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नौकरी से निकाले जाने के बाद कर्मचारियों ने मोबाइल कंपनी में की तोड़फोड़, कंपनी चार दिन बंद

नोएडा सेक्टर 63 स्थित कंपनी शाओमी और ओप्पो के लिए मोबाइल फोन बनाती है. बिना नोटिस दिए कंपनी द्वारा तकरीबन 200 लोगों को निकालने का आरोप. पुलिस ने चार कर्मचारियों को गिरफ़्तार किया.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

नोएडा: नौकरी से निकाले जाने से आक्रोशित कर्मचारियों द्वारा एक विदेशी मोबाइल फोन निर्माता कंपनी में बृहस्पतिवार को कथित रूप से की गई तोड़फोड़ की गई.

इसके बाद से कंपनी को चार दिन के लिए बंद कर दिया गया है. कंपनी प्रबंधन ने इस बाबत 30 नंवबर को नोटिस लगा दिया. कंपनी में काम करने आए कर्मचारी नोटिस पढ़कर अपने घर लौट गए.

बीते 29 नवंबर को तोड़फोड़ की घटना के मद्देनज़र 30 नवंबर को कारखाने के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था. इस मामले में तोड़फोड़ करने वाले चार लोगों को थाना फेस-3 पुलिस ने गिरफ्तार किया है.

कथित तौर पर बिना नोटिस दिए कंपनी ने तकरीबन 200 कर्मचारियों को बीते 29 नवंबर को नौकरी से निकाल दिया था.

यह घटना नोएडा के सेक्टर 63 स्थित मोबाइल फोन बनाने वाली चीनी कंपनी हाईपैड टेक्नोलॉजी की है. यह कंपनी भारत में शाओमी और ओप्पो के लिए मोबाइल फोन का निर्माण करती है.

इस बात से आक्रोशित कर्मचारियों ने कंपनी में जमकर तोड़फोड़ की. घटना की सूचना पाकर जब पुलिस मौके पर पहुंची तो आक्रोशित कर्मचारियों ने पुलिसकर्मियों के साथ भी बदसलूकी की तथा सरकारी कार्य में बाधा डाली.

पुलिस उपाधीक्षक नगर राजीव कुमार सिंह ने बताया कि इस संबंध में गिरफ़्तार किए गए आरोपियों के नाम योगेश कुमार, अखिलेश कुमार, योगेश कुमार व दीपक कुमार पांडे हैं.

उन्होंने बताया कि इस मामले में कंपनी प्रबंधन के लोगों के ख़िलाफ़ भी मुकदमा दर्ज हुआ है. उनकी गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं.

अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचीं नोएडा सिटी की एसपी सुधा सिंह ने समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में कहा, ‘हमें पता चला कि कर्मचारियों कंपनी में तोड़फोड़ क्योंकि उन्हें बिना नोटिस के नौकरी से निकाल दिया गया था.’

उन्होंने बताया कि इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक शिकायत नहीं मिली है. पुलिस मामले की जांच कर रही है.

श्रम विभाग के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे हुए थे. अधिकारियों ने बताया कि कच्चे माल की कमी की वजह से कंपनी ने कर्मचारियों से बीते सोमवार से काम पर नहीं आने के लिए कहा था. इसके बाद भी कर्मचारी कंपनी में आते रहे तो प्रबंधन में आज उन्हें कंपनी में आने से रोका.

सहायक श्रम आयुक्त हरीश चंद्र सिंह ने पीटीआई को बताया कि कंपनी ने कर्मचारियों से कंपनी परिसर छोड़ने के लिए कहा था जबकि कर्मचारियों का कहना था कि उन्हें इस निर्णय के बारे में नहीं बताया गया था, जिसकी वजह से यह तोड़फोड़ हुई.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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