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जावड़ेकर की अपील, विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोह में भारतीय पोशाक पहनें छात्र-छात्राएं

मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि नरेंद्र मोदी की पहल से पिछले चार साल में खादी की बिक्री तीन-चार गुना बढ़ गई है और खादी से लाखों नए रोज़गार भी पैदा हुए.

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर (फोटो: पीटीआई)

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने मंगलवार को देशभर के विश्वविद्यालयों से अपील की कि महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि के तौर पर दीक्षांत समारोहों में ‘ब्रिटिश प्रेरित’ पोशाकों के बजाय परंपरागत भारतीय परिधान पहनें.

गांधी जयंती पर जावड़ेकर ने कहा कि गांधी ने खादी की वकालत की थी और कहा कि विश्वविद्यालय अपने छात्र-छात्राओं से कहें कि परंपरागत दीक्षांत पोशाकों में खादी के विभिन्न डिजाइन को तरजीह दें.

जावड़ेकर ने विश्वविद्यालयों को वीडियो संदेश में कहा, ‘महात्मा गांधी की 150वीं जयंती का समारोह इस दो अक्टूबर से शुरू होगा और अगले साल के दो अक्टूबर तक ये चलेगा. ये देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. गांधी जी की विरासत है. गांधी जी ने देश के समूचे विषयों पर अपना मार्गदर्शन किया. आज भी उनकी दी गई शिक्षा निश्चित रूप से वंदनीय है. ख़ासकर स्वच्छता के बारे में उन्होंने आस्था जताई थी. खादी के बारे में जताई थी.’

उन्होंने कहा, ‘नरेंद्र मोदी की पहल से चार साल में खादी की बिक्री अब तीन-चार गुना बढ़ गई है और खादी से लाखों नए रोज़गार भी पैदा हो गए, ये सच्चाई है. स्वच्छता एक जन आंदोलन बन गया है. इस जन आंदोलन को हम और मज़बूत करेंगे. इसमें कॉलेज और छात्र यहीं मुख्य मुद्दा है, क्योंकि नई पीढ़ी पर अगर स्वच्छता के नए संस्कार होते हैं तो नई पीढ़ी आगे चलकर देश का और मज़बूत बनाएगी. इसलिए स्वच्छता के सारे पहल पर काम करना, ये हमारा लक्ष्य होना चाहिए. मुझे लगता है कि गांधी जी को यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी.’

जावड़ेकर ने कहा, ‘मैं अपील करता हूं कि भारतीय विश्वविद्यालय अपने दीक्षांत समारोह में ब्रिटिश प्रेरित कपड़ों के बजाय परंपरागत भारतीय कपड़े पहनें. विश्वविद्यालय अपने छात्र-छात्राओं से कह सकते हैं कि डिजाइन विकल्पों के साथ आएं या एचआरडी मंत्रालय की वेबसाइट पर दिए गए कुछ डिज़ाइन को अपना सकते हैं.’

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने विश्वविद्यालयों से कहा था कि दीक्षांत जैसे विशेष अवसरों पर हैंडलूम कपड़े के प्रयोग पर विश्वविद्यालय विचार करें. इसके बाद कई उच्च शैक्षणिक संस्थानों ने दीक्षांत समारोहों में परंपरागत वस्त्र की शुरुआत की थी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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