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चुनाव परिणाम LIVE: मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की 15 साल बाद वापसी. राजस्थान में लगातार पांचवीं बार सरकार बदली, भाजपा को मिली हार. तेलंगाना में तेलंगाना राष्ट्र समिति और मिज़ोरम में मिज़ो नेशनल फ्रंट को बहुमत.

Kolkata: Congress workers celebrate the party's good show in the Assembly elections of Rajasthan, Chhattisgarh and Madhya Pradesh, in Kolkata, Tuesday, Dec. 11, 2018. (PTI Photo)   (PTI12_11_2018_000141)

तीन राज्यों में कांग्रेस को मिली सफलता के बाद कोलकाता में ख़ुशी मनाते कांग्रेस कार्यकर्ता. (फोटो: पीटीआई)

पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के बाद मंगलवार को हुई मतगणना में कांग्रेस ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भाजपा को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया है. वहीं तेलंगाना में के. चंद्रशेखर राव की पार्टी तेलंगाना राष्ट्र समिति और मिज़ोरम में मिज़ो नेशनल फ्रंट को स्पष्ट बहुमत मिला है.

मध्य प्रदेश विधानसभा 230 सीटों में से कांग्रेस को 114, भाजपा को 109 और सात सीटों पर अन्य दलों ने जीत हासिल की.

राजस्थान विधानसभा की 199 सीटों में से कांग्रेस को 101, भाजपा को 73 और 25 सीटों पर अन्य दलों ने जीत हासिल की.

छत्तीसगढ़ विधानसभा की 90 सीटों में कांग्रेस का 68, भाजपा को 15 और सात सीटों पर अन्य दलों को जीत मिली. यहां कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिला है. बहुमत के लिए 46 सीटों की ज़रूरत होती है.

तेलंगाना में के. चंद्रशेखर राव की पार्टी तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) को स्पष्ट बहुमत मिला है. यहां विधानसभा की 119 सीटों में से टीआरएस को 88, कांग्रेस को 19, एआईएमआईएम को सात और पांच सीटों पर अन्य दलों को जीत हासिल हुई.

मिज़ोरम में मिज़ो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) को स्पष्ट बहुमत मिला है. विधानसभा की 40 सीटों में एमएनएफ को 26, कांग्रेस को पांच, भाजपा को और आठ सीटों पर अन्य दलों ने जीत हासिल की.


मध्य प्रदेश: सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी कांग्रेस ने सरकार बनाने का दावा पेश किया


भोपाल: मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में सभी 230 सीटों के परिणाम आने के बाद 114 सीटों के साथ कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी.

वहीं 109 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर भारतीय जनता पार्टी रही. इसके अलावा बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को दो, समाजवादी पार्टी को एक और निर्दलीय उम्मीदवारों को चार सीटें मिली हैं.

प्रदेश में 230 सीटों वाली विधानसभा में किसी भी पार्टी के पास सरकार बनाने के लिए 116 सीटें होनी जरूरी हैं.

चूंकि किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला है, ऐसे में सत्ता की कुंजी बसपा, सपा और चार निर्दलीय विधायकों के पास है. दोनों बड़ी राजनीतिक पार्टियों में से जिसे भी इनका समर्थन मिलेगा, सत्ता का ताज उन्हीं के सिर पर सजेगा.

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने मंगलवार रात को ही राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को पत्र लिखकर सरकार बनाने दावा पेश किया था. इसके लिए उन्होंने राज्यपाल से मिलने का वक़्त मांगा था और कहा कि उनके दल के पास सरकार बनाने का पर्याप्त आंकड़ा है और उन्हें अन्य दलों और निर्दलीयों का समर्थन हासिल है.

प्रदेश के मुख्यमंत्री और सत्तारूढ़ भाजपा की ओर से चौथी दफा मुख्यमंत्री पर के दावेदार शिवराज सिंह चौहान अपनी परंपरागत सीट बुधनी से 58,999 मतों के भारी अंतर से चुनाव जीत गए हैं. उन्होंने प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव को पराजित किया.

Bhopal: Muslim women show their fingers marked with indelible ink after casting votes for the Assembly elections, outside a polling station in Bhopal, Madhya Pradesh, Wednesday, Nov 28, 2018. (PTI Photo) (PTI11_28_2018_000048)

(फोटो: पीटीआई)

कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे अर्जुन सिंह के पुत्र और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह अपनी परंपरागत सीट चुरहट से चुनाव हार गए हैं.

