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आतंकरोधी अभियान में सुरक्षाकर्मी या आतंकवादी की मौत ख़ुशी की बात नहीं: जम्मू कश्मीर डीजीपी

जम्मू कश्मीर के पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने कहा कि हमारी कोशिशों के बावजूद कुछ युवा आतंकवादी गतिविधियों में शामिल हुए और कुछ मारे भी गए. हमें इस पर दुख और अफ़सोस है. हम हिंसा के माहौल में हैं और हिंसा, हिंसा को जन्म देती है.

जम्मू कश्मीर पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह (फोटो साभार: ट्विटर/जम्मू कश्मीर पुलिस)

जम्मू कश्मीर पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह (फोटो साभार: ट्विटर/जम्मू कश्मीर पुलिस)

श्रीनगर: जम्मू कश्मीर के पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने बुधवार को कहा कि आतंकवाद रोधी अभियान में किसी सुरक्षा कर्मी या आतंकवादी की मौत होना खुशी की बात नहीं होती है.

सालाना संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि कश्मीर में 2017 की तुलना में हिंसा की घटनाएं 2018 में अधिक थीं, क्योंकि पाकिस्तान में मौजूद आतंकी समूह सीमा पार से दहशतगर्द भेजते रहे.

बहरहाल, उन्होंने कहा कि आतंकवाद रोधी अभियान में किसी की भी मौत हो, चाहे वह सुरक्षा कर्मी हो, आतंकवादी हो, या आम नागरिक हो, उस पर गर्व नहीं किया जा सकता है. इसे सफलता का पैमाना नहीं माना  जा सकता।

सिंह ने पिछले साल सितंबर में ही राज्य के डीजीपी का प्रभार संभाला है.

उन्होंने कहा, ‘हमारी कोशिशों के बावजूद कुछ युवा आतंकवादी गतिविधियों में शामिल हुए और कुछ मारे भी गए. हमें इस पर दुख और अफसोस है. यह हमारे लिए कोई खुशी की बात नहीं है. हम हिंसा के माहौल में हैं और हिंसा, हिंसा को जन्म देती है.’

ट्रिब्यून की खबर के अनुसार उन्होंने यह भी कहा कि बीते साल 250 आतंकियों की मौत को आंकड़ों के आधार पर जीत कह सकते हैं, लेकिन हिंसा का इस स्तर तक आना चिंताजनक है.

डीजीपी ने कहा, ‘ऐसी परिस्थितियों में, हमें आतंकवाद रोधी अभियान शुरू करने पड़े. ऐसे अभियानों में चाहे कोई आतंकवादी मारा जाए या किसी सैनिक, पुलिस कर्मी या आम नागरिक की मौत हो, उसकी प्रशंसा नहीं जा सकती है.’

सिंह ने कहा कि पिछले साल बड़ी संख्या में आतंकवादियों को मारा गया है जो शायद कामयाबी है लेकिन यह भी दुखद है कि कई सुरक्षा कर्मियों की मौत हुई है.

बीते साल घाटी में 91 सुरक्षाकर्मियों समेत 45 पुलिसकर्मियों और 44 आम नागरिकों की मौत हुई.

सिंह ने यह भी बताया कि पिछले साल भी ज़्यादा से ज़्यादा आतंकियों को सरहद के उस पार खदेड़ने की कोशिश जारी रही क्योंकि बड़ी संख्या में घुसपैठ की कोशिशें बढ़ीं, जिन्हें नाकाम किया गया.

उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों ने बीते साल 97 आतंकवाद रोधी अभियान चलाए जिसमें से 83 में आम लोगों की जान-माल को कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ.

उन्होंने हाल ही में श्रीनगर की जामिया मस्जिद पर इस्लामी काले झंडे फहराए जाने की घटना के बारे में कहा कि उसका उद्देश्य ऐसे तत्वों की मौजूदगी दिखाना था. उन्होंने कहा, ‘आईएसआईएस उतना बड़ा नहीं है लेकिन लोगों को उस रास्ते पर कट्टर बनाया जा रहा है, इस बात को नकारा नहीं जा सकता।’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)