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आलोक वर्मा अब भी सीबीआई निदेशक और राकेश अस्थाना विशेष निदेशक: सीबीआई

देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी के दो वरिष्ठतम अधिकारियों- आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना को छुट्टी पर भेजे जाने के बाद सीबीआई ने जारी किया बयान.

सीबीआई के वरिष्ठतम अधिकारी राकेश अस्थाना और आलोक वर्मा. (फोटो साभार: पीटीआई/विकिपीडिया/फेसबुक)

सीबीआई के वरिष्ठतम अधिकारी राकेश अस्थाना और आलोक वर्मा. (फोटो साभार: पीटीआई/विकिपीडिया/फेसबुक)

नई दिल्ली: सीबीआई के शीर्ष अधिकारी आलोक वर्मा निदेशक के पद पर और राकेश अस्थाना विशेष निदेशक के पद पर बने रहेंगे. उच्चतम न्यायालय में इस विषय पर सुनवाई होने से एक दिन पहले गुरुवार को सीबीआई प्रवक्ता ने यह बात कही.

दरअसल, दोनों अधिकारियों से सारे अधिकार वापस ले लिए गए हैं. इसके बाद से देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी की तरफ से ये सफाई आई है.

सीबीआई प्रवक्ता अभिषेक दयाल ने कहा कि केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) द्वारा इन दोनों अधिकारियों से जुड़े मामले की जांच पर फैसला किए जाने तक एम. नागेश्वर राव सिर्फ एक अंतरिम व्यवस्था हैं.

वर्मा ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया और उन्होंने 23 अक्टूबर की रात आए सरकार के उस आदेश को रद्द करने की मांग की है, जिसके ज़रिये उनका और अस्थाना के सारे अधिकार वापस ले लिए गए तथा राव को निदेशक पद की ज़िम्मेदारियां सौंप दी गई.

केंद्र की मोदी सरकार ने वर्मा और अस्थाना को छुट्टी पर भेज दिया है. सीबीआई के 55 साल के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है. केंद्र ने भ्रष्टाचार रोधी संस्था सीवीसी से मिली एक सिफ़ारिश के बाद यह फैसला लिया.

सरकार की ओर से बीते 24 अक्टूबर को को जारी एक बयान में कहा गया था कि सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा द्वारा सीवीसी के कामकाज में इरादतन बाधा खड़ी की गई जो उनके ख़िलाफ़ की गई भ्रष्टाचार की शिकायतों को देख रहा था, और इसके साथ ही अपने अधीनस्थ राकेश अस्थाना के साथ गुटबंदी की वजह से सरकार द्वारा दोनों अधिकारियों को उनकी ज़िम्मेदारियों से पूरी तरह मुक्त कर दिया गया. इसमें कहा गया कि वर्मा और अस्थाना के बीच मचे घमासान की वजह से एजेंसी में कामकाज का माहौल दूषित हुआ है.

दरअसल, सीवीसी ने यह महसूस किया कि वर्मा आयोग के कामकाज में जान-बूझकर बाधा डाल रहे हैं, जो सीबीआई निदेशक के ख़िलाफ़ अस्थाना की शिकायतों की जांच कर रहा है.

केंद्र सरकार की ओर से जारी बयान में में कहा गया था कि यह क़दम केंद्रीय सतर्कता आयोग की सिफ़ारिश पर असाधारण और अभूतपूर्व परिस्थितियों पर विचार के बाद उठाया गया.

सरकार से सिफारिश करते हुए केंद्रीय सतर्कता आयोग ने डीपीएसई (सीबीआई) के कार्यकलाप पर अधीक्षण (सीवीसी कानून, 2003 की धारा 8) की अपनी शक्ति के तहत अधिकारियों के कामकाज, अधिकार, दायित्व और पहले से पंजीकृत मामलों में निरीक्षणात्मक भूमिका से मुक्त करने का आदेश भ्रष्टाचार रोक कानून, 1988 के प्रावधानों के तहत जारी किया है.

बयान में कहा गया, ‘भारत सरकार ने अपने समक्ष उपलब्ध दस्तावेज़ों का मूल्यांकन किया और समानता, निष्पक्षता एवं नैसर्गिक न्याय के हित में सीबीआई के निदेशक आलोक कुमार वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना को क्रमश: सीबीआई निदेशक और विशेष निदेशक के रूप में उनके कामकाज, शक्ति, दायित्व, और निरीक्षणात्मक भूमिका के निर्वहन पर रोक लगा दी है.’

सारे अधिकारों से वंचित किए जाने के बाद वर्मा ने शीर्ष न्यायालय का रुख़ कर दलील दी कि रातों रात उनके सारे अधिकार वापस ले लिया जाना सीबीआई की स्वतंत्रता में दखलअंदाजी के समान है.

उन्होंने कहा कि चूंकि सीबीआई के पूरी तरह से स्वतंत्र और स्वायत्त संस्था के तौर पर काम करने की उम्मीद की जाती है, ऐसे में कुछ मौके इस तरह के भी आते हैं जब उच्च पदाधिकारियों की किसी ख़ास जांच में सरकार से वांछित निर्देश नहीं लिया जाता है.

वर्मा ने यह दलील भी केंद्र और सीवीसी का क़दम अवैध है और इस तरह की दखलअंदाजी सीबीआई की स्वतंत्रता एवं स्वायत्ता को कम करती है.

