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फ़र्ज़ी डिग्री: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष अंकिव बैसोया एबीवीपी से निलंबित

एबीवीपी ने छात्रसंघ अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा देने को कहा. दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष अंकिव बैसोया की तिरुवल्‍लुवर विश्वविद्यालय से बीए डिग्री को एनएसयूआई ने फ़र्ज़ी डिग्री बताकर दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी.

एबीवीपी नेता अंकिव बैसोया (फोटो साभार: फेसबुक)

एबीवीपी नेता अंकिव बैसोया (फोटो साभार: फेसबुक)

नई दिल्ली: अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने फ़र्ज़ी डिग्री के विवाद में फंसे दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष अंकिव बैसोया को संगठन से निलंबित कर दिया है. इतना ही नहीं एबीवीपी ने अंकिव को छात्रसंघ अध्यक्ष पद से भी इस्तीफ़ा देने को भी कहा है. मामले की जांच होने तक अंकिव एबीवीपी से निलंबित रहेंगे.

गौरतलब है कि सितंबर में हुए दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव में एबीवीपी के अंकिव बैसोया ने अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की थी. एनएसयूआई द्वारा उनके नकली दस्तावेज देने का आरोप लगाने के बाद इस मामले ने तूल पकड़ा.

एनएसयूआई ने आरोप लगाया था कि अंकिव ने फ़र्ज़ी दस्तावेज़ों का इस्तेमाल कर दिल्ली विश्वविद्यालय के मास्टर आॅफ बुद्धिस्ट स्टडीज़ में प्रवेश लिया है. एनएसयूआई ने फ़र्ज़ी डिग्री मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की थी. अदालत ने अंकिव की डिग्री सही है या फ़र्जी, ये साबित करने के लिए विश्वविद्यालय को 20 नवंबर तक का समय दिया था.

आरोपों के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय ने इस मामले की जांच शुरू की. दिल्ली विश्वविद्यालय ने तमिलनाडु के वेल्लोर स्थित तिरुवल्लुवर विश्वविद्यालय को इस मामले में स्पष्टीकरण देने के लिए कहा था.

दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिले के लिए नकली दस्तावेज दिखाने का मामला सामने आने के बाद तमिलनाडु के विश्वविद्यालय ने यह जानकारी दी अंकिव बैसोया उनके विश्वविद्यालय के छात्र नहीं हैं.

बैसोया ने दावा किया था कि उन्होंने साल 2013 से 2016 के बीच तिरुवल्लुवर विश्वविद्यालय में पढ़ाई की थी.

तिरुवल्लुवर विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार ने बताया था कि जो प्रमाण पत्र अंकिव बैसोया ने दिल्ली विश्वविद्यालय में पेश किया था वो फ़र्ज़ी है, इस विश्वविद्यालय का नहीं है. अंकिव किसी भी तरह से विश्वविद्यालय के छात्र नहीं रहे हैं.

हालांकि अंकिव ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा था कि दिल्ली विश्वविद्यालय में मार्कशीट और दस्तावेजों की जांच के बाद दाख़िला दिया जाता है और विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से उनकी डिग्री को संदेहास्पद नहीं बताया गया है.

एबीवीपी की राष्ट्रीय मीडिया संयोजक मोनिका चौधरी ने कहा, ‘छात्रों के संघर्ष और भावनाओं को ध्यान में रहते हुए संगठन ने अंकिव बैसोया को अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा देने के साथ संगठन से भी जांच पूरी होने तक के लिए निलंबित कर दिया है. दिल्ली छात्रसंघ की विश्वसनीयता बनी रहे इसलिए ये निर्णय लिया गया है.’

उन्होंने आगे कहा कि अगर अंकिव जांच में दोषी पाए जाते हैं, तो उन्हें क़ानूनी कार्रवाई का सामना करना होगा.

एनएसयूआई के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष अक्षय लखारा ने द वायर से बातचीत में कहा, ‘एबीवीपी अपनी बची हुई इज़्ज़त को बचाने के लिए ये निर्णय लिया है क्योंकि 20 नवंबर को ये साबित हो जाता कि अंकिव की डिग्री फ़र्ज़ी है और उसे छात्रसंघ अध्यक्ष पद से हटा दिया जाता है. एबीवीपी को पता है निर्णय क्या आने वाला है इसलिए उसने पहले ही अंकिव को संगठन से बाहर का रास्ता दिखा दिया.’

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