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मध्य प्रदेश: मंडी में कौड़ियों के भाव लहसुन-प्याज़, फसल फेंकने को मजबूर किसान

राज्य की सबसे बड़ी नीमच मंडी में प्याज़ 50 पैसे प्रति किलोग्राम और लहसुन 2 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव से बिका. मंडी सचिव का कहना है कि किसान बेहतर गुणवत्ता का माल लेकर मंडी आएंगे तो बेहतर दाम मिलेगा.

प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो: रॉयटर्स)

फोटो: रॉयटर्स

नीमच: मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी सीमांत मंडी नीमच में मंगलवार को प्याज पचास पैसे प्रति किलोग्राम और लहसुन दो रुपये प्रति किलोग्राम थोक के भाव बिका. इसके चलते किसान या तो अपनी फसल वापस ले जा रहे हैं या फिर मंडी में ही छोड़ जा रहे है.

उल्लेखनीय है कि इस दौरान पांच राज्यों में चल रहे विधानसभा चुनावों में राजनीतिक पार्टियों के बीच खेती-किसान एक अहम मुद्दा है. मध्य प्रदेश में 28 नवंबर को मतदान हो चुका है. पड़ोसी राज्य राजस्थान में सात दिसंबर को मतदान होना है. मतगणना 11 दिसंबर को होगी.

नीमच मंडी में प्याज और लहसुन के गिरते दामों के कारण किसानों को लागत मूल्य तो दूर माल को मंडी में लाने तक का किराया-भाड़ा नहीं मिल रहा है. इसके चलते किसान या तो अपनी फसल वापस ले जा रहे है या फिर मंडी में छोड़ जा रहे हैं.

नीमच मंडी सचिव ने भी स्वीकार किया है कि माल की अधिक आवक के कारण दामों में गिरावट आई है. साथ ही उनका दावा है कि माल की हल्की गुणवत्ता से भी प्याज-लहसुन के दाम गिरे हैं.

उन्होंने कहा कि किसान बेहतर गुणवत्ता का माल लेकर मंडी में आएंगे तो उनको बेहतर दाम मिलेगा.

नीमच मंडी के सचिव संजीव श्रीवास्तव ने बताया, ‘सोमवार को प्याज के दाम 90 रुपये से 900 रुपये प्रति क्विंटल (100 किलोग्राम) के बीच रहे तथा लहसुन का दाम 200 रुपये से 3900 रुपये प्रति क्विंटल के बीच रहा. प्याज और लहसुन की कुछ मात्रा कम दामों पर बेची गई लेकिन वह हल्की गुणवत्ता होने के कारण कम दामों में बिकी.’

उन्होंने बताया कि प्याज का थोक भाव कम से कम 90 पैसे प्रति किलोग्राम तथा लहसुन का दो रुपये प्रति किलोग्राम रहा.

हालांकि एक किसान ने कहा कि जब वह अपनी प्याज की फसल बेचने मंडी आया तो उसकी फसल का दाम 50 पैसे प्रति किलोग्राम लगाया गया.

नीमच जिले के केलूखेड़ा गांव के किसान इंदरमल पाटीदार ने बताया, ‘मैं 15 क्विंटल प्याज लेकर नीमच मंडी आया था, सोचा था प्याज बेचकर कुछ ज़रूरी सामान खरीदेंगे लेकिन जब मंडी पहुंचे तो पता चला प्याज का भाव तो मात्र 50 पैसे प्रति किलोग्राम रह गया. अब यह प्याज वापस अपने गांव ले जा रहा हूं, वहां मवेशियों को खिलाऊंगा.’

पड़ोसी राज्य राजस्थान के मरजीवी गांव से आये किसान महेश कुमार ने कहा, ‘हम प्याज लेकर नीमच आ तो गए लेकिन अब भाव नहीं मिल रहे हैं. ऐसे में यह प्याज यहीं छोड़ कर जा रहे हैं, क्योंकि ले जाने का किराया कौन भुगतेगा.’

प्रदेश की सबसे बड़ी लहसुन मंडी नीमच में मंगलवार को लहसुन का भाव मात्र 2 रुपये प्रति किलोग्राम रह गया. बदनावर से आये किसान राजेश ने कहा, ‘हम कल से आये हुए है लेकिन आज मंडी खुलने के बाद लहसुन का जो भाव मिला, उससे मायूसी हुई इससे आने-जाने का खर्च भी नहीं निकलेगा.’