वर्मा और अस्थाना के दर्जे के बारे में टिप्पणी करने से इनकार करने वाली सीबीआई ने एक स्पष्टीकरण जारी कर कहा कि वर्मा सीबीआई के निदेशक और अस्थाना विशेष निदेशक के पद पर बने रहेंगे.

प्रवक्ता ने संवाददाताओं से कहा कि आलोक वर्मा सीबीआई के निदेशक के पद पर और राकेश अस्थाना विशेष निदेशक के पद पर बने रहेंगे. वहीं, आरोप-प्रत्यारोप की सीवीसी द्वारा जांच किए जाने तक अंतरिम अवधि के दौरान एम. नागेश्वर राव निदेशक का कामकाज संभालेंगे.

वर्मा और एनजीओ कॉमन कॉज की याचिका पर उच्चतम न्यायालय में शुक्रवार को सुनवाई होगी. एनजीओ का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण कर रहे हैं.

इसके अलावा सरकार ने राकेश अस्थाना के खिलाफ जांच कर रहे सीबीआई के 13 अधिकारियों का भी तबादला कर दिया. एजेंसी में वर्मा और अस्थाना के बीच टकराव चल रहा था. खुद को छुट्टी पर भेजे जाने के सरकार फैसले को चुनौती देने के लिए वर्मा ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जिसकी सुनवाई शुक्रवार को होगी.

वहीं सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा के घर के बाहर से खुफिया एजेंसी इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के चार जासूसों को गुरुवार सुबह चार बजे के करीब गिरफ्तार किया गया है.

आरोप है कि ये चारों शख्स वर्मा के घर के बाहर जासूसी कर रहे थे. इन लोगों को आलोक वर्मा के सुरक्षाकर्मियों ने पकड़ा है और घर के अंदर ले गए.  इस बाद पुलिस को बुलाया गया और फिलहाल मामले में पूछताछ जारी है.

बताया जा रहा है कि ये लोग एक गाड़ी में बैठकर वर्मा के घर के बाहर नज़र बनाए हुए थे, तभी सुरक्षाकर्मियों की इन पर नज़र पड़ी. इस बात का लेकर संदेह है कि ये लोग या तो कोई आवाज सुनने वाली डिवाइस लगाने के फिराक में थे या फिर घर पर आने-जाने वाले लोगों पर नज़र रख रहे थे.

हालांकि गृह मंत्रालय का कहना है कि आंतरिक सुरक्षा को लेकर आईबी जानकारी इकट्ठा करती रहती है. ये अधिकारी भी अपनी रोजाना ड्यूटी पर थे. इसलिए उन्होंने अपने पहचान पत्र साथ में ले रखे थे. ये जासूसी नहीं है.

मालूम हो कि हवाला और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में मीट कारोबारी मोईन क़ुरैशी को क्लीनचिट देने में कथित तौर पर घूस लेने के आरोप में सीबीआई ने बीते दिनों अपने ही विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज कराई है और सीबीआई ने अपने ही दफ़्तर में छापा मारकर अपने ही डीएसपी देवेंद्र कुमार को गिरफ्तार किया है.

डीएसपी देवेंद्र कुमार को सात दिन की हिरासत में भेज दिया गया हैं. देवेंद्र ने अपनी गिरफ़्तारी को हाईकोर्ट में चुनौती दी है.

दूसरी ओर दिल्ली हाईकोर्ट ने 29 अक्टूबर तक राकेश अस्थाना के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं करने का आदेश दिया. 29 अक्टूबर को मामले की सुनवाई होगी जहां पर सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को अस्थाना के ख़िलाफ़ लगे आरोपों का जवाब देना होगा.

अस्थाना पर आरोप है कि उन्होंने मीट कारोबारी मोईन कुरैशी भ्रष्टाचार मामले में हैदराबाद के एक व्यापारी से दो बिचौलियों के ज़रिये पांच करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी. सीबीआई का आरोप है कि लगभग तीन करोड़ रुपये पहले ही बिचौलिये के ज़रिये अस्थाना को दिए जा चुके हैं.

कहा जा रहा है कि सीबीआई के दोनों वरिष्ठतम अधिकारियों के बीचे मचे इस घमासान से जांच एजेंसी की विश्वसनीयता पर उठे सवालों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आदेश पर यह कार्रवाई की गई है.

दरअसल कार्मिक मंत्रालय के अधीन ही सीबीआई काम करती है और अभी इस मंत्रालय के प्रभारी नरेंद्र मोदी हैं.

अदालत ने अस्थाना के ख़िलाफ़ रिश्वतखोरी मामले में बिचौलिये की हिरासत अवधि बढ़ाई

दिल्ली की एक अदालत ने सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के ख़िलाफ़ दर्ज रिश्वत मामले में गिरफ्तार बिचौलिये मनोज प्रसाद की हिरासत अवधि बृहस्पतिवार को पांच दिनों के लिए बढ़ा दी.

सीबीआई ने अदालत से अनुरोध किया था कि उसे प्रसाद को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की ज़रूरत है. विशेष सीबीआई न्यायाधीश संतोष स्नेही मान ने एजेंसी के अनुरोध को स्वीकार कर लिया.

सीबीआई ने कारोबारी सतीश सना की लिखित शिकायत पर अस्थाना और पुलिस उपाधीक्षक देवेंद्र कुमार के ख़िलाफ़ प्राथमिकी दर्ज की है.

मामले में अस्थाना और कुमार के अलावा बिचौलिये प्रसाद तथा सोमेश प्रसाद को भी आरोपी बनाया गया है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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