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हाईकोर्ट का आदेश, आलोक वर्मा सीवीसी दफ्तर में अस्थाना से जुड़ी फाइलों का कर सकते हैं निरीक्षण

दिल्ली हाईकोर्ट ने सीबीआई को विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के ख़िलाफ़ कार्रवाई के संबंध में सात दिसंबर तक यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है.

सीबीआई के वरिष्ठतम अधिकारी राकेश अस्थाना और आलोक वर्मा. (फोटो साभार: पीटीआई/विकिपीडिया/फेसबुक)

सीबीआई के वरिष्ठतम अधिकारी राकेश अस्थाना और आलोक वर्मा. (फोटो साभार: पीटीआई/विकिपीडिया/फेसबुक)

नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा और संयुक्त निदेशक एके शर्मा को एजेंसी के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी से संबंधित मामले की फाइल का केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) कार्यालय में निरीक्षण करने की अनुमति दी.

जस्टिस नाजमी वजीरी ने वर्मा को गुरुवार को केंद्रीय सतर्कता आयोग के कार्यालय में जाने के लिए कहा. वर्मा के वकील ने कहा था कि अस्थाना की याचिका में उनके खिलाफ बदनीयती से आरोप लगाए गए हैं.

अदालत ने सीबीआई को अस्थाना के खिलाफ कार्यवाही के संबंध में यथास्थिति बरकरार रखने के निर्देश देने वाले अपने आदेश की अवधि सात दिसंबर तक बढ़ा दी.

बता दें कि कल यानि कि गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में राकेश अस्थाना द्वारा आलोक वर्मा के खिलाफ लगाए गए आरोपों को लेकर सुनवाई होगी. सुप्रीम कोर्ट आलोक वर्मा द्वारा केंद्र सरकार के 23 अक्टूबर के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा है.

केंद्र सरकार ने बीते 23 अक्टूबर को केंद्रीय सतर्कता आयोग की सलाह पर आलोक वर्मा से सारे अधिकार वापस ले लिए और उन्हें छुट्टी पर भेज दिया था. वर्मा की जगह पर एम. नागेश्वर राव को सीबीआई का अंतरिम निदेशक नियुक्त कर दिया था.

इससे पहले मामले की सुनवाई करते हुए न्यायालय ने कहा था कि केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) सुप्रीम कोर्ट जज एके पटनायक की निगरानी में आलोक वर्मा पर लगाए गए आरोपों की जांच दो हफ्ते में पूरी करे.

सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना ने एक दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं.

हवाला और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में मीट कारोबारी मोईन क़ुरैशी को क्लीनचिट देने में कथित तौर पर घूस लेने के आरोप में सीबीआई ने अपने ही विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज किया. अस्थाना पर आरोप है कि उन्होंने मोईन क़ुरैशी मामले में हैदराबाद के एक व्यापारी से दो बिचौलियों के ज़रिये पांच करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी थी.

जिसके बाद राकेश अस्थाना ने सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा पर ही इस मामले में आरोपी को बचाने के लिए दो करोड़ रुपये की घूस लेने का आरोप लगाया. दोनों अफसरों के बीच मची रार सार्वजनिक हो गई तो केंद्र सरकार ने दोनों अधिकारियों को छुट्टी पर भेज दिया. साथ ही अस्थाना के ख़िलाफ़ जांच कर रहे 13 सीबीआई अफसरों का भी तबादला कर दिया गया था.

सुप्रीम कोर्ट ने बीते 26 अक्टूबर को केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) से कहा था कि सुप्रीम कोर्ट जज की निगरानी में वह निदेशक आलोक वर्मा के ख़िलाफ़ लगाए गए आरोपों की जांच दो हफ्ते में पूरी करे.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)