वहीं, कांग्रेस ने इस विधानसभा चुनाव में अपने किसी भी नेता को मुख्यमंत्री पद के चेहरे के तौर पर पेश नहीं किया लेकिन कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया मुख्यमंत्री पद के दावेदार माने जा रहे हैं. दोनों नेता फिलहाल क्रमश: छिंदवाड़ा और गुना से लोकसभा का प्रतिनिधित्व करते हैं और इस विधानसभा चुनाव में मैदान में नहीं उतरे थे.

इस चुनाव में कुल 5,04,95,251 मतदाताओं में से 3,78,52,213 मतदाताओं यानी 75.05 प्रतिशत ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया. मतगणना के साथ ही 1,094 निर्दलीय उम्मीदवारों सहित कुल 2,899 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला हो जाएगा, जिनमें से 2,644 पुरूष, 250 महिलाएं एवं पांच ट्रांसजेंडर शामिल हैं.

भाजपा ने सभी 230 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, जबकि कांग्रेस ने 229 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे और एक सीट अपने सहयोगी शरद यादव के लोकतांत्रिक जनता दल के लिये छोड़ी थी. आम आदमी पार्टी (आप) 208 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) 227, शिवसेना 81 और समाजवादी पार्टी (सपा) 52 सीटों पर चुनावी मैदान में थे.


राजस्थान


Raipur: Voters stand in a queue at a polling station to cast their votes for the 2nd phase of Assembly elections, in Raipur, Tuesday, Nov.20, 2018. (PTI Photo)(PTI11_20_2018_000037B)

(फोटो: पीटीआई)

राजस्थान में विधानसभा चुनाव के लिए 199 सीटों में से 98 पर कांग्रेस और 74 पर भाजपा की बढ़त बरक़रार है.

चुनाव आयोग के अनुसार, भाजपा 44 सीट जीत चुकी है. कांग्रेस 63 सीट जीत चुकी है. पांच सीटों पर बसपा का क़ब्ज़ा है. पांच सीट निर्दलीय उम्मीदवारों को मिली है, जबकि एक सीट पर राष्ट्रीय लोक दल विजयी रही.

झालरापाटन सीट से निवर्तमान मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कांग्रेस के मानवेंद्र सिंह को 34,980 मतों हरा दिया है. मानवेंद्र सिंह हाल ही में भाजपा से कांग्रेस में शामिल हुए थे. राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट ने टोंक विधानसभा सीट पर 54,179 मतों से भाजपा के यूनुस खान हराया.

दो बार सांसद रहे पायलट का यह पहला विधानसभा चुनाव है. वहीं युनुस खान भाजपा के एक मात्र मुस्लिम प्रत्याशी रहे जिन्हें उनकी परंपरागत डीडवाना सीट से हटाकर टोंक में पायलट के सामने उतारा गया था.

वसुंधरा राजे सरकार के जल संसाधन मंत्री डॉ. रामप्रताप हनुमानगढ़ सीट पर 15,522 मतों से हारे. कांग्रेस के विनोद कुमार विजयी. कृषि मंत्री प्रभु लाल सैनी भी अंता सीट पर 34,064 मतों से हारे, कांग्रेस के प्रमोद भाया विजयी.

गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया ने उदयपुर सीट पर कांग्रेस की गिरिजा व्यास को 9,307 मतों से हराया. विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल शाहपुरा सीट से 74542 मतों से जीते.

शुरुआती परिणामों पर टिप्पणी करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने कहा है कि राज्य की जनता ने कांग्रेस को अपना जनादेश दिया है. उन्होंने विश्वास जताया कि राज्य में कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिलेगा और वह सरकार बनाएगी.

जिन कांग्रेस प्रत्याशियों को विजयी घोषित किया गया है उनमें राजगढ़ लक्ष्मणगढ़ से जौहरी लाल मीणा, पचपदरा से मदन प्रजापत, कामां से ज़ाहिदा ख़ान, मांडल से रामलाल जाट, निवाई से प्रशांत बैरवा शामिल हैं. वहीं भाजपा के लिए अनूपगढ़ से संतोष बावरी, डग से कालूराम, पिंडवाड़ा आबू से सामाराम गरासिया तथा रेवदर से जगसी राम जीते हैं.

