भारत

महाराष्ट्र: 500 किलो प्याज़ बेचने पर मिले 216 रुपये, किसान ने मुख्यमंत्री को भेजे

नासिक की येओला तहसील में कृषि उत्पादन बाजार समिति में एक किसान ने 545 किलोग्राम प्याज़ 51 पैसे प्रति किलोग्राम के भाव से बेचा. किसान का कहना है कि क्षेत्र में सूखे जैसी स्थिति है. इस आय में कैसे घर चलाऊं, कैसे अपने क़र्ज़ चुकाऊं.

A labourer stacks a sack of onions in a storage room at a wholesale vegetable and fruit market in New Delhi July 2, 2014. REUTERS/Anindito Mukherjee

प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो: रॉयटर्स)

नासिक: एक किसान द्वारा थोक बिक्री बाजार में प्याज की फसल की बिक्री से हुई बेहद कम आय की राशि प्रधानमंत्री को भेजने के बाद, महाराष्ट्र के नासिक जिले के एक अन्य किसान ने भी विरोध का समान तरीका अपनाया.

इस बार येओला तहसील में अंडरसुल के निवासी चंद्रकांत भीकन देशमुख ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को 216 रुपये का मनी ऑर्डर भेजा है.

देशमुख ने शुक्रवार को कहा कि येओला में पांच दिसंबर को हुई कृषि उत्पादन बाजार समिति (एपीएमसी) की नीलामी में 545 किलोग्राम प्याज की बिक्री के बाद उन्हें यह राशि प्राप्त हुई.

उसे जो भाव दिया गया वह प्रति किलोग्राम के लिए 51 पैसे था और एपीएमसी के शुल्कों को काटने के बाद उसे 216 रुपये का भुगतान किया गया और इस संबंध में उन्होंने बिक्री की रसीद भी दिखाई.

संवाददाताओं से बात करते हुए उन्होंने कहा, ‘हमारे क्षेत्र में सूखे जैसी स्थिति है. मैं कैसे इतनी कम आय के साथ अपना घर चलाऊं और कैसे अपने क़र्ज़ को चुकाऊं.’

उन्होंने कहा, ‘मेरे प्याज की बेहतर गुणवत्ता होने के बावजूद हमें अच्छा मूल्य नहीं प्राप्त हुआ. इसलिए मैंने विरोधस्वरूप महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को 216 रुपये भेज दिया है.’

उत्तरी महाराष्ट्र में नासिक जिले में देश में होने वाले प्याज उत्पादन के लगभग आधा भाग का उत्पादन होता है.

इससे पहले, जिले के निफाद तहसील के एक अन्य किसान संजय साठे ने 750 किलोग्राम प्याज की बिक्री से हुई 1,064 रुपये की अपनी कमाई को विरोधस्वरूप प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजा था.

महाराष्ट्र के ही अहमदनगर जिले में मेहनत और लगन से उपजाई गई बैंगन की फसल के लिए प्रति किलोग्राम महज 20 पैसे की पेशकश से हताश एक किसान ने अपने खेतों में लगी बैंगन की फसल नष्ट कर दी थी ताकि उस पर और पैसे न लगाने पड़े.

रहाटा तहसील के सकूरी गांव के किसान राजेंद्र बावाके ने कहा कि उन्होंने बैंगन की फसल पर दो लाख रुपये के साथ अपनी सारी ऊर्जा लगाई और उन्हें उससे महज 65 हजार रुपये मिले. इससे निराश होकर उन्होंने अपने खेत से बैंगन के सभी पौधे उखाड़ कर फेंक दिए थे.

केवल महाराष्ट्र ही नहीं बल्कि मध्य प्रदेश में भी थोक मंडी में प्याज की कम कीमत मिलने से किसान परेशान हैं. मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी नीमच मंडी में प्याज पचास पैसे प्रति किलोग्राम और लहसुन दो रुपये प्रति किलोग्राम थोक के भाव बिकने के के चलते किसान या तो अपनी फसल वापस ले जा रहे हैं या फिर मंडी में ही छोड़ जा रहे है.

फड़णवीस सरकार को किसानों के साथ हो रही ‘लूट’ की परवाह नहीं- शरद पवार

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) अध्यक्ष शरद पवार ने नासिक जिले में प्याज की कम कीमतों को लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस पर शुक्रवार को हमला करते हुए आरोप लगाया कि फड़णवीस की सरकार किसानों के साथ हो रही ‘लूट’ को लेकर चिंतित नहीं है.

उन्होंने प्याज की कम कीमतों पर कहा कि किसानों को लूटा जा रहा है. पवार ने कहा कि जो नासिक को गोद लेने की बात करते हैं वह स्थानीय किसानों के दुख को लेकर चिंतित नहीं हैं.

पिछले साल नासिक नगर निगम चुनाव से पहले फड़णवीस ने कहा था कि अगर मतदाता भाजपा में भरोसा जताएंगे तो वह शहर को ‘गोद’ लेंगे.

पवार शुक्रवार को मुंबई में हुए एक कार्यक्रम में बोल रहे थे जहां नासिक के पूर्व विधायक अपूर्व हिरे भाजपा छोड़ राकांपा में शामिल हो गए. कार्यक्रम में राकांपा के वरिष्ठ नेता छगन भुजबल की एक टिप्पणी का संदर्भ देते हुए पवार ने कहा, ‘भुजबल ने प्रति किलोग्राम 50-51 पैसे की दर से प्याज बेचे जाने की बात कही.

उन्होंने कहा, ‘यह हमारी (किसानों की) लूट है. और जो (फड़णवीस) जिले को गोद लेने के बात करते हैं वह इस लूट के बावजूद चिंतित नहीं हैं.’

पवार ने कहा कि मुख्यमंत्री की टिप्पणी के बारे में पढ़ कर उन्हें आश्चर्य हुआ. उन्होंने कहा, ‘हमारा ख्याल रखने के लिए हमारे पूर्वज हैं. हमें किसी बाहर वाले की जरूरत नहीं जो हमें गोद ले… किसान समुदाय हमारा असली पालनहार है.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)