नॉर्थ ईस्ट

नॉर्थ ईस्ट डायरी: भाजपा मिज़ोरम चुनाव प्रभारी ने कहा, ईसाइयों के लिए कभी ख़तरा नहीं रही पार्टी

इस हफ्ते नॉर्थ ईस्ट डायरी में मिज़ोरम, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा, मेघालय और सिक्किम के प्रमुख समाचार.

हिमंता बिस्व शर्मा. (फोटो साभार: फेसबुक/Himanta Biswa Sarma)

हिमंता बिस्व शर्मा. (फोटो साभार: फेसबुक/Himanta Biswa Sarma)

आइजोल: भाजपा के मिज़ोरम चुनाव प्रभारी हिमंत बिस्व शर्मा ने कहा है कि भगवा पार्टी ईसाई समुदाय के लिए कभी ख़तरा नहीं रही है और ऐसा भविष्य में भी कभी नहीं होगा.

शर्मा ने 18 अक्टूबर की शाम आइजोल में भाजपा कार्यालय ‘अटल भवन’ में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि पूर्वोत्तर के भाजपा शासित राज्यों में सभी धार्मिक समुदायों के लोग शांतिपूर्वक रहते हैं.

उन्होंने कहा, ‘भगवा पार्टी ईसाइयों के लिए कभी ख़तरा नहीं रही है और ऐसा भविष्य में भी कभी नहीं होगा.’

मिज़ोरम के अगला क्रिसमस भाजपा की सरकार के तहत मनाने संबंधी पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के बयान के बाद शर्मा ने यह बयान दिया है.

मिज़ोरम में 40 सदस्यीय विधानसभा के लिए 28 नवंबर को चुनाव होने वाला है. शाह ने यह बात भी स्पष्ट कर दी थी कि भाजपा राज्य में अपने बलबूते चुनाव लड़ेगी.

चुनाव परिणाम की घोषणा 11 दिसंबर को अन्य चार राज्यों के चुनाव परिणामों के साथ की जाएगी.

मालूम हो कि हिमंत बिस्व शर्मा असम के वित्त मंत्री और पूर्वोत्तर लोकतांत्रिक गठबंधन (एनईडीए- नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस) के संयोजक हैं. एनईडीएम साल 2016 में भाजपा और पूर्वोत्तर के क्षेत्रीय दलों का गठबंधन है.

भाजपा ने 2016 में एनईडीए नाम का राजनीतिक गठबंधन किया था. इसमें नगा पीपल्स फ्रंट, सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट, पीपल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल, असम गण परिषद और बोडोलैंड पीपल्स फ्रंट शामिल थे.

बीते 17 अक्टूबर को आइजोल में बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा था, ‘बड़ी संख्या में आप लोगों को यहां देखने के बाद मैं यह सुनिश्चित करना चाहता हूं कि मिज़ोरम में अगला क्रिसमस भाजपा की सरकार के शासन में मनाया जाएगा.’

उन्होंने कहा था कि वह नगालैंड और मेघालय में सहयोग देने के लिए ईसाई समुदाय के भाइयो और बहनों को धन्यवाद देना चाहते हैं.

शाह ने यह बयान ईसाई बहुल मिज़ोरम में चुनाव से पहले भाजपा की ईसाई विरोधी छवि को ठीक करने के उद्देश्य से दिया था.

शाह ने मिज़ोरम की कांग्रेस सरकार को ‘भ्रष्ट’ बताते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार राज्य के लोगों को अपनी सेवाएं देने में विफल रही. उन्होंने मुख्यमंत्री लाल थनहवला पर ‘भ्रष्ट सरकार और वंशवादी शासन’ चलाने का आरोप लगाया.

उन्होंने दावा किया कि थनहवला अपने छोटे बेटे लाल थंजारा, जो अभी राज्य के स्वास्थ्य मंत्री हैं, को अगला मुख्यमंत्री बनाने की कोशिश कर रहे हैं.

