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राजस्थान की वसुंधरा राजे सरकार मंत्रों से करेगी कैंसर, ब्लड प्रेशर व डिप्रेशन का इलाज

विशेष रिपोर्ट: सरकार ने इसके लिए जयपुर के जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय में 22 करोड़ रुपये की लागत से मंत्र प्रतिष्ठान की स्थापना की है.

जयपुर स्थित जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय. (फोटो: अवधेश आकोदिया/द वायर)

जयपुर स्थित जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय. (फोटो: अवधेश आकोदिया/द वायर)

यदि कोई कैंसर, ब्लड प्रेशर, डिप्रेशन सरीखी किसी बीमारी से पीड़ित हो जाए तो उसे अस्पताल जाना चाहिए या मंत्र सुनने? जाहिर तौर पर बीमार व्यक्ति को अस्पताल में डॉक्टर से अपना इलाज करवाना चाहिए, लेकिन राजस्थान की वसुंधरा सरकार ने ऐसे लोगों के लिए नया ठिकाना तैयार किया है जहां संस्कृत के मंत्रों से उपचार का दावा किया जा रहा है.

राजे सरकार ने जयपुर के जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय में 22 करोड़ रुपये की लागत से ‘राजस्थान मंत्र प्रतिष्ठान’ की स्थापना की है. बीते 24 सितंबर को मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर व राज्य की संस्कृत शिक्षा मंत्री किरण माहेश्वरी ने इसका उद्घाटन किया.

प्रतिष्ठान के कार्यवाहक निदेशक डॉ. नारायण होसमने के मुताबिक इसमें मंत्र चिकित्सा पद्धति से कई बीमारियों को इलाज किया जाएगा. वे कहते हैं, ‘सदियों से वेद मंत्रों को पढ़ने की विशेष प्रक्रिया है. वेदों के मंत्र विभिन्न छंदों में सुंदर तरीके से संजोए हुए हैं. इन मंत्रों पर वैज्ञानिक काम होने की जरूरत है. प्रतिष्ठान में डिप्रेशन और ब्लडप्रेशर जैसी बीमारियों के साथ ही कैंसर जैसे गंभीर रोगों का इलाज मंत्र चिकित्सा पद्धति से किया जाएगा.’

वे आगे कहते हैं, ‘ध्वनि विज्ञान ने मंत्रों की शक्ति को माना है. मंत्र प्रतिष्ठान में रिसर्च के द्वारा मंत्रों का जनकल्याण के लिए उपयोग खोजा जाएगा. इसके अंतर्गत तंत्र, मंत्र व यंत्र विद्या का आधुनिक संदर्भों में प्रयोग किया जाएगा ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को इसका फायदा हो. प्रतिष्ठान में वेद, उपनिषद, स्मृति, रामायण, महाभारत और गीता समेत पुराणों पर गहरा अनुसंधान किया जाएगा.’

संस्कृत शिक्षा मंत्री किरण माहेश्वरी प्रतिष्ठान के कार्यवाहक निदेशक डॉ. होसमने की बातों की पुष्टि करती हैं. वे कहती हैं, ‘मंत्रों में बहुत शक्ति है. विज्ञान भी इसे मान चुका है. मैं खुद पिछले साल दिसंबर में संस्कृत विश्वविद्यालय गई थी. वहां मुझे मंत्रों से अग्नि प्रज्ज्वलित करके दिखाई गई, जिसे देखकर मैं हैरान रह गई. मंत्र चिकित्सा पद्धति से बीमारियों का इलाज संभव है, जिसका प्रयोग प्रतिष्ठान में किया जाएगा.’

वसुंधरा सरकार की इलाज की इस अजीब तरकीब से डॉक्टर सहमत नहीं हैं. जयपुर के सवाई मान सिंह अस्पताल के अधीक्षक रहे डॉ. नरपत सिंह शेखावत कहते हैं, ‘मंत्रों से बीमार आदमी के इलाज का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है. बीमारी दवाई लेने से ठीक होती है न कि मंत्र सुनने से. मंत्रों से बीमारी कैसे ठीक होगी, यह मेरे लिए कौतुहल का विषय है.’

