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प्रसार भारती ने आकाशवाणी के राष्ट्रीय चैनल समेत बंद किए पांच क्षेत्रीय चैनल

ऑल इंडिया रेडियो के महानिदेशक की ओर से जारी आदेश के अनुसार प्रसार भारती ने ख़र्च में कटौती और प्रसारण सेवाओं को तर्कसंगत बनाने के लिए यह फ़ैसला लिया है.

ऑल इंडिया रेडियो का राष्ट्रीय चैनल (फोटो साभार: फेसबुक/National Channel)

ऑल इंडिया रेडियो का राष्ट्रीय चैनल (फोटो साभार: फेसबुक/National Channel)

नई दिल्ली: लोक प्रसारक प्रसार भारती ने ‘खर्च में कटौती करने के उपायों’ और सेवाओं को ‘तार्किक’ बनाने के लिए ऑल इंडिया रेडियो (एआईआर) के राष्ट्रीय चैनल और पांच शहरों में क्षेत्रीय प्रशिक्षण अकादमी को बंद करने फैसला किया है.

एआईआर के महानिदेशक की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि टोडापुर और नागपुर आदि में राष्ट्रीय चैनल में पदस्थापित कार्यक्रम, तकनीकी, मंत्रालयी और अन्य कर्मचारियों के अलावा पांच शहरों में क्षेत्रीय प्रसारण एवं मल्टीमीडिया अकादमी (आरएबीएम) में काम करने वालों की पदस्थापना संगठन की जरूरत के मुताबिक की जा सकती है.

प्रसार भारती ने आकाशवाणी की सेवाओं को तर्कसंगत बनाने और खर्च में कटौती के उपायों के तहत आदेश जारी किया है. यह पत्र 24 दिसंबर 2018 को आकाशवाणी के महानिदेशक को भेजा गया.

इसमें तत्काल प्रभाव से एआईआर के राष्ट्रीय चैनल और अहमदाबाद, हैदराबाद, लखनऊ, शिलांग और तिरुवनंतपुरम में स्थित क्षेत्रीय प्रसारण एवं मल्टीमीडिया अकादमी (आरएबीएम) को बंद करने का फैसला किया गया है .

तीन जनवरी के आदेश में कहा कि राष्ट्रीय चैनल को सहेज कर रखे जाने वाले कार्यक्रमों के डिजिटलीकरण और संरक्षण के लिए दिल्ली में केंद्रीय अभिलेखागार भेजना चाहिए.

प्रसार भारती के सूत्रों के मुताबिक राष्ट्रीय चैनल को बंद करने का निर्णय पर करीब एक साल से लंबित था. उनके अनुसार, ‘राष्ट्रीय प्रसारण के लिए काम करने वाले अधिकतर वरिष्ठ अधिकारी रिटायर हो चुके हैं. इसका ऑडियंस कनेक्ट भी बहुत कम है, इसे बस नाम के लिए किसी तरह चलाया जा रहा है.’

मालूम हो कि शाम छह बजे से सुबह छह बजे तक प्रसारित होने वाला राष्ट्रीय चैनल 1987 में अस्तित्व में आया था और राष्ट्रीय मुद्दों से लोगों को रूबरू कराने में चैनल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

चैनल में हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी भाषा में कई तरह के कार्यक्रम प्रसारित किए गए, जिनका उद्देश्य आम जनता और साधारण वर्ग  के श्रोताओं तक पहुंचना था. इस चैनल के कार्यक्रमों की पहुंच देश की 76% आबादी और 64% क्षेत्र तक थी.

बढ़ते डिजिटलीकरण में प्रसार भारती ने भी अपने पुराने कार्यक्रमों को डिजिटल मंचों पर लाने की कोशिश की है.

प्रसार भारती के डिजिटलीकरण कार्यक्रम के एक सदस्य ने इस फैसले के बारे में द वायर  से बात करते हुए कहा, ‘यह असल में एआईआर के डिजिटलीकरण की प्रक्रिया का हिस्सा है. हम चैनलों का आधुनिकीकरण करते हुए उन्हें मोबाइल ऐप की शक्ल में ला रहे हैं, जहां इसके सुनने वाले कहीं ज़्यादा हैं. पहुंच कहीं ज़्यादा है.’

उन्होंने राष्ट्रीय चैनल को बंद करने की वजह कमज़ोर ट्रांसमिशन बताई.

उन्होंने कहा, ‘राष्ट्रीय चैनल को बंद करने के फैसले की सबसे बड़ी वजह इसका कमज़ोर ट्रांसमिशन है. नागपुर ट्रांसमिशन की क्षमता केवल एक मेगावॉट है और इसे बड़ी संख्या में श्रोता सुन ही नहीं सकते. डिजिटल रेडियो के समय में ऐसी तकनीक पर्याप्त नहीं है.’

यह पूछे जाने पर कि बेहतर ट्रांसमीटर इस्तेमाल करने के बारे में क्यों नहीं सोचा गया, उन्होंने जवाब दिया, ‘प्रसार भारती के सीनियर मैनेजमेंट का मानना था कि ऐसे चैनल में निवेश करने का कोई फायदा नहीं है, जिसका मजबूत श्रोता आधार नहीं है. वैसे भी, अब एआईआर के कई काम आउटसोर्स किए जायेंगे, जैसे एआईआर की वेबसाइट का जिम्मा निजी कंपनी के हाथों में होगा.’

क्या होगा कर्मचारियों का?

सूत्रों के मुताबिक ‘राष्ट्रीय चैनल के पास कार्यक्रमों का समृद्ध खजाना है और कर्मियों की फिर से पदस्थापना की जाएगी.’

हालांकि 3 जनवरी के आदेश के अनुसार ‘नागपुर, टोडापुर और बाकी जगहों पर काम कर कर्मचारियों रहे को संस्थान की ज़रूरत के अनुसार नियुक्त किया जायेगा.’ वहीं  एआईआर के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है, ‘किसी की भी छंटनी नहीं की जाएगी.’

मीडिया में आयी ख़बरों के मुताबिक एआईआर का कुछ धड़ा इस फैसले से खुश नहीं है क्योंकि उनका मानना है कि राष्ट्रीय चैनल प्रसारण का महत्वपूर्ण हिस्सा है और एक साथ इसे बंद करने की जगह खर्च में कटौती के अन्य विकल्प तलाश जाने चाहिए.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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