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छत्तीसगढ़ में सीबीआई इजाज़त के बिना नहीं कर सकेगी जांच, सरकार ने सहमति ख़त्म की

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि कि एनडीए सरकार के तहत सीबीआई की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा हुआ और इसलिए वे सीबीआई को बिना अनुमति के काम करने की इजाज़त नहीं दे सकते.

New Delhi: Congress leader Bhupesh Baghel, one of the front runners for Chhattisgarh Chief Minister's post, leaves from the residence of party President Rahul Gandhi, in New Delhi, Saturday, Dec 15, 2018. (PTI Photo/Arun Sharma) (PTI12_15_2018_000027B)

भूपेश बघेल (फोटो: पीटीआई)

रायपुर: कांग्रेस शासित छत्तीसगढ़ ने राज्य में मामलों की जांच के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को दी गई सामान्य सहमति वापस ले ली है. आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल द्वारा इसी तरह का निर्णय लेने के बाद सीबीआई से सामान्य सहमति ख़त्म करने वाला छत्तीसगढ़ अब तीसरा राज्य बन गया है.

इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा, ‘पहली बात यह है कि केंद्र में एनडीए सरकार के तहत सीबीआई की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा हुआ है. इसलिए हमें नहीं लगता कि हम सीबीआई को कार्रवाई करने की अनुमति दे सकते हैं.’

बघेल ने आगे कहा, ‘हम एक प्रणाली के माध्यम से कार्य करते हैं और जिस तरह से सीबीआई को राज्य में काम करने के लिए स्वतंत्र किया गया था, राज्य के अधिकारियों को परेशान किया जा रहा था. इस निर्देश का मतलब यह नहीं है कि सीबीआई को राज्य में प्रवेश करने से रोक दिया गया है. इसका मतलब यह है कि किसी भी कार्रवाई से पहले उसे राज्य सरकार से अनुमति लेनी होगी.’

बघेल की छत्तीसगढ़ सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय और कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) को इस निर्णय से अवगत करा दिया है.

अतिरिक्त मुख्य सचिव, आरपी मंडल द्वारा 10 जनवरी को हस्ताक्षरित पत्र में छत्तीसगढ़ की सरकार ने दिल्ली विशेष पुलिस (डीएसपीई) अधिनियम, 1946 की धारा छह के तहत सीबीआई के साथ अपना सहमति पत्र रद्द कर दिया है. पत्र में सीबीआई को निर्देश दिया गया है कि वह किसी भी ताज़ा मामले की जांच के लिए अपने अधिकार क्षेत्र का प्रयोग नहीं कर सकते हैं.

अधिकारियों ने बताया कि साल  2001 में छत्तीसगढ़ सरकार ने सीबीआई को सामान्य सहमति दी थी.

दरअसल सीबीआई दिल्ली विशेष पुलिस अधिनियम की धारा छह के तहत काम करता है और उसे किसी भी राज्य में जांच करने के लिए राज्यों के अनुमति की ज़रूरत होती है. सीबीआई और राज्यों के बीच सामान्य सहमति होती है, जिसके तहत सीबीआई अपना काम विभिन्न राज्यों में करती है, लेकिन अगर राज्य सरकार सामान्य सहमति को रद्द कर दे, तो सीबीआई को उस राज्य में जांच या छापेमारी करने से पहले राज्य सरकार से अनुमति लेनी होगी.

दिल्ली में कार्मिक मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि सामान्य सहमति वापस लेने से पहले के सीबीआई जांच वाले मामलों पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

बता दें कि यह पहली दफ़ा नहीं है जब किसी राज्य सरकार ने सीबीआई के साथ सामान्य सहमति ख़त्म की हो. सबसे पहले आंध्रप्रदेश की चंद्रबाबू नायडू सरकार ने ये निर्णय लिया था, जिसके बाद पश्चिम बंगाल की ममता सरकार ने भी सीबीआई के साथ सामान्य सहमति ख़त्म करने का निर्णय लिया था.

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)