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राफेल मामले में नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ लोकसभा में विशेषाधिकार हनन का नोटिस

राफेल मामले की सुनवाई के दौरान कैग रिपोर्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गलत तथ्य देने के आरोप में कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है.

New Delhi: Prime Minister Narendra Modi during BJP Parliamentary Party meeting, in New Delhi on Tuesday, July 31, 2018. (PTI Photo/Atul Yadav)(PTI7_31_2018_000078B)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: लोकसभा में सोमवार को राफेल मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ विशेषाधिकार के हनन का नोटिस दिया गया. नोटिस में आरोप लगाया गया है कि मोदी सरकार ने राफेल मामले की सुनवाई के दौरान में सुप्रीम कोर्ट में गलत तथ्य पेश किया.

लाइव लॉ के मुताबिक, केरल से कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने लोकसभा की प्रक्रिया के नियम 222 के तहत ये नोटिस पेश किया है. नोटिस में कहा गया है कि सरकार ने जानबूझ कर सुप्रीम कोर्ट में राफेल पर नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) रिपोर्ट और पब्लिक एकाउंट्स कमेटी (पीएसी) द्वारा जांच के बारे में गलत तथ्य पेश किया.

बता दें कि राफेल मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले में जिस कैग रिपोर्ट का ज़िक्र है, उसके बारे में याचिकाकर्ताओं और पब्लिक एकाउंट्स कमेटी का कहना है कि ऐसी कोई रिपोर्ट न ही सार्वजनिक की गई है न ही संसदीय समिति को सौंपी गई है.

बता दें कि बीते 14 दिसंबर को कोर्ट ने राफेल मामले में जांच की मांग वाली सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया था. हालांकि फैसला आने के कुछ ही घंटे बाद फैसले में लिखे ‘कैग रिपोर्ट और पीएसी द्वारा इसकी जांच’ के अंश को लेकर विवाद खड़ा हो गया.

राफेल सौदे में विमान की कीमतों के बारे में हुए विवाद पर फैसले के 25वें पेज पर लिखा है,

‘कीमतों का विवरण नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) के साथ साझा की जा चुका है और कैग की इस रिपोर्ट को पब्लिक एकाउंट्स कमेटी (पीएसी) द्वारा जांचा जा चुका है. इस रिपोर्ट का एक संपादित अंश संसद के सामने रखा गया है और यह सार्वजनिक है.’

The pricing details have, however, been shared with the Comptroller and Auditor General (hereinafter referred to as“CAG”), and the report of the CAG has been examined by the Public Accounts Committee (hereafter referred to as “PAC”). Only a redacted portion of the report was placed before the Parliament, and is in public domain.”

हालांकि पीएसी के सदस्यों का कहना है कि उनके पास इस तरह की कोई रिपोर्ट नहीं आयी है न ही उन्होंने इसे जांचा है.

बीते शुक्रवार शाम को की गई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीएसी अध्यक्ष और कांग्रेस सांसद मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया कि फैसले में किए गए दावे सच नही हैं.

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को राफेल की कीमत से संबंधित जानकारी सीलबंद लिफाफे में सौंपी थी और कोर्ट ने अपने फैसले में जो बातें लिखी हैं वो सरकार द्वारा लिफाफे में दी गई जानकारी पर आधारित है.

इसी बात को लेकर कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल आरोप लगा रहे हैं कि मोदी सरकार ने कोर्ट को जानबूझकर गलत जानकारी दी है.

इस मामले में विवाद बढ़ने के बाद केंद्र ने बीते शनिवार को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर राफेल लड़ाकू विमान सौदे पर कोर्ट के फैसले में उस पैराग्राफ में संशोधन की मांग की है जिसमें नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) रिपोर्ट और संसद की लोक लेखा समिति (पीएसी) के बारे में बात की गई है.

सरकार का कहना है कि उन्होंने कोर्ट में जो जानकारी दी थी उसका मतलब ये नहीं था कि ‘कैग रिपोर्ट को पीएसी द्वारा जांचा गया है’, बल्कि उसका मतलब ये था कि ‘कैग रिपोर्ट को पीएसी द्वारा जांचा जाएगा.’

इसी विवाद पर कांग्रेस सांसद द्वारा नरेंद्र मोदी के खिलाफ विशेषाधिकार के हनन का नोटिस दिया गया है.

Rafale issue

कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ लोकसभा में दिया गया विशेषाधिकार के हनन का नोटिस

कांग्रेस सांसद ने अपने नोटिस में लिखा है, ‘राफेल की कीमत संबंधी मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला सरकार द्वारा दी गई जानकारी पर आधारिक है कि कैग रिपोर्ट को पीएसी द्वारा जांचा गया है. अगर कोई कैग रिपोर्ट है तो उसे संसद के सामने पेश किया जाना था और संसद उसे आगे पीएसी के पास जांच के लिए भेजती.’

उन्होंने आगे लिखा, ‘हालांकि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को विश्वास दिलाया कि ये चीजें की गईं हैं और इसलिए कोर्ट ने इन तथ्यों को अपने फैसले में शामिल किया. चूंकि प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि राफेल पर कैग रिपोर्ट तैयार की गई है और इसे पीएसी द्वारा जांचा गया है, इसलिए ये विशेषाधिकार के हनन का मामला है.’

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