अदालत ने पांच जुलाई को केंद्र सरकार को देश से कुष्ठ रोग का उन्मूलन सुनिश्चित करने के लिए व्यापक कार्य योजना पेश करने का निर्देश देते हुए कहा था कि इलाज योग्य बीमारी से लोगों को प्रभावित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती.

न्यायालय ने अधिवक्ता पंकज सिन्हा की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान ये निर्देश दिए. इस याचिका में आरोप लगाया गया था कि कुष्ठ रोग के उन्मूलन की दिशा में सरकार पर्याप्त कदम नहीं उठा रही है.

सिन्हा ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि हर साल देश में लगभग सवा लाख लोग कुष्ठ रोग से प्रभावित होते हैं. उन्होंने आरोप लगाया था कि 1981 से ही देश में इस बीमारी का मेडिकल इलाज उपलब्ध होने के बावजूद सरकार अभी तक इसे जड़ से खत्म करने में असफल रही है.

जनवरी महीने में सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों को कुष्ठ रोगियों के खिलाफ भेदभाव वाले कानूनों में सुधारात्मक/उपचारात्मक उपाय करने का निर्देश दिया था.

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ, 119 प्रावधानों को चुनौती देने वाली विधि की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह निर्देश जारी किया था, जो कुष्ठ रोगियों से भेदभाव करते हैं. यह याचिका विधि सेंटर ऑफ पॉलिसी द्वारा दायर किया था.

अप्रैल महीने में एक याचिका के सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि कुष्ठ रोगियों से भेदभाव करने वाले कानूनों को दूर करने के लिए एक विधेयक ला रही है.

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