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सीबीआई विवाद: निदेशक आलोक वर्मा मामले की सुनवाई शुक्रवार तक के लिए स्थगित

केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा पर लगे आरोपों पर अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सोमवार को सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की. हालांकि मुख्य न्यायाधीश ने इस बात पर आपत्ति जताई कि अगर रविवार दोपहर तक रजिस्ट्री खुली हुई थी तो जांच रिपोर्ट सौंपने में देरी क्यों हुई.

(फोटो: पीटीआई)

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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और जस्टिस एसके कौल की पीठ ने सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा मामले की सुनवाई शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दी है.

केंद्र सरकार ने बीते 23 अक्टूबर को केंद्रीय सतर्कता आयोग की सलाह पर आलोक वर्मा से सारे अधिकार वापस ले लिए और उन्हें छुट्टी पर भेज दिया था. वर्मा की जगह पर एम. नागेश्वर राव को सीबीआई का अंतरिम निदेशक नियुक्त कर दिया था.

आलोक वर्मा ने केंद्र सरकार के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है और इसे रद्द करने की मांग की है. पिछली बार इस मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा था कि केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) सुप्रीम कोर्ट जज एके पटनायक की निगरानी में आलोक वर्मा पर लगाए गए आरोपों की जांच दो हफ्ते में पूरी करे.

सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना ने सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाया है और इससे संबंधित शिकायत सीवीसी में की थी.

केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने सीबीआई निदेशक आलोक कुमार वर्मा के खिलाफ अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सोमवार को सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की.

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और जस्टिस संजय किशन कौल की पीठ ने रिपोर्ट को रिकॉर्ड में लिया और मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर यानि कि शुक्रवार को तय की. सुनवाई के दौरान सीबीआई के अंतरिम निदेशक एम. नागेश्वर राव ने भी एजेंसी प्रमुख के तौर पर 23 अक्टूबर के बाद से अब तक किए गए अपने फैसलों के बारे में रिपोर्ट दाखिल की.

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि शीर्ष अदालत के पूर्व जज एके पटनायक ने सीवीसी जांच की निगरानी की, जो 10 नवंबर को पूरी हुई.

चीफ जस्टिस ने कहा कि रजिस्ट्री रविवार को भी खुली हुई थी, लेकिन रिपोर्ट दाखिल करने के संबंध में रजिस्ट्रार को कोई सूचना नहीं दी गई. बाद में सॉलिसीटर जनरल ने मांफी मांगी और कहा कि यद्यपि वह परिस्थितियों के बारे में स्पष्टीकरण नहीं दे रहे हैं, लेकिन रिपोर्ट सौंपने में उनकी तरफ से विलंब हुआ.

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, जस्टिस एसके कौल और जस्टिस केएम जोसेफ की पीठ आलोक वर्मा की याचिका और एनजीओ कॉमन कॉज की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है.

बता दें कि सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना पर आरोप है कि उन्होंने मीट कारोबारी मोईन कुरैशी भ्रष्टाचार मामले में हैदराबाद के एक व्यापारी से दो बिचौलियों के ज़रिये पांच करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी. सीबीआई का आरोप है कि लगभग तीन करोड़ रुपये पहले ही बिचौलिये के ज़रिये अस्थाना को दिए जा चुके हैं.

कहा जा रहा है कि सीबीआई के दोनों वरिष्ठतम अधिकारियों के बीचे मचे इस घमासान से जांच एजेंसी की विश्वसनीयता पर उठे सवालों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आदेश पर यह कार्रवाई की गई है.

दरअसल कार्मिक मंत्रालय के अधीन ही सीबीआई काम करती है और अभी इस मंत्रालय के प्रभारी नरेंद्र मोदी हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)