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बड़े नेताओं की अध्यक्षता वाले सहकारी बैंकों में नोटबंदी के बाद जमा हुई सबसे अधिक राशि

नाबार्ड द्वारा एक आरटीआई में दी गई जानकारी के अनुसार नोटबंदी के दौरान 10 जिला सहकारी बैंकों में सबसे ज़्यादा नोट बदले गए, उनके अध्यक्ष भाजपा, कांग्रेस, शिवसेना और एनसीपी के नेता हैं.

A cashier counts currency notes inside a bank in the northern Indian city of Amritsar July 17, 2009. The Indian rupee pared most losses in afternoon trade on Friday as gains of more than 3 percent in the domestic equity market offset the demand for dollars from refiners and state-run firms. REUTERS/Munish Sharma (INDIA BUSINESS)

फोटो: रॉयटर्स

8 नवंबर 2016 को नोटबंदी की घोषणा के बाद देश  के 10 जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (डीसीसीबी) में सबसे अधिक प्रतिबंधित नोट जमा हुए थे, उनके शीर्ष पदों पर बड़े राजनीतिक दलों के नेता हैं. इन दलों में भाजपा, कांग्रेस, शिवसेना और एनसीपी शामिल हैं.

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (नाबार्ड) द्वारा एक आरटीआई के जवाब में यह जानकारी दी गयी है. इसके अनुसार देश के 370 डीसीसीबी में 10 नवंबर से 31 दिसंबर, 2016 के बीच 22,270 करोड़ रुपये की राशि के 500 और 1000 रुपये के नोट जमा हुए.

मालूम हो कि 8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 और 1000 के नोटों को बंद करने का फैसला लिया था और जनता को बैंकों में अपने पास जमा पुराने नोट बदलवाने के लिए 30 दिसंबर 2016 तक यानी 50 दिनों की मियाद दी गई थी.

हालांकि इस फैसले के 5 दिन बाद यानी 14 नवंबर 2016 को सरकार की ओर से यह निर्देश दिया गया कि किसी भी सहकारी बैंक में नोट नहीं बदले जाएंगे. ऐसी आशंका थी कि जमा काले धन को सफेद करने के लिए ऐसे बैंकों का दुरुपयोग हो सकता है.

इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के अनुसार कुल  370 सहकारी बैंकों में जमा हुई 22,270 करोड़ रुपये की राशि का 18.82 प्रतिशत यानी करीब 4,191.39 करोड़ रुपये इन 10 बैंको में जमा हुए, जिनके अध्यक्ष विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता हैं.

मिले हुए रिकॉर्डों के मुताबिक इनमें से 4 बैंक गुजरात, 4 महाराष्ट्र, 1 हिमाचल प्रदेश और 1 कर्नाटक के हैं.

इन बैंकों की सूची में सबसे ऊपर अहमदाबाद जिला सहकारी बैंक (एडीसीबी) है, जिसके निदेशक भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और अध्यक्ष भाजपा नेता अजयभाई एच पटेल हैं. इस बैंक में नोटबंदी के दौरान सर्वाधिक 745.59 करोड़ मूल्य के प्रतिबंधित नोट जमा किए गए.

दूसरे स्थान पर सबसे ज्यादा प्रतिबंधित नोट राजकोट जिला सहकारी बैंक में जमा हुए, जिसके चेयरमैन जयेशभाई विट्ठलभाई रदाड़िया हैं, जो गुजरात की विजय रूपाणी सरकार में कैबिनेट मिनिस्टर हैं. यहां 693.19 करोड़ मूल्य के पुराने नोट जमा हुए थे.

तीसरे स्थान पर पुणे जिला सहकारी बैंक है, जहां 551.62 करोड़ रुपये के पुराने नोट जमा हुए.  इसके अध्यक्ष एनसीपी के पूर्व विधायक रमेश थोराट हैं. कांग्रेस नेता अर्चना गारे इसकी उपाध्यक्ष हैं और एनसीपी प्रमुख शरद पवार के भतीजे अजीत पवार इसके निदेशकों में से एक हैं.

चौथे स्थान  पर हिमाचल प्रदेश का कांगड़ा सहकारी बैंक है, जहां के अध्यक्ष कांग्रेस नेता जगदीश सापेहिया थे. हालांकि उन्हें 9 महीने पहले ही पार्टी से बर्खास्त कर दिया गया है.  इस बैंक में 543.11 करोड़ रुपये के पुराने नोट बदले गए.

सूरत का जिला सहकारी बैंक, जिसके अध्यक्ष भाजपा नेता नरेशभाई भीखाभाई पटेल हैं, पांचवे स्थान पर रहा, जहां 369.85 करोड़ रुपये की राशि के पुराने नोट बदले गए.