अमित शाह की तरह ही हिमंत बिस्व शर्मा ने भी राज्य में भाजपा की सरकार आने की आशा जताई. शर्मा ने कांग्रेस पर राजनीतिक लाभ के लिए धार्मिक भावनाओं के इस्तेमाल का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि इसके इतर भाजपा सभी धार्मिक समुदायों के बीच शांतिपूर्ण सौहार्द्र, प्यार और भाईचारा चाहती है.

उन्होंने कहा, ‘भाजपा राज्य में अपने दम पर चुनाव लड़ेगी और उसे जीत की उम्मीद है क्योंकि मिज़ो समुदाय के लोग अच्छी सरकार और अच्छा शासन पाने हक़दार हैं.’ उन्होंने कहा कि सिर्फ़ भाजपा ही ऐसी पार्टी है जो अच्छा शासन और विकास दे सकती है.

मिज़ोरम: पूर्व मंत्री बुद्ध धन चकमा ने कांग्रेस छोड़ी

आइजोल: मिज़ोरम के पूर्व मंत्री बुद्ध धन चकमा ने बीते 16 अक्टूबर को कांग्रेस छोड़ दी. वह भाजपा में शामिल होंगे.

प्रदेश विधानसभा में अपने विधायक पद से इस्तीफ़ा देने के बाद चकमा ने आइजोल में पार्टी पदाधिकारियों को मिज़ोरम प्रदेश कांग्रेस समिति (एमपीसीसी) की प्राथमिक सदस्यता से अपना इस्तीफा सौंप दिया.

एमपीसीसी की सदस्यता से इस्तीफे का पत्र एमपीसीसी के अध्यक्ष लल थनहवला को संबोधित था जो मुख्यमंत्री भी हैं.

विधानसभा सचिव एसआर झोखुमा ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष हेफेई ने चकमा का सदन से इस्तीफा मंज़ूर कर लिया है.

चकमा के पार्टी में शामिल होने पुष्टि भाजपा की मिज़ोरम इकाई के अध्यक्ष प्रोफेसर जॉन वी. हलुना ने की है.

उन्होंने बताया कि भाजपा चकमा को विधानसभा चुनाव में तुईचवांग सीट से अपना उम्मीदवार बना सकती है.

चकमा के इस्तीफे के साथ हाल में कांग्रेस से इस्तीफा देने वाले विधायकों की संख्या तीन हो गई है.

मौजूदा विधानसभा में विधायकों की संख्या घटकर 37 हो गई है. सत्तारूढ़ कांग्रेस के विधायकों की संख्या 31 जबकि विपक्षी एमएनएफ के विधायकों की संख्या छह है.

मिज़ोरम: स्वायत्त इलाकों में उम्मीदवारों के चयन में कांग्रेस के सामने समस्या

मिज़ोरम के मुख्यमंत्री और मिज़ोरम कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष लल थनहवला. फोटो साभार: (फेसबुक/Lal Thanhawla)

मिज़ोरम के मुख्यमंत्री और मिज़ोरम कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष लल थनहवला. फोटो साभार: (फेसबुक/Lal Thanhawla)

आइजोल: मिज़ोरम में सत्तारूढ़ कांग्रेस को 28 नवंबर को होने वाले 40 सदस्यीय विधानसभा चुनाव के लिए स्वायत्त परिषद इलाकों में उम्मीदवारों के चयन में समस्या आ रही है. पार्टी सूत्रों ने यह जानकारी दी.

मिज़ोरम के मुख्यमंत्री लल थनहवला ने पिछले दिनों 36 उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की थी. लल थनहवला मिज़ोरम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एमपीसीसी) के अध्यक्ष भी हैं. हालांकि तीन स्वायत्त ज़िलों के अंदर नामों को लेकर फैसला संबंधित ज़िला समितियों पर छोड़ा गया है जिनमें सिर्फ लाई स्वायत्त ज़िला कांग्रेस कमेटी ने दो नाम पेश किए हैं.

