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मंदिर से जुड़ी भड़काऊ बयानबाज़ी पर प्रतिक्रिया न दें मुसलमान: बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी

उत्तर प्रदेश बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक ज़फरयाब जिलानी ने बताया कि वे अदालती कार्यवाही से संतुष्ट हैं, लेकिन अगर मोदी सरकार मंदिर बनाने पर कोई अध्यादेश या क़ानून लाती है, तो उसे चुनौती दी जाएगी.

(फाइल फोटो: पीटीआई)

(फाइल फोटो: पीटीआई)

लखनऊ: अयोध्या मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू होने से पहले मंगलवार को यहां बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी (बीएमएसी) की एक बैठक हुई, जिसमें तय किया गया कि मुसलमान मंदिर के नाम पर कथित भड़काऊ बयानबाजी पर कोई प्रतिक्रिया न दें.

बैठक में इस मामले में हो रही अदालती कार्यवाही पर संतोष जाहिर किया गया. इस बैठक में बाबरी मस्जिद से जुड़े तमाम मुकदमों के बारे में, हाल में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) द्वारा आयोजित धर्म सभा और धर्म संसद कार्यक्रमों में की गई कथित भड़काऊ बयानबाजी और मंदिर निर्माण के लिए अध्यादेश लाए जाने की आशंकाओं के बारे में विस्तृत विचार-विमर्श किया गया.

उत्तर प्रदेश बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक वरिष्ठ अधिवक्ता ज़फरयाब जिलानी ने बताया कि बैठक में सभी सदस्यों की एक राय थी कि मंदिर के नाम पर जो बयानबाजी हो रही है, उस पर कोई प्रतिक्रिया न दी जाए. अगर कोई भड़काऊ बात कही जाए तो मुसलमान कोई उत्तेजनापूर्ण प्रतिक्रिया न दें ताकि जो लोग धार्मिक भावनाएं भड़काकर वोटों का ध्रुवीकरण करना चाहते हैं, उनके मंसूबे कामयाब नहीं हों.

उन्होंने बताया कि इसके लिए कार्ययोजना तय की गई है कि ज्यादा से ज्यादा मुसलमानों तक यह बात पहुंचाई जाए कि मंदिर मामले को लेकर अभी तक उनका रवैया संतोषजनक रहा है और आगे भी वह इसी तरह धैर्य से काम लें.

बैठक में यह भी राय बनी कि जैसा ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड तय कर चुका है कि अगर मंदिर निर्माण के लिए संसद में कोई अध्यादेश लाया जाएगा तो उसको सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी.

मालूम हो कि अक्टूबर में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की तत्काल सुनवाई टाल दी थी, जिसके बाद से भाजपा और आरएसएस और हिंदूवादी संगठनों के कुछ नेताओं की ओर से मंदिर बनाने के लिए संसद में अध्यादेश लाने की बात कही जाने लगी.

कमेटी की इस बैठक में करीब 70 सदस्यों ने हिस्सा लिया था. समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कमेटी के एक सदस्य ने बताया कि यह एक नियमित बैठक थी, जिसका कोई विशेष एजेंडा नहीं था. हालांकि मोदी सरकार के मंदिर के लिए अध्यादेश या कानून लाने की संभावना पर चर्चा हुई.

वहीं जिलानी ने यह भी कहा कि कमेटी सुप्रीम कोर्ट से यह गुज़ारिश करेगी कि वह इस मामले में जल्दबाज़ी न करे और सभी ज़रूरी दस्तावेज और इसके महत्वपूर्ण पहलुओं का अध्ययन करने के बाद ही अपना फैसला दे.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)