बसपा को दो सीटें मिली हैं. तिजारा से उसके प्रत्याशी संदीप कुमार व नगर से वाज़िब अली जीत गए हैं. माकपा ने खाता खोला. उसके प्रत्याशी गिरधारी लाल डूंगरगढ़ सीट पर 23896 मतों से जीते.

नगर सीट से बसपा उम्मीदवार वाजिद अली ने सपा के नेम सिंह को 25,467 मतों से हराया. पचपदरा सीट से कांग्रेस के मदन प्रजापत ने भाजपा के अमरा राम को 2,395 वोटों से हराया. भाजपा नेता व सांसद कर्नल सोना राम बाड़मेर सीट पर कांग्रेस के मेवाराम जैन से हारे.

राजस्थान में भाजपा ने एक सीट पर जीत दर्ज की. पिंडवाड़ा आबू सीट से समाराम गरासिया ने जीत दर्ज की. गरासिया को 69,360 मत मिले. गरासिया ने कांग्रेस के लाला राम गरासिया को हराया.

अनूपगढ़ सीट पर भाजपा की संतोष बावरी जीतीं. उन्होंने कुलदीप इंदौरा को 21,124 मतों से हराया.

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सचिन पाटलट ने कहा कि रुझान बता रहे कि कांग्रेस को बहुमत मिल रहा है. पिछली बार हमें 21 सीटें मिलीं थी. हमें फाइनल चुनाव परिणामों का इंतज़ार करना चाहिए.

राजस्थान में विधानसभा चुनाव के लिए 199 सीटों पर हुए मतदान के वोटों की गिनती मंगलवार की सुबह शुरू हो गई है. राज्य भर में बनाए गए कुल 35 केंद्रों पर लगभग 20,000 कर्मचारी वोटों की गिनती कर रहे हैं.


छत्तीसगढ़ 


Voting for 18 assembly constituencies of Chhattisgarh, including 12 ‘red zone’ seats, in the first phase will take place in on Monday.(PTI)

(फोटो: पीटीआई)

रायपुर: 90 सीटों वाले छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में कांग्रेस 67, भाजपा 17 की बढ़त. कांग्रेस अब तक दो सीट जीत चुकी है. बसपा दो और अजीत जोगी की पार्टी जनता कांग्रेस ने चार सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं.

इस बीच मुख्यमंत्री रमन सिंह ने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है. उन्होंने कहा, ‘मैंने छत्तीसगढ़ के राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया है.’

छत्तीसगढ़ में 90 सीटों के लिए दो चरणों में 12 नवंबर और 20 नवंबर को मतदान हुआ था. जिसमें 76.60 फीसदी मतदान हुआ था. मालूम हो कि जनता कांग्रेस ने बसपा के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन कर लिया था.

मतगणना के साथ ही मुख्यमंत्री रमन सिंह, उनके मंत्रिमंडल के 11 सदस्यों, विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल, कांकेर लोकसभा क्षेत्र के सांसद विक्रम उसेंडी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष धरमलाल कौशिक, विपक्ष के नेता टीएस सिंहदेव, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल, दुर्ग लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस सांसद ताम्रध्वज साहू, जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी समेत 1,269 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला होगा. इनमें 133 महिला उम्मीदवार भी शामिल हैं.

छत्तीसगढ़ में विधानसभा का यह चौथा चुनाव है. इससे पहले तीन चुनावों में भारतीय जनता पार्टी जीत हासिल कर पिछले 15 वर्षों से सत्ता में है. वहीं कांग्रेस को लगातार हार का सामना करना पड़ा है.

राज्य में भाजपा और कांग्रेस के मध्य ही मुकाबला होता आया है लेकिन इस बार के चुनाव में अजीत जोगी की पार्टी ने बहुजन समाज पार्टी के साथ गठबंधन कर मुकाबला को त्रिकोणीय बना दिया. कुछ सीटों पर उनकी पार्टी का दखल होने से मुकाबला रोचक हो गया है.

लगभग डेढ़ महीने के दौरान चुनावी रैलियों में राजनीतिक पार्टियां गांव, गरीब, किसान, रोजगार और भ्रष्टाचार के मुद्दों को लेकर आमने सामने रही.