सूत्रों ने बताया कि मारा स्वायत्त ज़िला परिषद (एमएडीसी) में कांग्रेस उम्मीदवार के चयन को लेकर बदलाव दिख रहा है क्योंकि परिषद के अधिकतर सदस्य विधानसभा अध्यक्ष हिफेई (82) के बजाय दूसरे व्यक्ति के समर्थन में हैं. हिफेई के नाम की सिफारिश परिषद समिति के नामांकन बोर्ड ने की थी.

प्रदेश पीसीसी प्रमुख को दिए गए पत्र में ज़िला परिषद के सदस्यों ने बताया कि पलक विधानसभा क्षेत्र के अंदर परिषद के 11 सदस्यों को उम्मीदवारों पर अपनी सिफारिश देने को कहा गया था, जिसमें छह सदस्यों ने सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी के. रियाछो का समर्थन किया जबकि हिफेई को सिर्फ तीन सदस्यों का समर्थन हासिल है. दो अन्य सदस्यों ने अपना समर्थन किसी और को दिया है.

बहरहाल रियाछो के समर्थकों ने लल थनहवला को दिए गए प्रतिवेदन में मारा स्वायत्त ज़िला परिषद समिति (एमएडीसीसी) नामांकन बोर्ड के फैसले पर निराशा जतायी और उसकी सिफारिशों को अमल नहीं करने को कहा.

बीते 13 अक्टूबर को सियाहा शहर में मुख्य कार्यकारी सदस्य एन. जखाई के आधिकारिक आवास पर आयोजित कांग्रेस विधायक दल की बैठक में यह फैसला किया गया कि एमएडीसीसी नामांकन बोर्ड का फैसला अंतिम होना चाहिए और एमपीसीसी प्रमुख लल थनहवला को इसकी सिफारिशों के आधार पर फैसला करना चाहिए.

मिज़ोरम: पांच विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी राकांपा

आइजोल: राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) आगामी मिज़ोरम विधानसभा चुनाव में राज्य की कुल 40 सीटों में से पांच पर चुनाव लड़ेगी. राज्य में 28 नवंबर को चुनाव होने हैं.

एनसीपी मिज़ोरम राज्य इकाई के अध्यक्ष लालम्पुइया छांगटे ने बीते 18 अक्टूबर को पत्रकारों को बताया कि पार्टी हछेक, डंपा, ममित, आइजोल पूर्वी-1 और आइजोल पश्चिमी-1 विधानसभा सीट पर चुनाव लड़ना चाहती है.

एनसीपी मुख्यालय से इन सीटों पर उम्मीदवारों के नामों की मंज़ूरी लेने छांगटे सोमवार को दिल्ली जाएंगे, जिसके बाद उन नामों की घोषणा की जाएगी.

छांगटे ने बताया कि एनसीपी के पास कम-से-कम हछेक और ममित सीट जीतने का मौका है क्योंकि इन सीटों पर पार्टी का पिछला प्रदर्शन अच्छा रहा था.

एनसीपी ने 2003 से मिज़ोरम में चुनाव लड़ना शुरू किया था.

अरुणाचल प्रदेश: सियांग नदी के किनारे रह रहे लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया

चीन की सियांग नदी अरुणाचल प्रदेश में आकर ब्रह्मपुत्र नदी कहलाती है. (फोटो साभार: यूट्यूब)

चीन की सियांग नदी अरुणाचल प्रदेश में आकर ब्रह्मपुत्र नदी कहलाती है. (फोटो साभार: यूट्यूब)

ईटानगर: अरुणाचल प्रदेश में सियांग नदी के किनारे रह रहे लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया है. चीन द्वारा भारत को तिब्बत में एक कृत्रिम झील बनने से संभावित रूप से बाढ़ आने के बारे में सूचित किए जाने के बाद यह क़दम उठाया गया. अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी.

