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एमपी में नहीं होगा एससी-एसटी एक्ट का दुरुपयोग, बिना जांच के नहीं होगी गिरफ़्तारी: शिवराज

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को इस एक्ट के विरोध का सामना करना पड़ रहा है. हाल ही में सतना में उन्हें काले झंडे दिखाए गए थे. वहीं उज्जैन के पास महिदपुर में मुख्यमंत्री के काफिले पर पथराव किया गया था.

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (फोटो साभार: फेसबुक/शिवराज सिंह चौहान)

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (फोटो साभार: फेसबुक/शिवराज सिंह चौहान)

भोपाल: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि एससी-एसटी कानून का दुरुपयोग नहीं होगा और इसके तहत बिना जांच के गिरफ्तारी नहीं होगी.

चौहान ने ट्वीट कर लिखा, ‘एमपी में नहीं होगा एससी-एसटी एक्ट का दुरुपयोग, बिना जांच के नहीं होगी गिरफ़्तारी.’

एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ के मुताबिक शिवराज सिंह चौहान ने यही बात अपने बालाघाट के दौरे पर भी कही थी. राज्य में चौहान को इस एक्ट के विरोध का सामना करना पड़ रहा है. हाल ही में सतना में उन्हें काले झंडे दिखाए गए थे.

वहीं महिदपुर में मुख्यमंत्री के काफिले पर पथराव किया गया था. हालांकि शिवराज के इस बयान पर किसी विपक्षी पार्टी ने अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के ख़िलाफ़ केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक) क़ानून (एससी/एसटी क़ानून) में संशोधन किया था.

इसे लेकर कुछ दिन पहले सवर्ण संगठनों ने एक दिवसीय ‘भारत बंद’ का आयोजन किया था. राज्य में पूर्व विधायक लक्ष्मण तिवारी ने मोदी सरकार के इस क़दम के विरोध में भाजपा से इस्तीफा दे दिया था.

तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलटे जाने की आलोचना करते हुए कहा कि मात्र आरोप के आधार पर लोगों को बिना जांच के महीनों जेल में भेजना अत्याचार है.

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‘भारत बंद’ के दौरान मध्य प्रदेश के सभी पेट्रोल पम्प मालिकों ने अपने प्रतिष्ठान बंद रखे थे.

छिंदवाड़ा, कटनी, विदिशा, सीहोर, देवास, इंदौर, ग्वालियर, झाबुआ, छतरपुर, मंदसौर, सागर, उज्जैन एवं अन्य शहरों से मिली रिपोर्ट के अनुसार बंद का असर तकरीबन समूचे मध्य प्रदेश में था.

बता दें कि इसी साल 20 मार्च को सुप्रीम कोर्ट की एके गोयल और यूयू ललित की पीठ ने फैसला दिया था कि एससी-एसटी के तहत कथित उत्पीड़न की शिकायत को लेकर तुरंत गिरफ्तारी नहीं होगी और प्रारंभिक जांच के बाद ही कार्रवाई की जाएगी.

इस फैसले से नाराज लोगों ने देश भर में भारी विरोध प्रदर्शन किया था और दो अप्रैल को भारत बंद का आह्वान किया गया था. भारत बंद के दौरान हुई हिंसा में 11 लोगों की मौत हो गई थी और सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार किया गया था.

इसके बाद बढ़ते विरोध के चलते केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने संसद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के ख़िलाफ़ अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक) क़ानून में संशोधन विधेयक लेकर आई, जिसे ध्वनिमत से पारित किया गया था.

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