राजस्थान मंत्र प्रतिष्ठान की बिल्डिंग. (फोटो: अवधेश आकोदिया/द वायर)

राजस्थान मंत्र प्रतिष्ठान की बिल्डिंग. (फोटो: अवधेश आकोदिया/द वायर)

इसी अस्पताल के पूर्व अधीक्षक डॉ. वीरेंद्र सिंह को भी इलाज की इस तरीके पर भरोसा नहीं है. वे कहते हैं, ‘मनोवैज्ञानिक बीमारियों में तो मंत्र जैसी चीजें फिर भी फायदेमंद हो सकती हैं, लेकिन आॅर्गेनिक बीमारियों में यह पूरी तरह से बेअसर साबित होगी. इस प्रकार से सीधे इलाज का दावा करने की बजाय रिसर्च ट्रायल करना चाहिए ताकि हम भी देखें मंत्रों से कैसे बीमारी ठीक होती है.’

लेकिन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय, जोधपुर के पूर्व कुलपति प्रो. बनवारी लाल गौड़ मंत्र चिकित्सा पद्धति को कारगर मानते हैं. वे कहते हैं, ‘चिकित्सा के अनेक प्राचीन ग्रंथ हैं. एक ग्रंथ है सुश्रुत संहिता. इसमें मनुष्य की आंतों में अर्बुद रोग (कैंसर) के कारण उत्पन्न हानिकर तंतुओं को शल्य क्रिया से हटाने का ब्योरा है, साथ ही ज्वर, अवसाद व अच्छी संतान पाने के लिए मंत्र चिकित्सा का भी उल्लेख है. ऐसे में मंत्र प्रतिष्ठान की शुरुआत ऐतिहासिक घटना है.’

धर्मशास्त्र के ज्ञाता शास्त्री कोसलेंद्रदास मंत्र चिकित्सा पद्धति को सही मानते हैं. वे कहते हैं, ‘वैज्ञानिक रूप से सिद्ध है कि संस्कृत में लिखे मंत्र पढ़ने और बोलने से न केवल उच्चारण में शुद्धता आती है, बल्कि याददाश्त भी बढ़ती है. अवसाद, मनोरोग व स्नायुतंत्र के रोगों में मंत्रों को सुनने से बहुत लाभ होता है. मंत्र चिकित्सा पद्धति वैदिक काल से चली आ रही है. यदि इस पर वैज्ञानिक विधि से शोध किया जाए तो इससे गंभीर बीमारियों का निदान संभव है.’

हालांकि वसुंधरा सरकार की ओर से शुरू किए गए मंत्र प्रतिष्ठान में कितना रिसर्च होगा, इस पर संशय है. 22 करोड़ रुपये की लागत से तैयार प्रतिष्ठान की बिल्डिंग व ओपेन थियेटर का सरकार ने उद्घाटन तो कर दिया है, लेकिन फिलहाल यहां रिसर्च करने के लिए न तो कोई शिक्षक है और न ही छात्र. विश्वविद्यालय ने वेद विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नारायण होसमने को इसका कार्यवाहक निदेशक बनाया है.

अलबत्ता विश्वविद्यालय तीन बार शिक्षकों के भर्ती के लिए विज्ञापन जारी कर चुका है, लेकिन आज तक नियुक्ति नहीं हुई है. भर्ती का आखिरी विज्ञापन दिसंबर, 2017 में निकला था, जिस पर धांधली की शिकायत होने के बाद राज्यपाल कल्याण सिंह ने रोक लगा दी.

गौरतलब है कि मंत्र प्रतिष्ठान की स्थापना की योजना दस साल पहले तब बनी थी. तब वसुंधरा राजे ने बतौर मुख्यमंत्री अपने पिछले कार्यकाल के 2007-08 के बजट में इसे स्थापित करने की घोषणा की. भाजपा से बगावत कर नई राजनैतिक पार्टी बना चुके विधायक घनश्याम तिवाड़ी ने इसका खाका तैयार किया था. वे तब वसुंधरा सरकार के शिक्षा मंत्री थे.

उस समय मंत्र प्रतिष्ठान का काम शुरू होता उससे पहले ही वसुंधरा सरकार की विदाई हो गई. 2013 में वसुंधरा राजे के पुन: सत्ता में आने के बाद इस पर फिर से काम शुरू हुआ. उन्होंने 2015-16 में संस्कृत विश्वविद्यालय में मंत्र प्रतिष्ठान की स्थापना के लिए 23 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट दिया.

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं और जयपुर में रहते हैं.)

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