जल संसाधन विभाग के अधीक्षण अभियंता (मुख्यालय) गौतम बोरांग ने कहा कि पानी अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी सियांग ज़िले के पासीघाटी में 20 अक्टूबर की सुबह करीब साढ़े सात बजे पहुंचा.

उन्होंने फोन पर बताया कि सुबह 11 बजे पानी का प्रवाह नियंत्रण में था और ख़तरे के निशान से नीचे था.

अधिकारियों ने बताया कि पूर्वी सियांग ज़िले के उपायुक्त डी. कामदुक और जल संसाधन विभाग के अधिकारी सियांग नदी में पानी के प्रवाह पर लगातार नज़र रख रहे हैं. वहीं राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनईआरएफ) की टीम पहुंच चुकी है.

उन्होंने बताया कि पूर्वी सियांग ज़िले में सियांग नदी के किनारे रहे रहे कई लोगों को ऐहतियात के तौर पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है.

अरुणाचल प्रदेश के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ए. लिबांग ने कहा कि सियांग नदी का जलस्तर 19 अक्टूबर की रात 11 बजे बढ़ा था लेकिन कुछ समय बाद यह कम होना शुरू हो गया.

मंत्री ने कहा कि अधिकारी नदी के जलस्तर की लगातार निगरानी कर रहे हैं.

चीन के दूतावास के प्रवक्ता काउंसेलर जे रोंग ने कहा कि उनके देश ने बीते 17 अक्टूबर की सुबह मिलिन काउंटी के जियाला गांव में यालुजांगबू नदी में भूस्खलन होने के बाद भारत के साथ आपात सूचना साझा तंत्र को सक्रिय कर दिया है.

तिब्बत में भूस्खलन होने से एक नदी का मार्ग अवरूद्ध हो जाने और कृत्रिम झील बनने के बाद अरुणाचल प्रदेश में ब्रह्मपुत्र नदी से लगे ज़िलों में बाढ़ की आशंका को देखते हुए हाई अलर्ट जारी किया गया है.

यालुजांगबू नदी के अरूणाचल प्रदेश में प्रवेश करने पर इसे सियांग नदी और असम में ब्रह्मपुत्र नदी कहा जाता है.

त्रिपुरा: छेड़छाड़ की वजह से पश्चिम त्रिपुरा ज़िले में संघर्ष

अगरतला: पश्चिम त्रिपुरा ज़िले में एक आदिवासी लड़की के साथ कथित छेड़छाड़ को लेकर दो समुदायों के बीच हुए संघर्ष में 61 परिवारों के करीब 300 लोगों को घरों से भागना पड़ा और कम से कम एक घर को आग लगा दी गई.

पुलिस ने शुक्रवार को बताया कि छेड़छाड़ करने के आरोप में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है.

पुलिस के मुताबिक, लड़की अपने प्रेमी के साथ नज़दीक के इलाके से रानीरबाज़ार क्षेत्र में बीते 18 अक्टूबर को दुर्गा प्रतिमाएं देखने आई थी तभी चार युवकों ने उसके साथ कथित रूप से छेड़छाड़ की और उसका मोबाइल फोन छीन लिया.

अनुमंडलीय पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) बीबी दास ने बताया कि दोनों अपने इलाके में लौट गए और कुछ देर बाद लोगों के बड़े समूह के साथ लौटे. उन्होंने उन युवकों का घर जलाने की कोशिश की जिन्होंने लड़की के साथ कथित रूप से छेड़छाड़ की थी.

संघर्ष 19 अक्टूबर को भी जारी रहा और सूचना पाकर राज्य के मंत्री और इंडीजीनियस पीपल्स फ्रंट त्रिपुरा के नेता एनसी देबबर्मा हालात को शांत कराने पहुंचे.

