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तमिलनाडु: हैरिटेज स्थल पर श्रीश्री रविशंकर के कार्यक्रम पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक

तमिलनाडु के तंजौर में यूनेस्को के वर्ल्ड हैरिटेज स्थल में शामिल बृहदेश्वर मंदिर में श्रीश्री रविशंकर की संस्था आर्ट ऑफ लिविंग का ध्यान शिविर आयोजित होना था. तमिल संगठनों के विरोध के बाद मद्रास हाईकोर्ट द्वारा इस पर अंतरिम रोक लगा दी गई.

श्री श्री रविशंकर (फोटो साभार: srisriravishankar.org)

श्रीश्री रविशंकर (फोटो साभार: srisriravishankar.org)

चेन्नई/मदुरै: तमिलनाडु के तंजौर में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल में शामिल बृहदेश्वर मंदिर में श्रीश्री रविशंकर की संस्था आर्ट ऑफ लिविंग के ध्यान शिविर के तमिल समर्थक संगठनों के विरोध के बाद मद्रास उच्च न्यायालय ने कार्यक्रम पर अंतरिम रोक लगा दी.

एनडीटीवी की खबर के मुताबिक कोर्ट में मामले की सुनवाई सोमवार को भी जारी रहेगी लेकिन आयोजकों ने शुक्रवार-शनिवार को हो रहे इस कार्यक्रम का आयोजन स्थल बदल दिया है.

ज्ञात हो कि यूनेस्को द्वारा ‘ग्रेट लिविंग चोल टेम्पल्स’ के तौर पर श्रेणीबद्ध किए गए तंजौर के प्रसिद्ध बृहदेश्वर मंदिर में आर्ट ऑफ लिविंग का दो दिवसीय कार्यक्रम होना था, जिसके लिए मंदिर परिसर में ही पंडाल आदि लगाकर इंतज़ाम किये गए थे.

संगठन द्वारा एक हैरिटेज स्थल पर इस तरह कार्यक्रम करने पर तमिल देसीय पेरियाक्कम जैसे तमिल समर्थक संगठनों ने नाराज़गी जताई थी. शुक्रवार को मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ ने उनकी याचिका पर सुनवाई के बाद कार्यक्रम के लिए अंतरिम रोक को अनुमति दे दी.

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार सुनवाई के बाद जजों ने कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को इसके अधिकार क्षेत्र में आने वाले मंदिरों में इस तरह के आयोजनों की अनुमति नहीं देनी चाहिए.

साथ ही अदालत ने तंजौर जिलाधीश और पुलिस अधीक्षक को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि मंदिर में कार्यक्रम न हो और उन्हें तत्काल कार्यक्रम के लिए लगाई कुर्सियां और पंडाल हटाने के निर्देश दिए.

याचिकाकर्ता एन. वेंकटेश ने अपनी याचिका में दलील दी थी कि अगर कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति दी गई तो इससे गलत नजीर पेश होगी और भविष्य में भी ऐसे ही कार्यक्रम होंगे.

उन्होंने राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) द्वारा 2016 में दिल्ली में हुए एक कार्यक्रम के कारण यमुना के किनारे को नुकसान पहुंचाने के लिए आर्ट ऑफ लिविंग को जिम्मेदार ठहराने का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से मंदिर पर असर पड़ेगा.

ज्ञात हो कि मार्च 2016 में दिल्ली में यमुना के खादर (डूब क्षेत्र) में श्रीश्री रविशंकर आयोजित विश्व सांस्कृतिक महोत्सव पर पर्यावरणविदों ने सवाल उठाये थे.

दिसंबर 2017 में इस बारे में फैसला देते हुए एनजीटी ने कहा था कि यमुना डूब क्षेत्र को हुए नुकसान के लिए आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन जिम्मेदार है और अगर यमुना को हुए नुकसान की भरपाई में आने वाला ख़र्च पांच करोड़ से ज़्यादा होता है तो उसे आर्ट आॅफ लिविंग से वसूला जाएगा.

तंजौर के इस मंदिर में ध्यान शिविर की खबर के बाद इस बात को लेकर विवाद पैदा हो गया कि मंदिर में कार्यक्रम आयोजित करने के लिए एक निजी संस्था आर्ट ऑफ लिविंग को अनुमति कैसे दी जा सकती है. यह मंदिर धरोहर स्थल है जो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) और राज्य सरकार के एक विभाग के अधिकार क्षेत्र में आता है.

वीसीके महासचिव डी रविकुमार ने समाचार एजेंसी पीटीआई-भाषा से बात करते हुए कहा, ‘कानूनन तंजौर मंदिर में ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने की गुंजाइश नहीं है. यह स्थल एएसआई द्वारा संरक्षित है और यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है. अगर अनुमति दी गई तो यह कानून के खिलाफ है.’

तमिल समर्थक संगठनों ने कार्यक्रम के खिलाफ तंजौर में एक जुलूस निकाला गया था, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया.

वहीं आर्ट ऑफ लिविंग की एक प्रवक्ता ने बताया कि उन्हें हिंदू धार्मिक एवं परमार्थ निधि विभाग तथा एएसआई से पहले ही मंजूरी मिल गई थी. उन्होंने कहा, ‘चूंकि मंदिरों में आध्यात्मिक प्रवचन होना सामान्य है तो इसलिए यहां कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा था.’

आर्ट ऑफ लिविंग की ओर से एक बयान में कहा गया है कि उसके स्वयंसेवक वेदारणयम और पुडुकोट्टई में गज चक्रवात के बाद राहत कार्यों में लगे हुए हैं. रविशंकर का राहत कार्यों का निरीक्षण करने का कार्यक्रम है जबकि स्थानीय लोग चाहते हैं कि वह आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित करें.

बयान में यह भी कहा गया है, ‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ लोग निहित स्वार्थों के लिए झूठे आरोप लगा रहे हैं.’ वहीं आयोजकों ने बताया कि इस कार्यक्रम को मंदिर के समीप एक सभागार में स्थानांतरित कर दिया गया है. उन्होंने बताया कि कार्यक्रम शुक्रवार शाम से शुरू होगा और शनिवार को खत्म होगा.

अदालत के आदेश के बाद आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के वकील एन. कृष्णवेणी ने कहा, ‘हमने यह ज़िम्मेदारी ली है कि सभी पंडाल और सामान आदि को वहां से हटवा दिया जायेगा. हमारा तर्क यही था कि बीते समय में इसी स्थल पर डांस कार्यक्रमों समेत ढेरों आयोजन हो चुके हैं, लेकिन राज्य सरकार का दावा है की वे सभी सरकारी समारोह थे.’

हालांकि एक इतिहासकार ने गोपनीयता की शर्त पर एनडीटीवी से बात करते हुए कहा कि बृहदेश्वर मंदिर जैसे हैरिटेज स्थल पर सरकार सहित किसी को भी कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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