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उत्तर प्रदेश: 12,460 शिक्षकों की भर्ती रद्द, 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती की सीबीआई जांच के आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने दिया आदेश. 12,460 सहायक शिक्षकों का चयन अखिलेश यादव सरकार के कार्यकाल में हुआ था जबकि 68,500 शिक्षकों की चयन प्रक्रिया अभी की योगी आदित्यनाथ सरकार के कार्यकाल में चल रही है.

योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव. (फोटो: पीटीआई)

योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव. (फोटो: पीटीआई)

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री रहने के दौरान 12,460 प्राइमरी शिक्षकों की भर्ती को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने रद्द कर दिया है. इसके अलावा हाईकोर्ट ने 68,500 शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया की सीबीआई जांच के निर्देश दिए हैं. मालूम हो कि इन 68,500 शिक्षकों की चयन प्रक्रिया अभी की योगी आदित्यनाथ सरकार के कार्यकाल में चल रही थी.

भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा, 2018 के तहत उत्तर प्रदेश में प्राइमरी स्कूलों के लिए 68,500 शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई है. इस संबंध में राज्य की योगी आदित्यनाथ सरकार की ओर इस साल 23 जनवरी को विज्ञापन निकाला गया था. उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार के सत्ता में आने के बाद बेसिक शिक्षा विभाग की ओर जारी यह सबसे बड़ी भर्ती थी.

लखनऊ पीठ ने सीबीआई को मामले की जांच छह महीने के अंदर करने और 26 नवंबर तक इस संबंध में एक प्रगति रिपोर्ट दाख़िल करने को कहा है.

हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाएं बदलने के मामले में पहले ही महाधिवक्ता से पूछा था कि राज्य सरकार क्या इस मामले की सीबीआई जांच कराने को तैयार है, जिस पर महाधिवक्ता द्वारा सरकार की ओर से सीबीआई जांच से इनकार कर दिया गया था.

अदालत ने यह पाया था कि कुछ उत्तर पुस्तिकाओं के पहले पृष्ठ पर अंकित बार कोड अंदर के पृष्ठों से मेल नहीं खा रहे हैं. अदालत ने इस पर हैरानी जताते हुए कहा था कि उत्तर पुस्तिकाएं बदल दी गई हैं. इस पर महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह ने मामले की पर्याप्त जांच का भरोसा दिया था.

इसके बाद अदालत ने मामले की सीबीआई जांच के आदेश दिए.

इन भर्तियों के ख़िलाफ़ दाख़िल कई याचिकाओं की सुनवाई करते हुए जस्टिस इरशाद अली ने निर्देश दिया है कि 2018 की भर्ती प्रक्रिया में जो भी अधिकारी शामिल रहे हैं वे सीबीआई जांच में सहयोग करें और जांच एजेंसी को जो भी दस्तावेज़ चाहिए, उसे उपलब्ध कराएं.

जस्टिस अली की एकल पीठ ने कहा कि अदालत प्राथमिक स्तर पर उन सबूतों से संतुष्ट है कि जिसके तहत इस बात की पुष्टि होती है कि परीक्षा से जुड़े प्राधिकारियों ने अपनी शक्ति का ग़लत इस्तेमाल किया और अपनी पसंद के अभ्यर्थियों को मदद पहुंचाई.

रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने यह भी कहा कि बार कोड में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां पाई गईं, लेकिन उस एजेंसी पर कोई भी कार्रवाई नहीं हुई. सरकार ने ख़ुद स्वीकारा कि 12 अभ्यर्थियों की कॉपी बदली गई है, लेकिन एजेंसी के ख़िलाफ़ कोई भी आपराधिक कार्रवाई नहीं हुई है. अदालत ने कहा इसे देखते हुए इस मामले को सीबीआई जांच के लिए भेजना पड़ रहा है. दोषी अधिकारियों के ख़िलाफ़ करवाई के आदेश भी अदालत ने सीबीआई को दिया है.

इसके अलावा दूसरे मामले में अदालत ने पाया कि अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री रहने के दौरान 12,460 सहायक शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा (शिक्षक) सेवा नियम, 1981 का उल्लंघन किया गया है.

अदालत द्वारा भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगाने के बाद चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र जारी नहीं किए गए. अदालत ने निर्देश दिए हैं कि 2016 की भर्ती प्रक्रिया फिर से शुरू की जानी चाहिए और तीन महीने में पूरी होनी चाहिए.

हिंदुस्तान की रिपोर्ट अनुसार, याचिकाओं में 26 दिसंबर 2016 के उस नोटिफिकेशन को खारिज किए जाने की मांग की गई थी, जिसके तहत उन जिलों में जहां कोई पद नहीं था, वहां के अभ्यर्थियों को काउंसलिंग के लिए किसी भी जिले में प्रथम वरीयता के तौर पर चुनने की छूट दी गई थी.

याचिकाकर्ताओं की तरफ से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता जेएन माथुर की दलील थी कि 26 दिसंबर, 2016 के नोटिफिकेशन द्वारा नियमों में बदलाव भर्ती प्रकिया प्रारम्भ होने के बाद किया गया जबकि नियमानुसार एक बार भर्ती प्रकिया प्रारम्भ होने के बाद नियमों में बदलाव नहीं किया जा सकता है.  

गौरतलब है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 अप्रैल, 2018 को एक अंतरिम आदेश जारी कर पहले ही सफल अभ्यर्थियों को नियुक्त पत्र देने पर रोक लगा दी थी.  

अदालत के दोनों फैसलों को चुनौती देगी उत्तर प्रदेश सरकार

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के दोनों फैसले के ख़िलाफ़ उत्तर प्रदेश सरकार चुनौती देगी. हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा डॉ. प्रभात कुमार से बात की और निर्देश दिए कि जिन लोगों को नौकरी मिल चुकी है उनके हितों की रक्षा की जाए.

डॉ. प्रभात कुमार ने हिंदुस्तान से बातचीत में कहा, ‘जिन अभ्यर्थियों को नौकरी मिल चुकी है, वे परेशान न हों. उनकी नौकरी की सुरक्षा की जाएगी. इसलिए हम इसे डबल बेंच में लेकर जाएंगे और सरकार की तरफ से मज़बूत तरीके से पैरवी की जाएगी.’  

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के आदेश के बाद 68,500 की भर्ती की उच्चस्तरीय जांच कराई गई थी. जिसकी जांच में कहीं कोई आपराधिक कृत्य नहीं पाया गया था, इसलिए सीबीआई जांच की जरूरत नहीं है.

उन्होंने कहा कि 12,460 की भर्ती में भी किसी का अहित न हो और सबको मौका मिले इसलिए विकल्प खोला गया था. इस भर्ती में लगभग पांच हजार शिक्षक नियुक्त हो चुके हैं.

(समाचार एजेंसी पीटीआई से इनपुट के साथ)

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