मेघालय: महिला ने दो पादरियों पर आरोप लगाया

शिलॉन्ग: मीटू अभियान के तहत अब मेघालय में कैथोलिक चर्च के दो पादरियों पर आरोप लगे हैं. एक महिला ने बीते 18 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर कहा कि कई साल पहले उन दोनों ने उनका यौन उत्पीड़न किया था.

40 वर्षीय महिला ने विगत में तीन बार आत्महत्या का प्रयास किया था. महिला ने अपने फेसबुक पोस्ट में दो पादरियों- क्रिस्टिशन ब्रदर्स के फ्रांसिस गेल और डॉन बास्को के मस्कट के नाम लिए हैं. महिला का आरोप है कि उनका पांच साल की उम्र से ही यौन उत्पीड़न किया गया.

उन्होंने आरोप लगाया कि फ्रांसिस गेल ने उनके साथ पांच साल की उम्र से ही यौन उत्पीड़न किया और यह 12 साल तक की उम्र तक जारी रहा. जब महिला ने इसकी जानकारी अपने परिवार के एक सदस्य को दी तो उसने न सिर्फ डांट दिया बल्कि थप्पड़ भी मारा.

इन आरोपों पर प्रतिक्रिया के लिए मुख्य पादरी से संपर्क नहीं हो सका.

अरुणाचल प्रदेश: चीनी सैनिक राज्य की दिबांग घाटी के भारतीय क्षेत्र में थोड़े वक़्त के लिए आ गए थे

ईटानगर/नई दिल्ली: बीते जुलाई में चीनी सैनिकों का एक समूह अरुणाचल प्रदेश की दिबांग घाटी में वास्तविक नियंत्रण रेखा पार कर कुछ वक़्त के लिए भारत की तरफ आ गया लेकिन भारतीय सुरक्षाकर्मियों के आपत्ति जताने पर वे वापस चले गए.

सरकारी सूत्रों ने बताया कि यह ‘उल्लंघन नहीं था’ और वास्तविक नियंत्रण रेखा की अलग-अलग धारणा के कारण चीनी सेना के कर्मचारी भारतीय क्षेत्र में आ गए थे.

सूत्रों ने बताया कि घटना 25 जुलाई के आसपास की है.

ईटानगर में सूत्रों ने बताया कि अरुणाचल प्रदेश से लोकसभा सदस्य निनोंग इरिंग ने मीडियो रिपोर्टों और दिबांग घाटी में स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के आधार पर घटना के बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी है.

पत्र में उन्होंने कहा कि सरकार को अरुणाचल प्रदेश में ‘चीनी उल्लंघन’ के मुद्दे को बीजिंग के साथ उठाना चाहिए.

चीन की सेना के करीब 300 सैनिकों ने जुलाई के शुरू में पूर्वी लद्दाख क्षेत्र के देमचोक इलाके में घुसपैठ की थी और चार तंबू गाड़ लिए थे.

वे खानाबदोशों के रूप में भारतीय क्षेत्र में आए थे और तंबू गाड़ लिए थे. भारत के विरोध के बाद चीनी सेना के कर्मचारी बाद में वहां से चले गए थे.

अधिकारियों ने बताया कि ऐसे उल्लंघन असामान्य नहीं है क्योंकि चीन और भारत दोनों की ही वास्तविक नियंत्रण रेखा को लेकर अलग-अलग धारणाएं हैं.

भारत नियमित तौर पर ऐसी सभी घटनाओं को चीनी अधिकारियों के साथ उचित स्तर पर उठाता है.

भारत और चीन की करीब 4000 किलोमीटर लंबी सरहद है.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, चीनी सेना द्वारा उल्लंघन कर भारतीय क्षेत्र में आने की घटनाएं 2017 में बढ़कर 426 हो गई थी जो 2016 में 273 थी.