राज्य में जीत हासिल करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, बसपा प्रमुख मायावती समेत अनेक नेताओं ने राज्य का दौरा किया और मतदाताओं को संबोधित किया.

चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने चार रैलियों, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने 16 रैलियों, योगी आदित्यनाथ ने 24 रैलियों तथा मुख्यमंत्री रमन सिंह ने राज्य भर में 69 रैलियों को संबोधित किया है. वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राज्य में 19 सभाएं कर अपनी पार्टी के लिए वोट मांगा है.

राज्य की 90 विधानसभा सीटों में से 29 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए तथा 10 सीटें अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित हैं. राज्य में इन सुरक्षित सीटों पर बड़ी जीत सत्ता तक आसान पहुंच का रास्ता है.

2013 में हुए चुनाव में भाजपा ने 49 सीटों पर जीत के साथ सरकार बनाई थी. वहीं कांग्रेस को 39 सीटों पर, बहुजन समाज पार्टी को एक सीट पर जीत मिली थी. जबकि एक सीट पर स्वतंत्र उम्मीदवार की जीत हुई थी.


तेलंगाना 


हैदराबाद: तेलंगाना में सत्तारूढ़ टीआरएस ने विधानसभा चुनाव में कुल 119 सीटों में 87 सीटों पर बढ़त हासिल है. इनमें से 62 सीटें जीत चुकी है. कांग्रेस 19 सीटों पर बढ़त बरक़रार है. पार्टी ने इसमें से 14 सीटें जीत चुकी है.

भाजपा सिर्फ़ एक सीट पर आगे चल रही है. एआईएमआईएम सात सीटों पर आगे हैं, इसमें से तीन सीटें वह जीत चुकी है.

टीआरएस अध्यक्ष एवं कार्यवाहक मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने इस साल सितंबर में विधानसभा भंग कर दी थी, जिस कारण तय समय से करीब आठ महीने पहले राज्य में चुनाव कराने पड़े. टीआरएस के पास पिछली विधानसभा में 63 सीटें थीं.

राव के भतीजे और निवर्तमान सरकार में मंत्री टी. हरीश राव ने कहा, ‘जनता ने हमारे नेता में एकबार फिर विश्वास दिखाया है और वे विपक्ष द्वारा चुनाव में प्रचारित की गई गलत जानकारी पर विश्वास नहीं करते.’

टीआरएस के कार्यालयों सहित तेलंगाना भवन और हैदराबाद मुख्यालय पर जश्न मनना शुरू हो गया है. टीआरएस कार्यकर्ता वहां ढोल की धुन पर नाचते दिखे, पटाखे फोड़े गए और मिठाइयां भी बांटी गई.

कांग्रेस के उम्मीदवार 22 सीटों पर आगे चल रहे हैं और उसकी सहयोगी तेलुगु देशम पार्टी दो सीट पर आगे है. असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाला एआईएमआईएम पांच सीटों पर, भाजपा तीन सीटों पर आगे है और अन्य दो सीटों पर आगे है.

कार्यवाहक मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने 51,000 से ज़्यादा मतों के अंतर से गजवेल विधानसभा सीट पर जीत दर्ज की. राव को 1,23,996 मत मिले जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के वनतेरु प्रताप रेड्डी को 66,675 वोट मिले.

एआईएमआईएम नेता अकबरूद्दीन ओवैसी तेलंगाना की चंद्रयानगुट्टा सीट से पांचवीं बार जीते. उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा प्रत्याशी सैयद शहजादी को 80,000 से अधिक मतों के अंतर से हराया.

आधिकारिक सूचनाओं के मुताबिक, टीआरएस के संजय कुमार ने जगतियाल सीट पर कांग्रेस के अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी टी. जीवन रेड्डी को 61185 मतों के अंतर से हराया.

राव के भतीजे एवं कार्यवाहक सरकार में वरिष्ठ मंत्री टी. हरीश राव ने सिद्दिपेट से अपनी निकतटम टीजेएस के प्रतिद्वंद्वी भवानी रेड्डी को 1,18,499 मतों के अंतर से मात दी.

