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आंबेडकर केवल 10 साल के लिए आरक्षण चाहते थे: सुमित्रा महाजन

रांची में एक कार्यक्रम के दौरान लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने सवाल उठाया कि क्या शिक्षा और नौकरियों में हमेशा के लिए आरक्षण दे देने से देश में समृद्धि आ जाएगी.

लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन. (फोटो: पीटीआई)

लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन. (फोटो: पीटीआई)

रांची: लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने बीते रविवार को हुए एक कार्यक्रम में सवाल उठाया है कि क्या शिक्षा और नौकरियों में हमेशा के लिए आरक्षण देने से देश में समृद्धि आ जाएगी? उन्होंने कहा, ‘डॉ. भीमराव आंबेडकर भी केवल 10 साल के लिए आरक्षण चाहते थे.’

झारखंड की राजधानी रांची में आयोजित चार दिवसीय लोकमंथन कार्यक्रम के आख़िरी दिन रविवार को महाजन ने कहा कि आंबेडकर ने ख़ुद कहा था कि आरक्षण की ज़रूरत केवल 10 सालों के लिए है. उन्होंने 10 सालों के भीतर समतामूलक समाज की कल्पना की थी. उन्होंने वास्तविक रूप से सामाजिक समरसता की कल्पना की थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका.

उन्होंने कहा कि हम सामूहिक चिंतन नहीं कर पाए. इसमें संसद में बैठने वाले हम लोग आगे हैं. हम हमारी कमज़ोरियों को छिपाने के लिए हर 10 साल के बाद इसे अगले 10 वर्षों के लिए बढ़ा देते हैं.

महाजन ने यह सवाल भी उठाया कि क्या केवल आरक्षण दे देने से देश का उद्धार हो सकेगा? सबको साथ लेकर चलने की बात कहां गई? उन्होंने यह भी कहा कि वे आरक्षण विरोधी नहीं हैं लेकिन सामाजिक संरचना पर आत्मचिंतन करने की ज़रूरत है.

बीते दिनों एससी/एसटी क़ानून में संशोधन के बाद उपजे विवाद पर लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने इसे दलितों के हाथ में दिया गया चॉकलेट बता दिया था. उन्होंने कहा, ‘मान लीजिए कि अगर मैंने अपने बेटे के हाथ में बड़ी चॉकलेट दे दी और मुझे बाद में लगा कि एक बार में इतनी बड़ी चॉकलेट खाना उसके लिए अच्छा नहीं होगा. अब आप बच्चे के हाथ से वह चॉकलेट जबर्दस्ती लेना चाहें, तो आप इसे नहीं ले सकते. ऐसा किए जाने पर वह गुस्सा करेगा और रोएगा. मगर दो-तीन समझदार लोग बच्चे को समझा-बुझाकर उससे चॉकलेट ले सकते हैं.’

इस मौके पर झारखंड के मुख्यमंत्री रघुबर दास ने वामपंथी झुकाव वाले इतिहासकारों पर विदेश में देश की नकारात्मक छवि पेश करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, ‘हमारे लिए सभी धर्म समान हैं. आज देश और समाज को तोड़ने वाली ताकतें सक्रिय हैं. सरल स्वभाव आदिवासियों का धर्म परिवर्तन किया गया. लेकिन, हमारी सरकार ने धर्म परिवर्तन विरोधी कानून बनाया है.’

कार्यक्रम में सुमित्रा महाजन ने आगे कहा कि बतौर भारतीय, व्यक्ति को देश के बारे में सोचना चाहिए और इस पर विचार करना चाहिए कि कैसे उसकी संस्कृति और सभ्यता को आगे ले जाया जा सकता है.

उन्होंने कहा कि दुनिया भारतीय संस्कृति को सम्मान की नज़र से देखती है, ‘लेकिन क्या हम इस ओर देख रहे हैं कि यह आत्मनिरीक्षण का मामला है.’

उन्होंने प्रदर्शनकारियों द्वारा सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाए जाने पर अफसोस प्रकट किया कहा, ‘वे ऐसा कर करदाताओं के पैसे की बर्बादी करते हैं, इस विषय पर ‘राष्ट्रभावना होनी चाहिए.’

महाजन ने उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू द्वारा लोकमंथन के उद्घाटन के मौके पर दिए गए भाषण का हवाला दिया जिन्होंने कहा था कि राष्ट्र सबसे पहले आना चाहिए.

उन्होंने कहा, ‘लोगों को जन गण और मन (लोग, समाज और मस्तिष्क) के बारे में सोचना चाहिए. लोगों को देश के इतिहास और साहित्य के बारे में जानना चाहिए.’ महिलाओं के विषय में उन्होंने कहा, ‘महिलाओं के सम्मान का बड़ा महत्व है. महिलाएं समाज का महत्वपूर्ण हिस्सा है और उनके बगैर समाज आगे नहीं बढ़ेगा.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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