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विवेक तिवारी हत्याकांड के पीछे पुलिसकर्मियों में पेशेवर प्रशिक्षण की कमी भी ज़िम्मेदार: डीजीपी

डीजीपी ने कहा कि सिपाहियों के लिए ‘रीफ्रेशर कोर्स’ चलाया जाएगा. पिछले हफ्ते लखनऊ में कथित तौर पर गाड़ी न रोकने की वजह से एप्पल कंपनी के एरिया मैनेजर विवेक तिवारी को उत्तर प्रदेश पुलिस के कॉन्स्टेबल प्रशांत चौधरी ने गोली मार दी थी.

उत्तर प्रदेश के डीजीपी ओम प्रकाश सिंह और विवेक तिवारी. (फोटो साभार: uttarpradesh.org/फेसबुक)

उत्तर प्रदेश के डीजीपी ओम प्रकाश सिंह और विवेक तिवारी. (फोटो साभार: uttarpradesh.org/फेसबुक)

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ओम प्रकाश सिंह ने लखनऊ में एक कॉन्स्टेबल द्वारा एक बहुराष्ट्रीय कंपनी के अधिकारी की गोली मारकर हत्या किए जाने के लिए पेशेवर प्रशिक्षण की कमी को ज़िम्मेदार बताते हुए गुरुवार को कहा कि सूबे के सिपाहियों के लिए ‘रीफ्रेशर कोर्स’ चलाने का निर्णय लिया गया है.

सिंह ने कहा, ‘बीते शनिवार को लखनऊ के गोमतीनगर में ‘एप्पल’ कंपनी के अधिकारी विवेक तिवारी की हत्या के आरोपी दोनों पुलिसकर्मी राज्य पुलिस के कोई ब्रांड एम्बेसडर नहीं हैं. हम ‘ट्रिगर हैप्पी’ नहीं बल्कि लोगों के मित्र हैं.’

‘ट्रिगर हैप्पी’ से आशय मामूली उकसावे पर भी हिंसक प्रतिक्रिया करने और गोली चलाने से है.

उन्होंने विवेक तिवारी हत्याकांड का ज़िक्र करते हुए कहा, ‘किसी निहत्थे को गोली मारने का क्या औचित्य है? आरोपी सिपाहियों प्रशांत चौधरी और संदीप कुमार को गिरफ्तार और बर्खास्त किया जा चुका है. पुलिस बल में शामिल कुछ लोगों की ऐसी हरकत से पूरे महकमे की कार्य संस्कृति का अंदाज़ा नहीं लगाया जाना चाहिए.’

डीजीपी ने ऐसी घटनाओं के लिए पेशेवर प्रशिक्षण की कमी को ज़िम्मेदार क़रार देते हुए कहा कि 2013 से 2017 के बीच भर्ती किए गए सिपाहियों के लिये रीफ्रेशर कोर्स चलाने का निर्णय लिया गया है.

उन्होंने बताया कि रीफ्रेशर कोर्स आठ अक्टूबर को लखनऊ में शुरू होगा और इसे पूरे प्रदेश में चलाया जायेगा. इसमें सेवारत तथा सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी सिपाहियों से बात कर उनकी काउंसलिंग करेंगे. हमारी कोशिश होगी कि सिपाहियों को जनता के प्रति अपना व्यवहार ठीक करने का प्रशिक्षण दिया जाए.

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्ष में पुलिसकर्मियों को उचित प्रशिक्षण नहीं दिया गया. यह उस समय की सरकार की नाकामी थी. उस दौरान पुलिसकर्मियों को दिया गया प्रशिक्षण पेशेवर नहीं था और उनमें आम लोगों से कैसे बर्ताव करना चाहिए, इस पक्ष पर कोई ध्यान नहीं दिया गया.

सिंह ने कहा कि वर्ष 2013 में भर्ती सिपाहियों को तीन चरण में प्रशिक्षण दिया गया था. पहले चरण में 20,166, दूसरे चरण में 15,814 और तीसरे चरण में 3,798 सिपाहियों को प्रशिक्षित किया गया.

विवेक तिवारी हत्याकांड के आरोपी सिपाहियों की मदद के लिए साथी पुलिसकर्मियों द्वारा सोशल मीडिया पर अभियान चलाने और चंदा एकत्र किए जाने की ख़बरों के बारे में पूछे जाने पर डीजीपी ने कहा कि हमने अपने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे सोशल मीडिया पर पैनी नज़र रखें. अफसरों से कहा गया है कि वे सिपाहियों को घटना की वास्तविकता से अवगत कराएं.

पिछले शनिवार को कथित रूप से गाड़ी नहीं रोकने पर कॉन्स्टेबल प्रशांत चौधरी ने एप्पल कंपनी के एरिया मैनेजर विवेक तिवारी की गोली मारकर हत्या कर दी थी.

घटना शुक्रवार 26 सितंबर की देर रात तकरीबन डेढ़ से दो बजे के बीच लखनऊ के गोमती नगर इलाके की है. विवेक तिवारी अपनी एक महिला साथी के साथ एसयूवी चला रहे थे. पुलिस का कहना है कि चेकिंग के दौरान उन्होंने गाड़ी रोकने के लिए कहा, लेकिन विवेक ने गाड़ी नहीं रोकी. इसकी वजह से पुलिस ने आत्मरक्षा में गोली चलाई.

मालूम हो कि पहले ही एनकांउटर के आरोपों से घिरी उत्तर प्रदेश पुलिस इस घटना के बाद से कड़ी आलोचना का सामना कर रही है.

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