छठे स्थान पर गुजरात का ही साबरकांठा जिला सहकारी बैंक रहा, जहां 328.5 करोड़ रुपये की राशि के पुराने नोट बदले गए. इसके अध्यक्ष भाजपा नेता महेशभाई अमीचंद भाई पटेल हैं.

कर्नाटक के कांग्रेस नेता एमएन राजेंद्र कुमार, जो पिछले लोकसभा चुनाव अभियान में पार्टी के जिला प्रभारी थे, साउथ केनरा जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष हैं. यह बैंक इस सूची में सातवें स्थान स्थान पर है. यहां 327.81 करोड़ रुपये के प्रतिबंधित नोट बदले गए थे.

आठवें स्थान पर नासिक जिला सहकारी बैंक है. शिवसेना नेता नरेंद्र दराड़े उस समय इसके अध्यक्ष थे. उन्होंने बीते साल नवंबर में यह कहते हुए कि रिज़र्व बैंक नोटबंदी के असर से ठीक से निबट पा रहा है, अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया था. इस बैंक में 319.68 करोड़ रुपये के पुराने नोट बदले गए.

नौंवे स्थान पर सतारा जिला सहकारी बैंक है, जहां 312.04 करोड़ रुपये के पुराने नोट बदले गए थे. इसके अध्यक्ष एनसीपी नेता छत्रपति शिवेंद्रसिंह राजे अभयसिंह राजे भोसले हैं.

दसवें स्थान पर सांगली जिला सहकारी बैंक रहा, जहां भाजपा नेता संग्रामसिंह संपतराव देशमुख उपाध्यक्ष हैं. इस बैंक ने 301.08 करोड़ रुपये के पुराने नोट बदले थे.

आरटीआई में नाबार्ड ने यह भी बताया कि उसने इन 370 बैंकों में पुराने नोट लौटाने वाले 31,15,964 ग्राहकों के प्रमाण पत्र वेरीफाई किए हैं.

इस आरटीआई में यह भी पता चला कि देश के विभिन्न राज्यों के जिन जिला सहकारी बैंकों में सबसे अधिक राशि बदली गयी, उनमें से अधिकतर बैंक उन दलों के नेताओं द्वारा चलाए जाते हैं, जो उस समय सत्ता में थे.

इस क्रम में तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, ओडिशा, केरल और पंजाब के जिला सहकारी बैंक शामिल हैं.

केरल में कसरगोड जिला सहकारी बैंक ने नोटबंदी के दौरान सर्वाधिक 293.58 करोड़ रुपये के पुराने नोट बदले. इस बैंक को राज्य की लेफ्ट सरकार द्वारा चलाया जाता है.

इसी तरह, तमिलनाडु में सबसे ज़्यादा 162.37 करोड़ रुपये धनराशि सलेम के जिला सहकारी बैंक में बदली गयी, जहां एआईएडीएमके नेता आर एलनगोवन अध्यक्ष हैं.

पश्चिम बंगाल के नदिया जिला सहकारी बैंक में सर्वाधिक 145.22 करोड़ रुपये की राशि के नोट बदले गए, जहां तृणमूल कांग्रेस के नेता शिबनाथ चौधरी अध्यक्ष हैं.

ओडिशा में सबसे ज़्यादा पुराने नोट बालासोर-भादरक जिला सहकारी बैंक द्वारा बदले गए, जिसके अध्यक्ष बीजद नेता रघुनाथ लेंका और उपाध्यक्ष बीजद की ही अनीता भूयां हैं.

मध्य प्रदेश के खरगौन जिला सहकारी बैंक ने 113.23 करोड़ रुपये के पुराने नोट बदले, जहां उस समय भाजपा नेता रणजीत डंडीर थे. छत्तीसगढ़ में रायपुर जिला सहकारी बैंक ने सर्वाधिक नोट बदले, जहां भाजपा नेता योगेश चंद्राकर अध्यक्ष हैं.

उत्तर प्रदेश में मेरठ जिला सहकारी बैंक सर्वाधिक 94.72 करोड़ रुपये के पुराने नोट बदलकर राज्य में पहले स्थान पर रहा, जहां उस समय सपा नेता जयवीर सिंह अध्यक्ष थे.

इसी तरह आंध्र प्रदेश में गुंटूर जिला सहकारी बैंक ने 83.23 करोड़ रुपये की सर्वाधिक राशि की पुरानी करेंसी बदली, जिसके अध्यक्ष तेदेपा नेता और पूर्व विधायक एम वेंकट सुब्बैया अध्यक्ष थे.

वहीं तेलंगाना में टीआरएस नेता एस पेंता रेड्डी की अध्यक्षता वाले हैदराबाद जिला सहकारी बैंक ने 79.16 करोड़ रुपये के पुराने नोट बदले, जो राज्य में सबसे अधिक रहे.

पंजाब में संगरूर जिला सहकारी बैंक 216.27 करोड़ रुपये की राशि के सबसे ज्यादा नोट बदले.

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