असम फ़र्ज़ी मुठभेड़ मामला: प्रदीप के परिवार ने बयां की अपनी आपबीती

गुवाहाटी: असम के तिनसुकिया ज़िले में 24 साल पहले हुई एक मुठभेड़ ने एक परिवार की ज़िंदगी हमेशा के लिए बदलकर रख दी. 19 फरवरी, 1994 को देर रात दो बजे प्रदीप दत्ता के घर के दरवाज़े पर हुई दस्तक के साथ उसके परिवार का 24 साल का दर्द भरा सफ़र शुरू हो गया.

प्रदीप के बड़े भाई ने कहा कि सेना उल्फा उग्रवादियों द्वारा की गयी एक चाय बागान प्रबंधक की हत्या के सिलसिले में वहां आयी थी और प्रदीप को अपने साथ ले गयी.

33 साल के प्रदीप की एक महीने पहले ही शादी हुई थी. वह अपना ख़ुद का कारोबार करता था.

गुवाहाटी में यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया की एक शाखा में प्रबंधक के रूप में काम कर रहे दीपक दत्ता ने बताया, ‘हमने उसे दोबारा कभी नहीं देखा.’

सेना का एक दल प्रदीप और चार अन्य को अपने साथ ले गया और चार दिन बाद 23 फरवरी, 1994 को उनकी जान ले ली गयी. घटना को डांगोरी मुठभेड़ के रूप में जाना जाता है.

दत्ता परिवार का इंसाफ के लिए लंबा इंतज़ार बीते 13 अक्टूबर को पूरा हुआ जब एक कोर्ट मार्शल में मामले को लेकर एक मेजर जनरल सहित सेना के सात कर्मचारियों को उम्रक़ैद की सज़ा सुनायी गयी.

असम के डिब्रूगढ़ ज़िले के दिंजन में 2 इन्फैन्ट्री माउंटेन डिविजन में हुए जनरल कोर्ट मार्शल ने सात थल सैनिकों को दोषी क़रार दिया और उन्हें उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई.

प्रदीप को बहुत यातना दी गयी थी. शव पर यातना दिए जाने के निशानों की याद अब भी उसके परिवार को डराती है.

प्रदीप तिनसुकिया ज़िले के तलप इलाके में रहने वाले बुपेश्वर दत्ता के पांच बच्चों में दूसरे सबसे बड़े थे.

दीपक ने कहा, ‘सैन्यकर्मियों ने हमारी घर की तलाशी ली और जब उन्होंने शादी के कुछ उपहार देखे जो तब तक खोले नहीं गए थे, तब पूछा कि वे किसके हैं. मेरे भाई ने उन्हें बताया कि उपहार उसके हैं. इसके थोड़ी देर बाद वे उसे ले गए और हमने फिर कभी उसे नहीं देखा.’

जब अगले 24 घंटे तक प्रदीप के बारे में कुछ पता नहीं चला, तब उसके परिवार ने गौहाटी उच्च न्यायालय का रुख़ किया और बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर उसे तत्काल किसी मजिस्ट्रेट अदालत में पेश करने की मांग की.

दीपक ने कहा कि उच्च न्यायालय ने सेना को ऐसा करने का निर्देश भी दिया लेकिन वह बेकार गया.

प्रदीप सहित चारों लोगों की 23 फरवरी को हत्या की गयी और उसके बाद शव उनके परिवारों को सौंप दिया गया. शव गोलियों से छलनी थे.

सेना के अधिकारियों ने दावा किया कि वे सभी उल्फा के उग्रवादी थे और मुठभेड़ में उनकी मौत हुई.

दीपक ने कहा, ‘प्रदीप का किसी भी संगठन से कोई संबंध नहीं था. वह एक साधारण इंसान था जो अपना ख़ुद का कारोबार करता था. लेकिन उसे बहुत ही बर्बर तरीके से मारा गया. उसके सभी नाखून उखाड़ दिए गए थे और पूरे शरीर पर चोट एवं जलाने के निशान थे जो हमें लगता है कि उसे दिए गए बिजली के झटके से आए थे.’