टीआरएस अध्यक्ष राव के बेटे एवं मंत्री के टी. राम राव सिरसिल्ला में अपने प्रतिद्वंद्वी, कांग्रेस उम्मीदवार केके महेंद्र रेड्डी को 88,000 मतों के अंतर से मात दी.

चुनाव में सत्तारूढ़ टीआरएस और भाजपा मैदान में अकेले उतरे हैं और कांग्रेस ने तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी), भाकपा और तेलंगाना जन समिति (टीजेएस) के साथ गठबंधन किया है.

तेलंगाना विधानसभा की 119 सीटों के लिए मतदान सात दिसंबर को हुआ था.

तेलंगाना के गठन के बाद पहली बार कुल 119 सीटों पर सात दिसंबर को हुए चुनाव में 73.20 प्रतिशत मतदान हुआ था. इससे पहले चुनाव आंध्र प्रदेश में हुआ था. तेलंगाना का गठन आंध्र प्रदेश के एक हिस्से को काट कर किया गया.

तेलंगाना में विधानसभा चुनाव 2019 के लोकसभा चुनावों के साथ होने थे. लेकिन राज्य कैबिनेट की सिफारिश पर छह सितंबर को विधानसभा भंग किए जाने के कारण वहां चुनाव अनिवार्य हो गया.


मिज़ोरम 


ज़ोरामथांबा को एमएनएफ विधायक दल का नेता चुना गया. (फोटो साभार: एएनआई)

ज़ोरामथांबा को एमएनएफ विधायक दल का नेता चुना गया. (फोटो साभार: एएनआई)

आइज़ोल: मिजोरम विधानसभा की 40 सीटों में 26 पर मिज़ो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) ने जीत दर्ज कर ली है. एमएनएफ की ओर से यह अब तक की सबसे बड़ी जीत है. इससे पहले पार्टी ने इतनी सीटें नहीं जीती थीं.

वहीं कांग्रेस को अब तक पांच सीटें मिली हैं. एक सीट पर भाजपा और आठ सीटों पर निर्दलीयों ने जीत दर्ज की है.

एमएनएफ ने एक बयान जारी कर कहा है कि मिज़ोरम में जोरामथांगा को सर्वसम्मति से एमएनएफ विधायक दल का नेता चुना गया. दल ने कहा कि जोरामथंगा सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए शाम छह बजे मिज़ोरम के राज्यपाल के राजशेखरन से मिलेंगे.

उधर, कांग्रेस से निवर्तमान मुख्यमंत्री लाल थानहावला दोनों सीटों से हार गए हैं. लाल थानहावला पिछले 10 साल से मिज़ोरम के मुख्यमंत्री थे.

इस बीच सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मिज़ोरम के मुख्यमंत्री लाल थानहावला ने राज्यपाल के. राजशेखरन को अपना इस्तीफा सौंप दिया है.

लाल थानहावला को सर्चिप सीट से ज़ोरम पीपुल मूवमेंट (इंडिपेंडेंट) पार्टी के लालदुहोमा ने 410 वोटों से हराया. वहीं चाम्फाई साउथ सीट से मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) के टीजे लालनुंगथ्वांगा ने लाल थानहावला को 1,049 वोटों से हराया.

कांग्रेस ने 2013 के विधानसभा चुनाव में 34 सीटों पर जीत हासिल की थी जबकि एमएनएफ पांच सीट पर कब्जा कर पाई थी. एमएनएफ से 2008 में राज्य की सत्ता छिन गई थी.

28 नवंबर को पूर्वोत्तर राज्य मिजोरम की सभी 40 विधानसभा सीटों पर मतदान हुआ था और करीब 75 फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया था.

राज्य निर्वाचन आयोग से मिली जानकारी के अनुसार, राज्य में 7,70,395 मतदाता हैं जिनमें 3,94,897 महिला मतदाता भी शामिल हैं. चुनावी मुकाबले में 209 प्रत्याशी मैदान में है जिनमें से 15 महिलाएं हैं.

कांग्रेस और एमएनएफ 1987 से ही मिजोरम की सत्ता पर काबिज हैं. भारतीय जनता पार्टी इस चुनाव में कांग्रेस को हटाकर राज्य में अपना सत्ता काबिज करने के प्रयास में है.

गौरतलब है कि पूर्वोत्तर के अन्य सभी राज्यों में भाजपा या भाजपा के सहयोग से बनी सरकारें हैं.