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उत्तर प्रदेश: हिरासत में दलित की मौत, आरोपियों की गिरफ़्तारी की मांग को लेकर दलित महापंचायत

मृतक की पत्नी का आरोप है कि पुलिस हिरासत में यातना के कारण उसके पति की जान गयी है. उसने यह आरोप भी लगाया कि पति को छोड़ने के लिए पुलिस ने रिश्वत मांगी थी.

(फोटो साभार: ट्विटर/यूपी पुलिस)

(फोटो साभार: ट्विटर/यूपी पुलिस)

अमरोहा: उत्तर प्रदेश के अमरोहा में पुलिस हिरासत में दलित युवक बालकिशन जाटव उर्फ बाली की मौत के मामले में हत्यारोपित पुलिसकर्मियों की तत्काल गिरफ्तारी और पीड़ित परिवार को लखनऊ के विवेक तिवारी हत्याकांड की तर्ज पर मुआवजा राशि व सरकारी नौकरी की मांग को लेकर दलित संगठनों ने शनिवार को महापंचायत की.

इससे पहले शुक्रवार को अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग की टीम की सदस्य साध्वी गीता से बालकिशन की पत्नी कुंती ने आपबीती बयां की. साध्वी गीता ने मामले की निष्पक्ष जांच और न्याय का भरोसा दिलाया.

साध्वी गीता ने बालकिशन जाटव के हत्यारोपी पुलिसकर्मियों की दो दिन के अंदर हर हाल में गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के लिए पुलिस के उच्चाधिकारियों को चेतावनी दी.

उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आयोग ने इस मामले को स्वत: संज्ञान लेते हुए अमरोहा पुलिस अधीक्षक को मामले की जांच करने व दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कार्यवाही करके अनुपालन आख्या तीन दिन के अंदर भेजने को कहा है.

उत्तर प्रदेश के अमरोहा में धनौरा मंडी थाने में 26 दिसंबर को कथित पुलिस हिरासत के दौरान 30 वर्षीय दलित युवक बालकिशन जाटव की मौत से संबंधित मीडिया ख़बरों पर स्वत: संज्ञान लेते हुए आयोग ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव एवं पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी करके चार सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है.

आयोग ने स्पष्टीकरण मांगा कि पुलिस हिरासत में हुई उक्त मौत के बारे में आयोग को सूचित क्यों नहीं किया गया.

पुलिस ने चोरी के एक प्रकरण में बालकिशन जाटव को 23 दिसंबर को गिरफ्तार किया था. युवक के परिजनों का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उसे छोड़ने के लिए पांच लाख रुपये रिश्वत मांगी थी जो वे नहीं दे सके. उसके बाद युवक को बर्बर यातना दी गई.

मृतक के परिजनों का आरोप है कि वे लोग एक विवाह में शामिल होने के बाद घर लौट रहे थे, उसी समय पुलिस ने युवक को उठा लिया. उसे बिना किसी शिकायत हवालात में रखा गया और कथित तौर पर यातना दी गयी.

अमरोहा एसपी बृजेश कुमार सिंह ने बताया कि एक इंस्पेक्टर और एक सब इंस्पेक्टर सहित छह पुलिसकर्मियों के खिलाफ हिरासत में हत्या के आरोप में कार्रवाई की गई. इंस्पेक्टर अरविंद मोहन शर्मा, सब इंस्पेक्टर मनोज उपाध्याय, हेड कॉन्स्टेबल रवींद्र राणा तथा कॉन्स्टेबल विनीत चौधरी, जितेंद्र एवं विवेक को मृतक के रिश्तेदार जय प्रकाश की शिकायत पर इन छह पुलिसकर्मियों को अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार रोकथाम) कानून के तहत आरोपी बनाया गया.

मृतक की पत्नी कुंती ने पति की हत्या का हर्जाना मांगा है. उसने उत्तर प्रदेश सरकार से ख़ुद के लिए नौकरी भी मांगी है.

पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार अमरोहा में मंडी धनौरा थानाक्षेत्र के बसी शेरपुर के निवासी बालकिशन को पुलिस ने रविवार को उठाया. मकसद चोरी की मोटरसाइकिल की खरीद से जुडे़ मामले में पूछताछ था. उसे पुलिस ने हवालात में बंद कर दिया.

मंगलवार और बुधवार की मध्यरात्रि हालत बिगड़ने पर बालकिशन को अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया.

मृतक की पत्नी का आरोप है कि पुलिस हिरासत में यातना के कारण उसके पति की जान गयी है. उसने यह आरोप भी लगाया कि पति को छोड़ने के लिए पुलिस ने पैसे मांगे थे.