बेटे के इस तरह दुनिया से जाने से ग़मज़दा प्रदीप के पिता का कुछ सालों बाद निधन हो गया. उसकी मां स्वर्णलता भी बीमार पड़ गयीं.

दीपक ने कहा, ‘हमारी मां जो अब 80 साल की हो गयी हैं, अब भी प्रदीप को याद कर कर के रोती हैं. यह अब भी समझ नहीं आता कि भारतीय सेना जिस पर हम सबको गर्व है, उसके कुछ लोग कैसे इस तरह की बर्बरता कर सकते हैं.’

सिक्किम: पूर्णत: जैविक खेती के लिए राज्य को मिला ‘सर्वश्रेष्ठ नीतियों का ऑस्कर’ पुरस्कार

सिक्किम के मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग. (फोटो साभार: फेसबुक/Pawan Chamling)

सिक्किम के मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग. (फोटो साभार: फेसबुक/Pawan Chamling)

न्यूयार्क/रोम: खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) ने कृषि तंत्र और सतत खाद्य प्रणालियों को बढ़ावा देने के लिए सिक्कम को ‘सर्वश्रेष्ठ नीतियों का ऑस्कर’ पुरस्कार दिया है. सिक्कम भारत का पहला ऐसा राज्य है जहां पूर्णत: यानी 100 प्रतिशत जैविक कृषि’ की जाती है.

एक बयान के मुताबिक पूर्वोत्तर के इस राज्य ने 25 देशों की 51 नामित नीतियों को पीछे छोड़ते हुए पुरस्कार जीता.

ब्राजील, डेनमार्क और क्विटो (इक्वाडोर) ने रजत पुरस्कार जीते.

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ), वर्ल्ड फ्यूचर काउंसिल (डब्ल्यूएफसी) और गैर लाभकारी संगठन आईएफओएएम- ऑर्गेनिक इंटरनेशनल मिलकर यह पुरस्कार देते हैं.

सिक्किम लंबे समय तक मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण, स्वस्थ जीवन और हृदय संबंधी बीमारियों के बढ़ते ख़तरे को कम करने के मक़सद से 2003 में जैविक कृषि अपनाने की आधिकारिक रूप से घोषणा करने वाला देश का पहला राज्य बन गया था.

चामलिंग का जैविक कृषि अधिक प्रचलित करने का आह्वान

सिक्किम के मुख्यमंत्री पवन चामलिंग ने बीते 15 अक्टूबर को जैविक कृषि को और ज़्यादा लोकप्रिय बनाने की अपील की जैसा कि उनके राज्य में किया जा चुका है.

चामलिंग ने इतालवी संसद के एक कक्ष में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि सिक्किम को रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल ख़त्म कर पूरी तरह जैविक कृषि अपनाने में एक दशक से ज़्यादा समय लगा.

उन्होंने कहा, ‘मैं यहां बुलाए जाने को लेकर सबका आभारी हूं. मैं कोई वैज्ञानिक या शोधकर्ता नहीं हूं. मैं बस एक नेता हूं जिसने रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल करने वाले राज्य को पूरी तरह जैविक कृषि अपनाने वाले राज्य में बदलने के अभियान का नेतृत्व किया है.’

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘अपने पुराने अनुभव और जैविक कृषि संबंधी पहल के साथ अपने जुड़ाव के आधार पर मैं आपसे विश्वास के साथ कह सकता हूं कि दुनियाभर में पूर्णत: जैविक कृषि संभव है. अगर हम सिक्किम में ऐसा कर सकते हैं तो ऐसा कोई कारण नहीं है कि दुनिया में दूसरी जगहों पर नीति नियंता, किसान और सामुदायिक नेता ऐसा नहीं कर सकते.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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