श्रीवास्तव ने बताया कि सोमवार को नीमच मंडी में 5000 क्विंटल प्याज और 8000 क्विंटल लहसुन की भारी आवक हुई. इससे भी दामों में गिरावट आई है, लेकिन 5000 क्विंटल में से केवल 25-30 क्विंटल प्याज ही 100 रुपये प्रति क्विंटल से कम पर बिकी, क्योंकि इस माल की गुणवत्ता अच्छी नहीं थी.इसी प्रकार जो लहसुन कम दाम पर बिका है उसकी भी गुणवत्ता हल्की थी.

श्रीवास्तव ने दावा किया कि सोमवार को नीमच मंडी में प्याज का औसत दाम लगभग 600 रुपये प्रति क्विंटल तथा लहसुन का लगभग 1000 रुपये प्रति क्विंटल रहा था.

महाराष्ट्र में किसान ने नुकसान से बचने के लिए खेतों में लगे बैंगन उखाड़ फेंके

इससे पहले महाराष्ट्र में मेहनत और लगन से उपजाई गई बैंगन की फसल के लिए प्रति किलोग्राम महज 20 पैसे की पेशकश से हताश एक किसान ने अपने खेतों में लगी बैंगन की फसल नष्ट कर दी ताकि उस पर और पैसे न लगाने पड़े.

अहमदनगर जिले के रहाटा तहसील के सकूरी गांव के किसान राजेंद्र बावाके ने कहा कि उन्होंने बैंगन की फसल पर दो लाख रुपये के साथ अपनी सारी ऊर्जा लगाई और उन्हें उससे महज 65 हजार रुपये मिले.

इतनी कम आमदनी से हताश किसान ने बीते रविवार को अपने खेतों में लगे बैंगन के सभी पौधे उखाड़ फेंके. बावाके ने सोमवार को समाचार एजेंसी पीटीआई-भाषा से बात करते हुए कहा, ‘मैंने दो एकड़ जमीन में बैंगन की फसल लगाई थी. टपकन (ड्रिप) सिंचाई के लिए पाइप भी बिछाया था. उत्पाद बढ़ाने के लिए मैने खाद, कीटनाशक और अन्य आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया. इन सब पर कुल खर्च तकरीबन दो लाख रुपये आया और मुझे इससे केवल 65 हजार रुपये की आमदनी हुई.’

उन्होंने कहा कि उनके ऊपर अभी 35 हजार रुपये का उधार है और उन्हें नहीं पता कि वह इसे चुकता करने के लिए यह धन कहां से लेकर आयेंगे.

बावाके ने दावा किया कि जब उन्होंने अपने उत्पाद महाराष्ट्र के नासिक और गुजरात के सूरत में स्थित थोक बाजारों में बेचने की कोशिश की तो उन्हें केवल 20 पैसे प्रति किलोग्राम के हिसाब से कीमत मिली.


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उन्होंने बताया, ‘इससे मैं हताश हो गया और अपने आप को आगे के नुकसान से बचाने के लिए मैने खेतों में लगे बैंगन के सभी पौधों को नष्ट करने का निर्णय किया. किसान ने कहा वह नियमित रूप से साप्ताहिक आधार पर बैंगन का कार्टन बेचते रहे हैं.

उन्होंने बताया, ‘पिछले तीन-चार महीनों में मुझे कभी अच्छी कीमत नहीं मिली और इसलिए मैने बैंगन की खेती छोड़ने का मन बनाया.’ बावाके ने बताया कि उनके पास तीन गायें हैं और इन पशुओं के लिए चारा खरीदने में पैसे की आवश्यकता होती है.

गौरतलब है कि नासिक जिले का एक प्याज उत्पादक किसान ने प्याज की बहुत कम कीमत मिलने पर अपनी पूरी कमाई विरोध स्वरूप प्रधानमंत्री को भेज दी थी. किसान को उनके 750 किलो प्याज के लिए केवल 1064 रुपये मिले थे.

आंध्र प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों के किसान बीते हफ्ते को नई दिल्ली पहुंचे थे और अपनी विभिन्न मांगो को लेकर प्रदर्शन किया था. उनकी मांगों में कर्ज माफी और फसल की लाभप्रद कीमत दिया जाना शामिल था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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