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गुजरात: टाटा, अडाणी, एस्सार को कोयले की ऊंची लागत बिजली ग्राहकों से वसूलने की छूट मिली

इससे पहले उच्चतम न्यायालय ने टाटा पावर, अडाणी पावर और एस्सार पावर को आयातित कोयले की ऊंची लागत का भार स्थानांतरित करने के लिए किसी तरह के क्षतिपूरक शुल्क नहीं लेने का आदेश दिया था.

(फोटो: विकिपीडिया)

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नई दिल्ली: गुजरात सरकार ने टाटा, अडाणी और एस्सार समूहों के ताप बिजलीघरों को राहत देते हुए कोयले की ऊंची लागत का भार अंतिम उपभोक्ता को स्थानांतरित करने की अनुमति दे दी है. यह आदेश शनिवार को जारी किया गया. एक सूत्र ने बीते सोमवार को यह जानकारी दी.

इससे पहले उच्चतम न्यायालय ने टाटा पावर, अडाणी पावर (4600 मेगावॉट मुंदड़ा) और एस्सार पावर (1320 मेगावॉट सलाया) को आयातित कोयले की ऊंची लागत का भार स्थानांतरित करने के लिए किसी तरह के क्षतिपूरक शुल्क के ख़िलाफ़ व्यवस्था दी थी.

इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए टाटा पावर ने सोमवार को बॉम्बे शेयर बाज़ार को भेजी सूचना में कहा कि कंपनी गुजरात सरकार द्वारा एक उच्चस्तरीय समिति की सिफारिशों को स्वीकार करने के प्रस्ताव का स्वागत करती है. इससे मुंदड़ा अति वृहद बिजली परियोजना को कुछ राहत मिलेगी, जो गुजरात की करीब 15 प्रतिशत बिजली की ज़रूरत को उचित मूल्य पर पूरा करती है.

इसमें आगे कहा गया है कि इस राहत से कोस्टल गुजरात पावर को अपना परिचालन जारी रखने और पांच लाभार्थी राज्यों के लिए प्रतिबद्धता को पूरा करने में मदद मिलेगी.

टाटा पावर ने आगे कहा कि कोयले की लागत को अब आगे स्थानांतरित किया जा सकेगा, लेकिन इसके बावजूद वित्त की लागत पर रियायत तथा कोयला खानों का लाभ लाभार्थी राज्यों को स्थानांतरित किए जाने से कंपनी का घाटा जारी रहेगा.

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