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नवोदय विद्यालय में आत्महत्याओं के मामले में मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने जांच समिति गठित की

बीते दिनों आरटीआई के तहत मिली जानकारी में सामने आया था कि साल 2013 से लेकर 2017 के बीच स्कूल के 49 बच्चों ने आत्महत्या की, जिनमें से आधे दलित और आदिवासी थे. मानवाधिकार आयोग ने एचआरडी मंत्रालय को भेजा था नोटिस.

बदायूं का नवोदय विद्यालय (फोटो साभार: jnvbudaun.org)

बदायूं का नवोदय विद्यालय (फोटो साभार: jnvbudaun.org)

नई दिल्ली: मानव संसाधन विकास (एचआरडी) मंत्रालय ने 2013 से 2017 के बीच जवाहर नवोदय विद्यालयों (जेएनवी) में 49 छात्रों की कथित आत्महत्या के पीछे की परिस्थितियों का पता लगाने के लिए एक कार्यबल का गठन किया है.

एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि मंत्रालय ने 630 नवोदय विद्यालयों में से प्रत्येक में दो पूर्णकालिक काउंसलर (एक महिला एवं एक पुरुष) रखने संबंधी एक प्रस्ताव को भी मंजूरी के लिए व्यय विभाग को भेज दिया है.

बयान में बताया गया कि मंत्रालय ने 31 दिसंबर 2018 को एचआरडी मंत्रालय की स्वीकृति के साथ डॉ. जितेंद्र नागपाल की अध्यक्षता में एक कार्यबल गठित किया था जो नवोदय विद्यालयों में हुई छात्रों की कथित आत्महत्या के कारणों का पता लगाएगा.

यह कार्यबल उन परिस्थितियों पर विचार करेगा जिनके चलते नवोदय आवासीय विद्यालयों के छात्रावास में रह रहे छात्रों को आत्महत्या करने पर मजबूर होना पड़ा. साथ ही यह कार्यबल आत्महत्या पर रोक लगाने के तरीके एवं साधनों का सुझाव भी देगा.

मालूम हो कि बीते दिनों इंडियन एक्सप्रेस द्वारा दायर किए गए सूचना का अधिकार (आरटीआई) आवेदन के जरिए इस बात का खुलासा हुआ था कि केंद्र सरकार के अधीन नवोदय विद्यालयों में पिछले पांच सालों में 50 के करीब बच्चों ने आत्महत्या की है.

इस जानकारी के मुताबिक साल 2013 से लेकर 2017 के बीच में 49 बच्चों ने आत्महत्या की और इसमें से आधे दलित और आदिवासी हैं. ज्यादातर आत्महत्या करने वाले बच्चों में लड़के हैं.

इस बारे में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने मामले के संबंध में एचआरडी मंत्रालय को नोटिस भेजा था.

एनएचआरसी ने मीडिया में आयी खबरों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के सचिव से छह सप्ताह में जवाब तलब करते हुए पूछा था कि क्या परिसर में ऐसे प्रशिक्षित सलाहकार उपलब्ध हैं, जिनसे किशोर छात्र खुलकर बात कर सकें और उनके साथ अपनी भावनाएं साझा कर सकें.

ज्ञात हो कि नवोदय विद्यालयों की शुरुआत साल 1985-86 में हुई थी और इसे उच्च श्रेणी के संस्थान के रूप में देखा जाता है. नवोदय विद्यालय देश के हजारों पिछड़े और गरीब बच्चों के लिए अच्छी शिक्षा का जरिया है.

साल 2012 से इन विद्यालयों का क्लास 10 के लिए पास परसेंटेज 99 प्रतिशत से ज्यादा और क्लास 12 के लिए 95 प्रतिशत से ज्यादा रहा है. पास परसेंटेज के ये आंकड़े महंगे प्राइवेट स्कूलों के मुकाबले काफी ज्यादा हैं.

देश में इस समय 635 नवोदय विद्यालय हैं, जो पूरी तरह आवासीय विद्यालय हैं. इन्हें मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय के अधीन स्वायत्त संस्था नवोदय विद्यालय समिति (एनवीएस) द्वारा चलाया जाता है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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